Homeदेश-समाजविकास दर 8.5% तक जाने की संभावना: आर्थिक सलाहकार परिषद

विकास दर 8.5% तक जाने की संभावना: आर्थिक सलाहकार परिषद

जिन चुनौतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है उनमें कृषि क्षेत्र में सुधार, एमएसएमई क्षेत्र, कौशल विकास, ऋण से संबंधित मुद्दे, डिजिटल भुगतान, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार आदि शामिल हैं।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने 25 जनवरी, 2019 को एक बैठक की और अर्थव्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया। परिषद ने इस बात का समर्थन किया कि अर्थव्यवस्था के वृहत् -अर्थव्यवस्था के मूलभूत घटक सुदृढ़ स्थिति में हैं। परन्तु चुनौतियाँ बनी हुई हैं और इनमें से कई चुनौतियों की प्रकृति संरचनात्मक है।

हालाँकि विश्व-आर्थिक विकास की संभावनाएँ, विशेष कर विकसित अर्थव्यवस्थाओं में, बहुत आशाजनक नहीं हैं लेकिन उभरती अर्थव्यवस्थाओं में पर्याप्त गति से विकास हो रहा है। वैश्विक घटनाक्रमों से भारत अछूता नहीं है। अगले कुछ वर्षों तक भारत की विकास दर 7-7.5% के बीच रहने की संभावना है जो दुनिया की सबसे तेज विकास दरों में एक है। यदि संरचनात्मक समस्याओं को समाप्त करने के लिए सुधार के उपाय किये जाते हैं तो विकास दर में 1 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है। 

ईएसी-पीएम द्वारा विचार-विमर्श किये गये मुद्दों में कृषि समस्या, निवेश के रूझान (14वें वित्त आयोग द्वारा राज्यों को दिए गए निवेश सहित), वित्तीय सुदृढ़ीकरण, ब्याज दर प्रबन्धन, ऋण व वित्तीय बाजार आदि शामिल थे। परिषद ने यह महसूस किया कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद रिजर्व बैंक ने रूपये के विनिमय दर का बेहतर प्रबंधन किया है। अच्छी ख़बर यह है कि तेल उपयोग (जीडीपी के प्रतिशत के रूप में जीवाश्म ईंधन का उपयोग) में गिरावट दर्ज की जा रही है।

ऐसे संकेत हैं कि वित्तीय बचत में तेजी आ रही है और निजी बैंक, सेवा क्षेत्र को ऋण उपलब्ध करा रहे हैं। वित्तीय क्षेत्र में सुधारों को और मजबूती दी जानी चाहिए। सरकार पहले से ही यह कार्य कर रही है। 

परिषद ने महसूस किया कि विदेश व्यापार में देखी जा रही संरक्षणवादी चुनौती को समर्थक नीतिगत हस्तक्षेपों के माध्यम से उलट दिया जाना चाहिए क्योंकि निर्यात की स्थिति बेहतर हुई है और अब यह सकारात्मक बदलाव दिखाई पड़ने लगा है। कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को आसान ऋण उपलब्धता और मनरेगा जैसे रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से दूर किया जा सकता है।

परिषद (ईएसी-पीएम) का दृढ़ विश्वास है कि वित्तीय सुदृढ़ीकरण लक्ष्य से किसी भी प्रकार का विचलन नहीं होना चाहिए लेकिन सामाजिक क्षेत्र में भी निरंतर जो दिया जाना चाहिए। जिन चुनौतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है उनमें कृषि क्षेत्र में सुधार, एमएसएमई क्षेत्र, कौशल विकास, ऋण से संबंधित मुद्दे, डिजिटल भुगतान, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार आदि शामिल हैं। सुदढ़ वृहत् आर्थिक प्रबंधन के लिए सरकार और आरबीआई को बधाई दी जानी चाहिए और इस प्रयासों को जारी रखा जाना चाहिए। 

साभार: पत्र सूचना कार्यालय

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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