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कर्नाटक में अंजनेय स्वामी मंदिर में जीसस-मैरी की तस्वीर लगाने का वायरल क्लेम: पुलिस और पुजारी ने किया दावे को ख़ारिज

"SP जब मंदिर गई थीं तो अपने साथ कोई तस्वीर लेकर नहीं गई थी। बल्कि जीसस और मैरी की तस्वीर को मंदिर प्रशासन ने ही उन्हें अन्य हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरों के साथ अनुष्ठान समाप्त होने के बाद उपहार स्वरुप दिया गया था।"

एक कन्नड़ वेब पोर्टल की रिपोर्ट में किए गए दावे के अनुसार, कर्नाटक के चामराजनगर की एक नई पुलिस अधीक्षक (SP) दिव्या सारा थॉमस ( Divya Sara Thomas) कथित रूप से मंदिर में यीशु और मैरी की तस्वीर लगाने और उनकी पूजा करने के लिए अंजनेय स्वामी मंदिर के पुजारी पर दबाव बनाया गया है। जबकि अब नई सूचनाओं के आलोक में यह दावा गलत साबित हुआ है।

इससे पहले बताया जा रहा था कि पुलिस अधिकारी उस समय अपने हाथों में जीसस और मैरी की फोटो लिए हुए थी, जब वह मंदिर में दर्शन करने गई। आखिरकार, पुजारी ने अधिकारी के दबाव के आगे झुक कर गर्भगृह में जीसस और मेरी की तस्वीर लगानी पड़ी। लेकिन पुलिस के बयान के अनुसार, दरअसल, मंदिर प्रशासन द्वारा ही वह तस्वीर SP दिव्या थॉमस को कई अन्य उपहारों के साथ दिया गया था।

ज्ञात हो कि 2013 के कर्नाटक बैच की आईपीएस अधिकारी दिव्या सारा थॉमस ने इसी साल जुलाई माह में कर्नाटक चामराजनगर में पहली महिला पुलिस अधीक्षक के रूप में पदभार सँभाला है। वह पहले बेंगलुरु में केंद्रीय सशस्त्र रिजर्व बल में डीसीपी के पद पर थीं।

यह घटना 5 अगस्त की ही बताई जा रही है, जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के स्वयंसेवकों ने भूमिपूजन की विशेष पूजा का आयोजन किया था।

इस अनुष्ठान के बाद ही मंदिर में जीसस और मैरी की तस्वीर लगाने के दावे के साथ बहुत सारे ट्वीट में यह अधूरी सूचना साझी की गई थी जो कि बाद में वायरल हो गया। वायरल होने के बाद अब मंदिर प्रशासन और पुलिस ने जीसस और मैरी की तस्वीरें लगाने की भ्रामक दावे पर स्पष्टीकरण देकर सच उजागर किया है। जिसके बाद नवीनतम जानकारी के आधार पर यह पोस्ट अपडेट की गई है।

कर्नाटक पुलिस ने तस्वीर लगाने के दावे को ख़ारिज करते हुए, इस घटना का सच बताने के उद्देश्य से अपने बयान में कहा, “SP जब मंदिर गई थीं तो अपने साथ कोई तस्वीर लेकर नहीं गई थी। बल्कि जीसस और मैरी की तस्वीर को मंदिर प्रशासन ने ही उन्हें अन्य हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरों के साथ अनुष्ठान समाप्त होने के बाद उपहार स्वरुप दिया गया था।”

अतः अब यह स्पष्ट है कि वायरल दावे में कोई सच्चाई नहीं है। तो ऑपइंडिया ने भी अपनी यह रिपोर्ट जो वायरल क्लेम और कई दूसरे मीडिया रिपोर्ट के आधार पर थी। उसमें अपडेट किया है।

अपडेट: यह खबर नई सूचनाओं के आधार पर अगस्त 15, 2020, समय- 6 PM पर अपडेट की गई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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