महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की यूनिट से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया था, जहाँ हिंदू महिला-पुरुष कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण की कोशिश के आरोप लगे थे। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जाँच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अब कोर्ट में अपनी चार्जशीट दाखिल की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ करार दिए गए इस मामले में 1500 से अधिक पन्नों की चार्जशीट पेश होते ही कई बड़े खुलासे हुए हैं, जिसने पूरे राज्य की राजनीति और सामाजिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
पहली चार्जशीट में क्या है और कौन-कौन हैं आरोपित?
SIT ने TCS नासिक कांड में अपनी पहली चार्जशीट नासिक की कोर्ट में दाखिल की, जो करीब 1500 पन्नों की है। यह चार्जशीट देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज पहली FIR के आधार पर तैयार की गई है। इस पहली चार्जशीट में मुख्य रूप से चार लोगों को आरोपित बनाया गया है। इनके नाम दानिश एजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तर, निदा एजाज खान और AIMIM के कॉर्पोरेट मतीन मजीद पटेल हैं।
इन आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं जैसे- आपराधिक साजिश, बलात्कार, धोखे से शारीरिक संबंध बनाना, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचना और आरोपितों को शरण देना जैसी धाराएँ लगाई गई है। इसके अलावा, मामले में अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम यानि SC/ST एक्ट भी जोड़ा गया है।
पूर्व सांसद इम्तियाज जलील का नाम क्यों आया?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस 1500 पन्नों की चार्जशीट में AIMIM के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील का नाम सामने आया। चार्जशीट में यह जिक्र उस समय का है जब पुलिस इस मामले की मुख्य महिला आरोपित निदा खान की तलाश कर रही थी और वह फरार चल रही थी। पुलिस ने जब निदा खान को छुपाने के आरोप में AIMIM का कॉर्पोरेटर मतीन पटेल को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो मतीन ने बार-बार पुलिस के सामने एक ही बात दोहराई और कहा, “इम्तियाज जलील साहब को पूछना पड़ेगा।”
मतीन के इस बयान को पुलिस ने अपनी चार्जशीट का हिस्सा बनाया है, जिसके बाद से ही पूर्व सांसद इम्तियाज जलील का नाम इस पूरे विवाद से सीधे जुड़ गया है। इम्तियाज जलील AIMIM का एक कद्दावर नेता हैं और छत्रपति संभाजीनगर से पूर्व सांसद रह चुका है। मतीन पटेल जो कि इस पार्टी का कॉर्पोरेटर हैं, वो इम्तियाज जलील को अपना राजनीतिक बॉस मानता हैं।
चार्जशीट के मुताबिक, जब निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका नासिक कोर्ट ने खारिज की थी, तब मतीन पटेल ने जानते-बूझते हुए भी निदा और उसके पूरे परिवार (अम्मी-अब्बू, भाई-चाची) को छत्रपति संभाजीनगर के नरेगाँव-कौसर सिडको इलाके में छिपाकर रखा था। कड़ी पूछताछ के बाद जब मतीन ने पुलिस को उस जगह का पता बताया, तो पुलिस ने छापेमारी कर निदा खान को गिरफ्तार किया। इसके बाद प्रशासन ने मतीन पटेल की उस अवैध संपत्ति को भी बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया जहाँ मतीन पटेल ने निदा खान को छुपाया था। बता दें कि इम्तियाज जलील ने अपने समर्थकों से एक वादा किया था कि AIMIM उसी स्थान पर मतीन पटेल को एक बेहतर और बड़ा स्थान बनाएगी, जहाँ ध्वस्त हुआ।
बातचीत में इम्तियाज जलील ने क्या बताया?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे मामले और चार्जशीट में नाम आने को लेकर इम्तियाज जलील से बातचीत की गई। इम्तियाज जलील उस समय सऊदी अरब में हज यात्रा पर था। उसने फोन पर बातचीत में कहा कि उसे चार्जशीट में अपना नाम शामिल होने की कोई जानकारी नहीं है। इम्तियाज जलील ने कहा, “मैं किसी भी तरह की जाँच का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हूँ। मैंने पहले भी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि मैं लड़की (निदा) के परिवार से मिला था और जो मुझे सही लगता है, मैं उसके लिए अपनी लड़ाई जारी रखूँगा।”

इम्तियाज जलील ने निदा के परिवार से मुलाकात की बात भी बताई और मतीन पटेल के घर पर चले बुलडोजर के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व भी किया था। वहीं, मतीन पटेल के वकील अभयसिंह भोसले का कहना है कि मतीन ने इस मुख्य विवाद से कोई लेना-देना नहीं है और इस पर सिर्फ राजनीति की जा रही है।
चार्जशीट का विस्तार: WhatsApp चैट, Email और डराने-धमकाने का खेल
SIT की इस चार्जशीट में आरोपितों के खिलाफ तकनीकी और डिजिटल सबूतों की भरमार है। पुलिस ने पीड़ितों और आरोपितों के मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण WhatsApp चैट के स्क्रीनशॉट और Email ट्रेल बरामद किए हैं। पहली FIR की पीड़िता ने आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपित दानिश शेख ने साल 2022 से ही उसका शोषण शुरू कर दिया था। उसने शादी का झांसा देकर हिंदू पीड़िता के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इसके साथ ही उसने पीड़िता का आर्थिक शोषण भी किया।

आरोपित दानिश ने पीड़िता के पैसों पर खूब ऐश किया। पीड़िता का आरोप है कि दानिश अपने घूमने-फिरने, होटल और कैफे जाने से लेकर घर के राशन तक का पूरा खर्च उसी से कराता था और उसने दानिश को महँगे बैग और घड़ियाँ भी गिफ्ट की थीं। इतना ही नहीं, दानिश ने कभी घर के नाम पर 10 हजार, कभी ट्रिप के लिए 5 हजार, तो कभी सेविंग्स स्कीम के बहाने हर महीने 5 हजार रुपए उससे ऐंठे। पीड़िता के अनुसार, इस रिश्ते के दौरान उसने दानिश पर कुल मिलाकर 2.2 लाख रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए थे।
यह लव जिहाद और कॉर्पोरेट जिहाद है- देवेंद्र फडणवीस
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया। एक मीडिया मंच पर बोलते हुए CM फडणवीस ने स्पष्ट किया कि पुलिस जाँच में इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि TCS नासिक कांड यूनिट में जबरन धर्मांतरण कराने की सुनियोजित कोशिशें की जा रही थीं। CM फडणवीस ने कहा, “हमें अंतरधार्मिक विवाह से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जब किसी खास मकसद के तहत एक तय पैटर्न बनाकर हिंदू महिलाओं को निशाना बनाया जाता है, तो यह साफ तौर पर ‘लव जिहाद’ का मामला बनता हैं।” CM फडणवीस ने इसे ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ की संज्ञा भी दी और चेतावनी दी कि महाराष्ट्र सरकार के पास ऐसे कृत्य से निपटने के लिए बेहद सख्त कानून मौजूद है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
निदा खान की भूमिका और ‘जहन्नुम’ का डर
चार्जशीट के अनुसार, निदा खान का काम पीड़ित हिंदू महिला को इस्लामिक रीति-रिवाजों की तरफ धकेलना था। निदा ने पीड़िता के फोन में ‘मुस्लिम प्रो’ नाम का ऐप डाउनलोड करवाया, उसे सोशल मीडिया पर इस्लाम से जुड़े Video भेजे और जबरन ‘अल-फातिहा’ और ‘कलमा’ पढ़वाया। निदा ने पीड़िता को धमकी दी थी कि अगर उसने इस्लाम नहीं कबूला तो ‘अल्लाह तुम्हारे परिवार को जहन्नुम (नरक) में भेज देगा।’

जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच, निदा खान अक्सर हिंदू पीड़िता को ऑफिस के बाद अपने घर ले जाती थी, जहाँ उसे बुर्का और हिजाब पहनना सिखाया जाता था और नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता था। निदा खान का परिवार भी इसमें शामिल था और उसकी अम्मी हिंदू पीड़िता को किसी मदरसे में भेजने की योजना बना रही थी।
क्या है TCS नासिक कांड?
यह पूरा विवाद महाराष्ट्र के नासिक के अशोका मार्ग में TCS के BPO यूनिट से शुरू हुआ था। इस यूनिट में काम करने वाली कई हिंदू महिला कर्मचारियों ने अपने ही मुस्लिम सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। हिंदू महिलाओं का कहना था कि वहाँ काम करने वाले कुछ मुस्लिम पुरुष कर्मचारियों ने उनका मानसिक और शारीरिक शोषण किया।
आरोपितों ने दफ्तर के भीतर ही एक WhatsApp ग्रुप बना रखा था, जिसके जरिए हिंदू महिला कर्मचारियों पर निशाना साधा जाता था। उन पर मुस्लिम मजहबी प्रथाओं को अपनाने, नमाज पढ़ने, हिजाब पहनने और जबरन मांस खाने का दबाव बनाया जाता था। जब हिंदू पीड़ित महिलाओं ने हिम्मत दिखाकर आवाज उठाई, तब जाकर पुलिस ने अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में कुल 9 FIR दर्ज कीं और मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT का गठन किया गया।
TCS की कार्रवाई और मामले की वर्तमान स्थिति
इस मामले के उजागर होने के बाद, देश की दिग्गज IT कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने तुरंत एक्शन लिया। कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि उनकी कार्यस्थल पर उत्पीड़न और प्रताड़ना को लेकर ‘जीरो-टोलरेंस’ की नीति है। कंपनी ने आंतरिक जाँच के बाद मामले में संलिप्त पाए गए सभी 8 मुस्लिम कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से सस्पेंड कर दिया है।
वर्तमान में, 8 आरोपित गिरफ्तार है। मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज अन्य 8 FIR के सिलसिले में भी एक दूसरी बड़ी चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है, जिसमें रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी और अश्विनी चैनानी जैसे अन्य आरोपितों के नाम शामिल हैं। पुलिस अब आरोपितों के वॉयस सैंपल इकट्ठा कर रही है और उनके कॉल रिकॉर्ड्स की गहन जाँच कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि फरार रहने के दौरान वे राजनीतिक रूप से किन-किन लोगों के संपर्क में थे।


