ईद से कुछ ही दिन पहले हैदराबाद के ‘मुल्ला’ सैयद अयूब का एक विवादित वीडियो सामने आया है। वीडियो में उन्होंने मुसलमानों से सड़कों पर नमाज पढ़ने की अपील की है। रविवार यानी 15 मार्च 2026 को यह वीडियो पोस्ट किया गया था। NGO ‘हैदराबाद यूथ करेज’ का खुद को ऑर्गनाइजर बताने वाले सैयद अयूब के इंस्टाग्राम पर करीब 20 लाख फॉलोअर्स हैं।
वीडियो में देखा जा सकता है कि अयूब मुसलमानों से सड़कों पर नमाज पढ़ने की अपील कर रहा है। यह अपील सिर्फ संभल के मुस्लिमों से ही नहीं की जा रही है, बल्कि पूरे देश से की जा रही है। उसने कहा, “सिर्फ संभल में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सड़कों पर नमाज़ पढ़ी जाएगी, इंशाअल्लाह। अगर ईद की जमातें बड़ी होती हैं, तो मुसलमान बाहर निकल कर सड़कों पर नमाज पढ़ेंगे।”
उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को भी चुनौती दी, जिन्होंने सड़कों पर नमाज़ पढ़ने को लेकर चेतावनी दी थी। वीडियो में उन्होंने कहा, “अगर किसी को लगता है कि वे मुसलमानों को सड़क पर नमाज पढ़ने से रोक सकते हैं, तो वे कोशिश करके देख लें। मुस्लिम मुकदमों या जेल भेजने की धमकियों से नहीं डरते।”
अयूब ने UP के सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए अपमानजनक शब्द का भी इस्तेमाल किया। योगी सरकार की आलोचना करते हुए उसने कहा कि मुस्लिमों पर बेवजह पाबंदियाँ लगाई जा रही है। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राज्य के कई हिस्सों में सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर बहस छेड़ गई।
क्या है संभल का मामला ?
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब संभल प्रशासन ने ईद और जुमे की नमाज के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर पहले ही सख्त चेतावनी जारी कर दी है।
गुरुवार (12 मार्च 2026) को संभल में तैनात पुलिस अधिकारी कुलदीप कुमार ने ‘पीस समिति’ की एक बैठक बुलाई। इस बैठक में यह साफ कर दिया गया कि सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं होगी। बैठक के दौरान दिए गए उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया।
बैठक में उन्होंने कहा कि ईद से पहले प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है और शांति तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जो लोग मस्जिदों के बाहर सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ते हुए पाए जाएँगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अगर जरूरी हुआ, तो लोगों को जेल भी भेजा जा सकता है।”
UP DSP Kuldeep Kumar to Muslim residents in Sambhal: Some people, for the sake of Insta reel, sympathize with Iran and raise questions over assassination of Khamenei. https://t.co/MNAwh7e9Cy pic.twitter.com/NCmUVWB9OA
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) March 12, 2026
उन्होंने क्षेत्र में शांति बनाए रखने को लेकर कहा कि अगर लोग दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो रही घटनाओं से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं, तो वे उन जगहों पर जाने के लिए आजाद हैं, लेकिन भारत में अशांति फैलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, सड़कों पर धार्मिक सभाओं की इजाजत देने से अक्सर ट्रैफिक की समस्या पैदा होती है। लोगों की आवाजाही में रुकावट आती है, इसलिए पाबंदियाँ लगाई जाती हैं।
गाजा के लिए अयूब का रमजान प्रोजेक्ट
अपनी विवादित टिप्पणियों के अलावा सैयद अयूब एक और अभियान में शामिल हैं। वह युद्धग्रस्त गाजा के लोगों को अपने ‘हैदराबाद यूथ करेज’ एनजीओ के माध्यम से इफ्तार का खाना और पीने का पानी पहुँचा रहे हैं।
अयूब अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इस अभियान से जुड़े अपडेट शेयर करते रहते हैं और अपने फॉलोअर्स से इस पहल के लिए दान करने की अपील करते हैं।
हाल ही में सैयद अयूब को दिल्ली के उत्तम नगर में देखा गया। वह हिन्दू युवक तरुण कुमार की हत्या के आरोपितों में शामिल मुस्लिम महिला और उसके परिवार से मिलने आया था। तरुण कुमार की हत्या इस्लामी भीड़ ने की थी।
2024 में अवैध उगाही और धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तारी
सैयद अयूब को पहले भी कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। अप्रैल 2024 में उसे हैदराबाद पुलिस ने उसे धोखाधड़ी और अवैध धन उगाही के आरोप में शिकायत दर्ज की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उस पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर गाजा संकट का हवाला देकर धन जुटाने और उस धन के उपयोग को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप है।
यह शिकायत वकील पी. साई किशोर ने हैदराबाद के सैदाबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी। IPC की धारा 420 के तहत दर्ज FIR के अनुसार, अयूब ने ऑनलाइन चंदा यह दावा करते हुए इकट्ठा किया था कि वे खुद गाजा जाकर राहत सामग्री पहुँचाएँगे।
शिकायत में कहा गया था कि उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने निजी बैंक खाते की जानकारी साझा की थी। इसके अलावा, उन्होंने हैदराबाद हवाई अड्डे से और बाद में मिस्र से तस्वीरें पोस्ट की, ताकि लोगों को लगे कि वह राहत सामग्री लेकर गाजा जा रहा है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, पोस्ट लोगों को गुमराह करने के लिए डाले गए थे, क्योंकि हालात को देखते हुए सड़क मार्ग से गाजा तक सहायता भेजना लगभग असंभव था। अयूब पर दानदाताओं को गुमराह करने और झूठे वादे कर फंड जमा करने का भी आरोप लगाया गया था।
शिकायत में उनके NGO के खिलाफ कार्रवाई की भी माँग की गई और अनुरोध किया गया कि ‘हैदराबाद यूथ करेज’ के सोशल मीडिया पेजों को ब्लॉक कर दिया जाए।
2020 में फंड के दुरुपयोग के आरोप में सैयद अयूब की गिरफ्तारी
यह पहली बार नहीं था जब अयूब को गिरफ्तार किया गया था। साल 2020 में, हैदराबाद टास्क फोर्स पुलिस ने उन्हें उसी NGO के अध्यक्ष सलमान खान के साथ गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने बताया कि दोनों ने गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों की मदद के लिए आमलोगों से फंड जमा किए और इसका दुरुपयोग किया।
जाँच में पता चला कि NGO ने अपने फेसबुक पेज का इस्तेमाल आर्थिक तंगी से जूझ रहे मरीजों के वीडियो पोस्ट करने के लिए किए और जनता से उनके इलाज के लिए पैसे देने की अपील की।
इस दौरान एक पुरानी बीमारी से पीड़ित महिला का फोटो पोस्ट किया गया और इलाज के लिए चंदा इकट्ठा किये गए। लेकिन कुछ ही दिनों में अच्छी खासी रकम आरोपितों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।
पुलिस ने बताया कि ₹15 लाख सलमान खान के बैंक खाते में और ₹15 लाख सैयद अयूब के एक रिश्तेदार के खाते में ट्रांसफर किए गए। शेष रकम एक दूसरे खाते में ही पड़ी रही।
दानदाताओं ने जब शिकायत की, तो पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। बाद में, टास्क फोर्स ने हैदराबाद से अयूब और सलमान खान को गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए।
सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर चल रही बड़ी बहस
सड़कों पर नमाज पढ़ने का मुद्दा सिर्फ संभल तक ही सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में सड़कों पर नमाज पढ़ने पर पाबंदी लगा दी गई है, क्योंकि इससे ट्रैफिक जाम हो सकता है और आम लोगों को परेशानी हो सकती है।
अगर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर इकट्ठा होकर नमाज पढ़ते हैं, तो इससे ट्रैफिक जाम हो सकता है और वहाँ रहने वाले लोगों को दिक्कतें पेश आ सकती हैं। इसलिए पुलिस लोगों से कह रही है कि सड़कों के बजाय मस्जिदों, ईदगाहों या नमाज के लिए तय की गई दूसरी जगहों पर ही अपनी नमाज अदा करें।
अधिकारियों ने साफ किया कि ये पाबंदियाँ किसी भी धार्मिक गतिविधि को रोकने के लिए नहीं लगाई गई हैं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए लगाई गई हैं कि सार्वजनिक जगहों पर सभी लोगों की पहुँच बनी रहे।
मेरठ में भी पाबंदियाँ
मेरठ पुलिस ने रविवार (15 मार्च 2026) को ईद से पहले एक चेतावनी जारी की थी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे ने चेतावनी दी कि सड़कों पर नमाज पढ़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को पुलिस जाँच का सामना करना पड़ सकता है। यदि कानून-व्यवस्था का गंभीर उल्लंघन पाया गया, तो इसका असर पासपोर्ट जैसे सरकारी दस्तावेजों पर भी पड़ सकता है। बाद में, उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क पर नमाज पढ़ने और पासपोर्ट रद्द होने के बीच कोई सीधा कानूनी नियम नहीं है, लेकिन यदि जाँच में किसी आपराधिक संलिप्तता या बार-बार नियमों के उल्लंघन का पता चलता है, तो अधिकारी मौजूदा कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई कर सकते हैं।
(मुूल रूप से यह लेख अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)


