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75 साल बाद इस्लामिक झंडे को हटा फहराया गया तिरंगा: कर्नाटक के कोलार घंटाघर से हटा इस्लामीकरण का प्रतीक

भाजपा सांसद मुनिस्वामी ने ट्विटर के जरिए कहा कि 74 साल तक इंतजार कराने के बाद समुदाय विशेष के झंडे की जगह भारतीय तिरंगे को स्थान दिया गया।

कर्नाटक (Karnataka) के कोलार जिले में स्थित घंटाघर बीते 75 वर्षों से इस्लामी रंग में रंगा हुआ था, लेकिन अब इसमें परिवर्तन देखने को मिला है। शनिवार (19 मार्च 2022) को पहली बार कोलार के क्लॉक टॉवर को तिरंगे के रंग में रंग दिया गया। वहाँ पर शान से देश का तिरंगा फहराया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, 7 दशकों के बाद ऐसा हो सका है कि घंटाघर को सफेद रंग से पेंट करने के बाद उस पर तिरंगे की पेंटिंग भी बनाई गई। इस दौरान वहाँ काम करने वाले श्रमिकों को पुलिस ने पूरी सुरक्षा दी। हालात बेकाबू न हों, इसके लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को तैनात किया गया था। इस मौके पर कोलार जिले के एसपी डी देवराजू भी मौके पर मौजूद रहे। घंटाघर पर 70 सालों से भी अधिक समय से लहरा रहे इस्लामिक झंडे को जिला प्रशासन द्वारा हटाए जाने के बाद शहर में तनावपूर्ण स्थिति हो गई थी। हालाँकि, कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

इसके बाद कोलार जिला पुलिस ने स्थानीय मुस्लिमों समेत अन्य लोगों को घंटाघर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कार्यक्रम में शामिल किया। जिला प्रशासन द्वारा लिए गए एक्शन का वीडियो वायरल होने के बाद नेटिजन्स घंटाघर को कंट्रोल में लेने के लिए अधिकारियों की तारीफ कर रहे हैं।

हाल ही में कोलार से बीजेपी के लोकसभा सांसद मुनिस्वामी एस ने घंटाघर पर लहरा रहे इस्लामी झंडे को हटाकर वहाँ पर भारतीय तिरंगा फहराने का आश्वासन कोलार की जनता से किया था। यहीं नहीं घंटाघर विवाद के बीच जिला प्रशासन ने शहर में धारा 144 लागू की थी, जिसके बाद शुक्रवार को भाजपा सांसद ने शहर में धरना दिया था। उन्होंने प्रशासन को रोकने की चेतावनी देते हुए कहा था कि वो घंटाघर में तिरंगा फहराए जाने तक विरोध करते रहेंगे।

शनिवार को मुनिस्वामी ने ट्विटर के जरिए कहा कि 74 साल तक इंतजार कराने के बाद समुदाय विशेष के झंडे की जगह भारतीय तिरंगे को स्थान दिया गया।

उल्लेखनीय है कि कोलार के लिए मील के पत्थर इस घंटाघर का निर्माण 1930 में मुस्तफा साहब नाम के व्यापारी ने करवाया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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