Friday, April 12, 2024
Homeदेश-समाजफिर से सोच लो, आपको टीपू सुल्तान का जन्मदिवस मनाना चाहिए या नहीं: कर्नाटक...

फिर से सोच लो, आपको टीपू सुल्तान का जन्मदिवस मनाना चाहिए या नहीं: कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट की राय

भाजपा सरकार ने अदालत को यह बताया कि अगर कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत स्तर पर टीपू सुल्तान के जन्म दिन का उत्सव करना चाहता है तो उस पर कोई रोक नहीं है। केवल कॉन्ग्रेस की सरकारों के उलट भाजपा की सरकार, सरकार के स्तर पर यह आयोजन नहीं करेगी।

एक दंग कर देने वाली सलाह में कर्नाटक के हाई कोर्ट ने राज्य की बीएस येद्दुरप्पा सरकार से इस्लामिक तानाशाह टीपू सुल्तान की जयंती न मनाने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है। भाजपा सरकार ने कॉन्ग्रेस के समय से चलती आ रही टीपू का जन्मदिन मनाए जाने की प्रथा पर रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) डाली गई और सरकार के निर्णय को चुनौती दी गई थी। उसी की सुनवाई में अदालत ने यह सलाह दी थी।

भाजपा सरकार ने अदालत को यह बताया कि अगर कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत स्तर पर टीपू सुल्तान के जन्म दिन का उत्सव करना चाहता है तो उस पर कोई रोक नहीं है। केवल कॉन्ग्रेस की सरकारों के उलट भाजपा की सरकार, सरकार के स्तर पर यह आयोजन नहीं करेगी। इसके बाद भी कर्नाटक की उच्च अदालत ने भारतीय जनता पार्टी को इस्लामी कट्टरपंथी और तानाशाह की जयंती मनाना छोड़ने के निर्णय के बारे में एक बार और सोचने की सलाह देना बंद नहीं किया।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने भाजपा सरकार को इस बारे में फैसला लेने के लिए दो महीने का समय दिया है, ‘सभी पहलुओं’ पर सोच विचार कर के निर्णय लेने के लिए। इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2020 में होगी। टीपू सुलतान का जन्म दिन 20 नवंबर को पड़ता है, यानि कम से कम इस साल अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार न चाहे तो टीपू सुल्तान जयंती नहीं मनाई जा सकती।

कल (6 नवंबर, 2019 को) बिलाल अली की पीआईएल की सुनवाई करने बैठी बेंच ने यह सभी टिप्पणियाँ की थीं। इस बेंच का नेतृत्व और कोई नहीं, खुद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ए एस ओका कर रहे थे। इसी बेंच ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या कारण है राज्य सरकार द्वारा पिछले चार साल से किए जा रहे आयोजन को रोकने का। याचिकाकर्ता बिलाल दिलचस्प रूप से खुद कर्नाटक के निवासी नहीं बल्कि लखनऊ, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। वे अलबत्ता टीपू नेशनल सर्विस एसोसिएशन और टीपू सुल्तान यूनाइटेड फोरम के अध्यक्ष ज़रूर हैं।

अपनी पीआईएल में उन्होंने सरकार के टीपू जयंती को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी। साथ ही दावा किया कि यह रद्द किया जाना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के खिलाफ है।

दिलचस्प बात यह है कि तीन साल पहले 2016 में इसी हाई कोर्ट ने टीपू सुल्तान की जयंती सार्वजनिक धन से मनाए जाने के औचित्य पर ही सवाल खड़ा किया था। उस समय के मुख्य न्यायाधीश सुभ्रो कमल मुख़र्जी ने कहा था कि टीपू कोई स्वतंत्रता सेनानी नहीं, महज़ एक राजा था जिसने अपने स्वार्थ की रक्षा के लिए दुश्मनों से युद्ध किया था।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जज की टिप्पणी ही नहीं, IMA की मंशा पर भी उठ रहे सवाल: पतंजलि पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ईसाई बनाने वाले पादरियों के ‘इलाज’...

यूजर्स पूछ रहे हैं कि जैसी सख्ती पतंजलि पर दिखाई जा रही है, वैसी उन ईसाई पादरियों पर क्यों नहीं, जो दावा करते हैं कि तमाम बीमारी ठीक करेंगे।

‘बंगाल बन गया है आतंक की पनाहगाह’: अब्दुल और शाजिब की गिरफ्तारी के बाद BJP ने ममता सरकार को घेरा, कहा- ‘मिनी पाकिस्तान’ से...

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में ब्लास्ट करने वाले 2 आतंकी बंगाल से गिरफ्तार होने के बाद भाजपा ने राज्य को आतंकियों की पनाहगाह बताया।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
282,677FollowersFollow
417,000SubscribersSubscribe