Sunday, May 22, 2022
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भगोड़े माल्या ने प्रत्यर्पण आदेश के ख़िलाफ़ अपील दायर करने की माँगी अनुमति

इस प्रक्रिया के दौरान 30 मिनट की मौखिक सुनवाई होगी जिसमें माल्या के वकील और भारत सरकार की ओर से लड़ रही क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) अपील के ख़िलाफ़ और पक्ष में अपने दावों को नए सिरे से रखेगी।

आर्थिक अपराधी घोषित भगोड़े विजय माल्या ने ब्रिटेन की हाईकोर्ट में आवेदन कर ब्रिटेन के गृह मंत्री द्वारा दिए गए प्रत्यर्पण आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने की अनुमति माँगी है। ब्रिटेन के गृह मंत्री साज़िद जाविद ने माल्या के ख़िलाफ़ प्रत्यर्पण आदेश दिया था साथ ही अपील के लिए 14 दिन का समय दिया था। ख़बरों के अनुसार माल्या ने प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर होने के 10 दिन बाद गुरुवार (14 फ़रवरी 2019) को हाईकोर्ट के प्रशासनिक कोर्ट विभाग में आवेदन किया।

ब्रिटेन कोर्ट के प्रतिनिधि ने बताया कि माल्या की याचिका जज के पास भेजी गई है। इस पर जवाब आने में क़रीब 2 से 4 सप्ताह का समय लग सकता है। अगर माल्या की अर्ज़ी स्वीकार कर ली गई तो अगले कुछ महीनों में मामले की सुनवाई को आगे बढ़ा दिया जाएगा।

दूसरे केस में अगर माल्या की अर्ज़ी ख़ारिज हो जाती है तो उसके पास रिन्यूवल फॉर्म दाखिल करने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। बता दें कि माल्या पर क़रीब 9000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप है। माल्या 2016 से ब्रिटेन में है और 2017 से स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा जारी प्रत्यर्पण वारंट पर ज़मानत पर है।

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले माल्या ने अपनी अपील पर कोई नए सिरे से टिप्पणी नहीं की। हालाँकि, इससे पहले गृह सचिव ने 4 फरवरी को माल्या के प्रत्यर्पण के पक्ष में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा दिसंबर 10, 2018 को निर्णय दिए जाने के बाद, माल्या ने अपील करने का इरादा ज़ाहिर किया था।

आपको बता दें कि इस प्रक्रिया के दौरान 30 मिनट की मौखिक सुनवाई होगी जिसमें माल्या के वकील और भारत सरकार की ओर से वाद लड़ रही क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) अपील के ख़िलाफ़ और पक्ष में अपने दावों को नए सिरे से रखेगी ताकि जज यह फ़ैसला ले सकें कि इस मामले में पूरी सुनवाई की जा सकती है या नहीं।

बता दें कि यह प्रक्रिया लंदन में रॉयल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में होगी। इस प्रक्रिया में कई महीने भी लग सकते हैं क्योंकि मामले का अदालत की कार्रवाई के लिए सूचीबद्ध होना जजों की उपलब्धता और अन्य कारकों पर निर्भर करता है। हाईकोर्ट के स्तर पर फ़ैसला आने के बाद दोनों पक्षों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने का हक़ होगा। ब्रिटेन में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की प्रक्रिया थोड़ी और कठिन है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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