Wednesday, May 22, 2024
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पाकिस्तान से आया ‘लंपी’ वायरस, राजस्थान-गुजरात में तड़प-तड़प कर मर रहे गोवंश: अब तक 3300 मौत, 27 जिलों में फैला; चपेट में 40000 पशु

लंपी स्किन डिजीज का कोई सटीक इलाज नहीं है। इस वजह से पशुपालक खासकर गायों को पालने वाले किसान ज्यादा परेशान नजर आ रहे हैं।

राजस्थान और गुजरात में लंपी वायरस के कारण गोवंश की तड़प-तड़प कर मौत हो रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों राज्य में अब तक 3000 हजार से ज्यादा गोवंश की मौत हो चुकी है। करीब 27 जिलों में यह फैला चुका है।

राजस्थान में 2100 गायों की लंपी से मौत

अकेले राजस्थान में लंपी बीमारी से 2100 से अधिक गायों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में इन दिनों जानवरों में त्वचा संबंधी संक्रमण पैदा करने वाली ‘लंपी’ बीमारी तेजी से फैल रही है। बीते तीन महीनों के दौरान राजस्थान के 10 जिलों में करीब 2100 से अधिक गायों की मौत हुई है। 40,000 से ज्यादा गौवंश इसकी चपेट में आ चुके हैं। इस बीमारी का कोई सटीक इलाज नहीं होने की वजह से पशुपालक खासकर गायों को पालने वाले किसान ज्यादा परेशान नजर आ रहे हैं।

पाकिस्तान के रास्ते आया वायरस

राजस्थान के अधिकारियों का कहना है कि लंपी नामक यह संक्रामक रोग इस साल अप्रैल में पाकिस्तान के रास्ते भारत आया। लंपी डिजीज पहले जैसलमेर और बाड़मेर जैसे सीमावर्ती जिलों में फैली। अब यह जोधपुर, जालौर, नागौर, बीकापुर, हनुमानगढ़ और अन्य जिलों में भी फैल रही है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण राज्‍य मंत्री कैलाश चौधरी ने लंपी रोग से बड़ी संख्‍या में गायों की मौत की बात स्‍वीकारते हुए कहा है कि सरकार केंद्रीय वैज्ञानिक दल की सिफारिशों के आधार पर इसके इलाज के लिए जरूरी कदम उठाएगी। एक केंद्रीय दल ने हाल ही में प्रभावित इलाके का दौरा किया था। पशुओं पर इस रोग के कहर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले जोधपुर जिले में पिछले दो सप्ताह में 254 मवेशी इस बीमारी से अपनी जान गँवा चुके हैं। राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह सोलंकी ने पिछले दिनों विवशता जाहिर करते हुए कहा था कि इस बीमारी से बचने के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है।

गुजरात में भी लंपी का कहर

गुजरात के कुल 33 जिलों में से 17 में अब तक 1200 से ज्यादा मवेशी ‘लंपी’ रोग के कारण मर चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सर्वेक्षण, उपचार और टीकाकरण की गति बढ़ा दी है और पशुओं के मेले के आयोजन पर भी रोक लगा दी है। राज्य के कृषि और पशुपालन मंत्री राघव जी पटेल ने कहा कि इस संक्रामक रोग की वजह से शनिवार (30 जुलाई 2022) तक 1240 मवेशियों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य में इस वायरस का पहला केस सामने आने के साथ ही पशुपालन मेडिकल व अन्य विभागों की बैठक बुलाकर पशुओं के उपचार व टीकाकरण का कार्य युद्ध स्तर पर चलाने का निर्देश दिया था। बचाव के लिए 5.74 लाख पशुओं को टीका दिया जा चुका है।

गुजरात के 17 जिले प्रभावित

पटेल ने कहा कि प्रभावित जिलों में सौराष्ट्र, कच्छ, जामनगर, देवभूमि द्वारका, राजकोट, पोरबंदर, मोरबी, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, बनासकांठा, पाटण, सूरत, सुरेंद्रनगर, भावनगर अरवल्ली और पंचमहल शामिल है। राजकोट जिला प्रशासन के अनुसार, अन्य राज्यों, जिलों, तालुका और शहरों से मवेशियों के आवागमन पर 21 अगस्त तक पाबंदी लगा दी गई है। पशुओं को अलग-थलग रखने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने मरे हुए मवेशियों को खुले में फेंकने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। मंत्री ने कहा कि प्रभावित जिलों के 1746 गाँवों में 50328 मवेशियों का इलाज किया जा चुका है।

सबसे पहले अफ्रीका में फैला यह रोग

यह रोग सबसे पहले 1929 में अफ्रीका में फैला था। पिछले कुछ सालों में यह दुनिया के अन्य हिस्सों में भी फैला है। साल 2015 में तुर्की और ग्रीस और 2016 में रूस जैसे देश में इसने तबाही मचाई। जुलाई 2019 में इसे बांग्लादेश में देखा गया, जहाँ से ये कई एशियाई देशों में फैल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, लंपी स्किन डिजीज साल 2019 से अब तक सात एशियाई देशों में फैल चुका है। अगस्त 2019 में भारत और चीन, जून 2020 में नेपाल, जुलाई 2020 में ताइवान, भूटान, अक्टूबर 2020 वियतनाम में और नंवबर 2020 में हांगकांग तक पहुँच गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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