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गया में मोमोज खिलाकर नाबालिग हिंदू लड़कियों के अश्लील वीडियो बनाने वाला रेहान गिरफ्तार, दिल्ली तक पहुँची पुलिस: ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़ें पूरी ट्रेन की तलाशी से आत्मसमर्पण तक की कहानी

बिहार पुलिस टीम ने जाल बिछाकर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से दिल्ली तक आरोपित का पीछा किया, जिसके बाद चौतरफा तकनीकी और सामाजिक दबाव के कारण रेहान ने पटना के फुलवारी शरीफ थाने में आत्मसमर्पण कर दिया।

बिहार के गया जिले के बांकेबाजार में नाबालिग और अन्य युवतियों के अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के सनसनीखेज मामले में मुख्य आरोपित मोहम्मद रेहान को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपित गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था और पुलिस की विशेष जाँच टीम (SIT) को चकमा देकर दिल्ली से बिहार तक भागता फिर रहा था। आखिरकार पुलिस के चौतरफा बढ़ते दबाव और लगातार की जा रही छापेमारी के बाद आरोपित ने पटना के फुलवारी शरीफ थाने में आत्मसमर्पण कर दिया।

गया पुलिस की टीम उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर गया आई, जहाँ उसका मेडिकल कराने और अदालत में पेश करने के बाद उसे गया मंडल कारागार (जेल) भेज दिया गया है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश था, जिसे देखते हुए पुलिस अब इस मामले में त्वरित सुनवाई (स्पीडी ट्रायल) सुनिश्चित करने की तैयारी कर रही है।

मोमोज खिलाकर शोषण का क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला गया जिले के बाँकेबाजार थाना क्षेत्र का है, जहाँ सोशल मीडिया पर कुछ आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो प्रसारित होने के बाद विवाद की शुरुआत हुई। आरोपित मोहम्मद रेहान पर आरोप है कि वह इलाके की लड़कियों को रील बनाने के बहाने अपने जाल में फंसाता था, उनसे दोस्ती करता था और फिर उनके अश्लील वीडियो बना लेता था। इन वीडियो के जरिए वह लड़कियों को ब्लैकमेल करता था और उनके साथ जबरन संबंध बनाता था। बताया जा रहा है कि उसके निशाने पर लगभग 20 हिंदू लड़कियाँ थीं, जिनके वीडियो और तस्वीरें उसके पास होने की बात सामने आई है।

मामला तब उजागर हुआ जब एक पीड़ित नाबालिग लड़की के भाई को इस घिनौनी करतूत की भनक लगी। पीड़िता महादलित वर्ग से आती है। भाई ने हिम्मत दिखाते हुए बाँकेबाजार थाने में मुख्य आरोपित मोहम्मद रेहान के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपित के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act), आईटी एक्ट (IT Act) और अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) समेत कई अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया।

मामले की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक अन्य पीड़ित युवती, जिसका एक साल पहले विवाह हो चुका था, आरोपित रेहान ने उसके ससुराल तक इन अश्लील वीडियो को भेजकर उसका घर उजाड़ने की कोशिश की थी।

इस घटना के सामने आने के बाद पूरे बांकेबाजार इलाके में जबरदस्त तनाव और आक्रोश फैल गया। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने आरोपित की अविलंब गिरफ्तारी और सख्त से सख्त सजा की माँग को लेकर बाँकेबाजार को पूरी तरह बंद रखा। बाजार बंद के दौरान लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आरोपित को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया गया।

बिहार पुलिस ने SIT गठित कर की ताबड़तोड़ छापेमारी

मामले की संवेदनशीलता और जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए गया के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) सुशील कुमार ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने शेरघाटी के डीएसपी संदीप कुमार के नेतृत्व में चार सदस्यीय विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी ने तकनीकी और वैज्ञानिक अनुसंधान का सहारा लेते हुए आरोपित की तलाश शुरू की।

जाँच के शुरुआती चरण में पुलिस ने सबसे पहले नाबालिग पीड़िता का अदालत में धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया, ताकि कानूनी तौर पर केस मजबूत रहे। इसके साथ ही फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को कथित घटनास्थल पर भेजा गया, जहाँ से टीम ने कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए।

इंटरनेट और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वायरल वीडियो की डिजिटल जाँच भी शुरू की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि मुख्य आरोपित के अलावा इस वीडियो को आगे फैलाने में और किन-किन लोगों की भूमिका रही है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस इस रैकेट से जुड़े अन्य संदिग्धों की भी सरगर्मी से तलाश कर रही है।

ऑपइंडिया से बातचीत में बाँकेबाजार पुलिस का बड़ा खुलासा

इस पूरे घटनाक्रम और आरोपित को पकड़ने के लिए किए गए ‘कैट एंड माउस चेस’ (चूहे-बिल्ली के खेल) को लेकर बाँकेबाजार थाना के पदाधिकारी पवन कुमार ने ‘ऑपइंडिया’ से एक्सक्लूसिव बातचीत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि यह पूरा मामला 29 जून 2026 को तब प्रकाश में आया, जब पीड़ित नाबालिग के भाई ने थाने आकर पुलिस को एक पेन-ड्राइव सौंपी। इस पेन-ड्राइव में 5 से 6 बेहद आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो मौजूद थे। वीडियो देखते ही पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर आरोपित रिहान की तलाश शुरू कर दी।

थाना पदाधिकारी पवन कुमार ने ऑपइंडिया को बताया कि तकनीकी निगरानी (सर्विलांस) के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपित दिल्ली भाग गया है। बांकेबाजार थाना की एक विशेष टीम तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हुई। इसी बीच पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि आरोपित दिल्ली से ‘पुरुषोत्तम एक्सप्रेस’ ट्रेन में सवार होकर वापस बिहार लौट रहा है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए उत्तर प्रदेश के प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर तगड़ी घेरेबंदी की। चलती ट्रेन में पूरी छानबीन की गई, बोगियों को खंगाला गया और पुरुषोत्तम एक्सप्रेस के टीटीई (TTE) की मदद लेकर पूरी रिजर्वेशन लिस्ट भी देखी गई, लेकिन रेहान वहाँ नहीं मिला।

ट्रेन में तलाशी अभियान के बाद पुलिस टीम मिर्जापुर स्टेशन पर उतरी और वापस दिल्ली के लिए रवाना हुई। दिल्ली पहुँचने पर पुलिस को पता चला कि रिहान को पुलिस की भनक लग चुकी थी और वह महज 5 घंटे पहले ही वहाँ से अपनी भाभी के साथ फरार हो गया था। थाना पदाधिकारी ने बताया कि रेहान बेहद शातिर तरीके से पुलिस से बच रहा था; वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपना मोबाइल बंद रखता था और पूरे दिन में सिर्फ दो-तीन घंटे में एक बार कुछ मिनटों के लिए फोन ऑन करता था। दिल्ली से भागकर वह अयोध्या के रास्ते वाराणसी पहुँचा और फिर वहाँ से बिहार में दाखिल हुआ।

पुलिस टीम ने इस दौरान तकनीकी लोकेशन के आधार पर आरोपित की भाभी से संपर्क साधा और फोन पर उसे सख्त निर्देश दिया कि वे आरोपित को तुरंत आत्मसमर्पण करने के लिए कहें, क्योंकि पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया है और भागने का कोई रास्ता नहीं बचा है। पुलिस के इसी चौतरफा तकनीकी और सामाजिक दबाव के आगे घुटने टेकते हुए आखिरकार मोहम्मद रेहान ने पटना के फुलवारी शरीफ थाने में जाकर सरेंडर कर दिया।

थाना पदाधिकारी पवन कुमार ने आगे स्पष्ट किया कि आरोपित मोहम्मद रेहान की उम्र 18 वर्ष से अधिक है (यानी वह कानूनी रूप से बालिग है) और उस पर लगे आरोप बेहद संगीन हैं। पुलिस ने आरोपित का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया है, जो इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सबूत है। इस फोन को फॉरेंसिक ऑडिट के लिए भेजा जा रहा है ताकि डिलीट किए गए डेटा और अन्य वीडियो को भी रिकवर किया जा सके और यह साफ हो सके कि उसने और कितनी लड़कियों को अपनी हवस और ब्लैकमेलिंग का शिकार बनाया था।

आईजी विकास वैभव बोले- महिला अपराध पर होगी कड़ी कार्रवाई

इस संवेदनशील मामले पर मगध रेंज के महानिरीक्षक (IG) विकास वैभव ने कड़ा रुख अपनाया है। आईजी विकास वैभव ने स्पष्ट रूप से कहा कि महिलाओं की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा को ठेस पहुँचाने वाले किसी भी अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस बेहद कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है।

आईजी ने यह भी आश्वासन दिया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए गया पुलिस इस केस में त्वरित सुनवाई (स्पीडी ट्रायल) सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास करेगी। पुलिस का लक्ष्य है कि वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अदालत में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जाए, ताकि न्यायिक कार्यवाही बिना किसी देरी के पूरी हो सके और आरोपित को कानून के तहत निर्धारित अधिकतम व उचित सजा दिलाई जा सके।

बेटियों की सुरक्षा और उनके डिजिटल स्पेस को लेकर चिंता

गयाजी के बाँकेबाजार की इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया के दुरुपयोग और ग्रामीण इलाकों में पैर पसार रहे डिजिटल अपराधों की ओर ध्यान खींचा है। हालाँकि इस मामले में पुलिस की तत्परता, दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश और पटना तक की गई घेरेबंदी और तकनीकी सूझबूझ की सराहना हो रही है। मुख्य आरोपित मोहम्मद रेहान के जेल जाने के बाद स्थानीय बाजार तो खुल गए हैं और लोगों का गुस्सा कुछ शांत हुआ है, लेकिन इलाके के अभिभावकों में अब भी अपनी बेटियों की सुरक्षा और उनके डिजिटल स्पेस को लेकर चिंता बनी हुई है। अब सबकी नजरें कोर्ट के ट्रायल पर टिकी हैं, जहाँ इस बात का फैसला होगा कि पीड़ित बेटियों को कितनी जल्दी न्याय मिलता है।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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