Friday, May 31, 2024
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छत्तीसगढ़: सड़कों के अभाव में एंबुलेंस नहीं पहुँची गाँव, स्वास्थ्यकर्मियों ने गर्भवती महिला को टोकरी में बैठाकर पहुँचाया अस्पताल

गर्भवती महिला की नाजुक हालत देखते हुए 7 जुलाई को उसके पति ने महतारी एक्प्रेस को फोन लगाया। इसके बाद 102 नंबर से दो स्वास्थ्यकर्मी आए। उन दोनों ने ग्रामीणों की मदद से टोकरी और रस्सियों से एक डोला बनाया और महिला को उसमें बैठाकर 3 km तक चलकर उसे गाड़ी तक लाए। इसके बाद वे उसे लेकर अस्पताल पहुँचे। यहाँ उन्होंने उसकी डिलीवरी करवाई।

छत्तीसगढ़ के कोंडागाँव के मोहनबेड़ा ग्राम से एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में कुछ स्वास्थ्यकर्मी एक गर्भवती महिला को टोकरी में बैठाकर डिलीवरी के लिए अस्पताल लेकर जाते दिख रहे हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, गाँव की सड़कों के कारण एंबुलेंस गाँव तक नहीं पहुँच सकती थी। इसलिए महिला को टोकरी में बैठाकर अस्पताल तक ले जाया गया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, गर्भवती महिला की नाजुक हालत देखते हुए 7 जुलाई को उसके पति ने महतारी एक्प्रेस को फोन लगाया। इसके बाद 102 नंबर से दो स्वास्थ्यकर्मी आए।

मगर, गाँव तक का रास्ता खराब होने के कारण आगे जाना संभव नहीं हुआ। दोनों इस दौरान लगभग 3 किलोमीटर चले। वहाँ के हालात देखते हुए उन्होंने गाँव वालों से मदद माँगी।

फिर, उन दोनों ने ग्रामीणों की मदद से टोकरी और रस्सियों से एक डोला बनाया और महिला को उसमें बैठाकर 3 km तक चलकर उसे गाड़ी तक लाए। इसके बाद वे उसे लेकर अस्पताल पहुँचे। यहाँ उन्होंने उसकी डिलीवरी करवाई।

कोंडागाँव के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी टीआर कंवर ने बताया कि उन्होंने 102 नंबर पर एंबुलेंस को कॉल किया था। लेकिन एंबुलेंस वहाँ तक नहीं पहुँच पाई। वह रिमोट एरिया है। सड़क की अनुपलब्धता के कारण वाहन वहाँ नहीं जा सकते। डिलीवरी जिला अस्पताल में हो चुकी है। बच्चा और माँ दोनों सुरक्षित हैं।

गौरतलब है कि इस घटना के सामने आने के बाद जहाँ स्वास्थ्यकर्मियों को लेकर कहा जा रहा है कि उन्होंने मानवता की मिसाल पेश की। वहीं गाँव में सड़कों के अभाव को देखकर लोग सरकार की आलोचना कर रहे हैं। और कुछ का कहना है कि छत्तीसगढ़ में गावों का विकास तभी हो पाएगा, जब वहाँ नक्सलियों का समूल विनाश होगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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