Sunday, September 19, 2021
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शौर्य को सलाम: वकालत छोड़ सेना में लेफ्टिनेंट बनेंगी बलिदानी मेजर की पत्नी, SSB परीक्षा में आईं ‘अव्वल’

"भोपाल में ओरल टेस्ट हुआ था। परीक्षा केंद्र पर मुझे वही टेस्ट नंबर मिला, जो कि OTA में चयन से पहले मेरे पति को मिला था।"

भारत-चीन सीमा पर वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सेना के मेजर प्रसाद गणेश महादिक की पत्नी भी अब सेना में शामिल होंगी। उन्होंने सेना में शामिल होने के लिए ज़रूरी सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (SSB) की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली है। उन्होंने दूसरे प्रयास में यह परीक्षा उत्तीर्ण की। ‘विडो केटेगरी’ में 16 अभ्यर्थियों में अव्वल आईं गौरी माहादिक अब 49 हफ़्ते की ट्रेनिंग के लिए अप्रैल में चेन्नई रवाना होंगी। क़रीब एक वर्ष के कड़े प्रशिक्षण के बाद उन्हें मार्च 2020 में भारतीय सेना में नॉन-टेक्निकल श्रेणी के तहत लेफ्टिनेंट का पद दिया जाएगा।

गौरी महादिक पेशे से वकील और कंपनी सेक्रेटरी हैं। पति के चल बसने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ कर सेना में जाने का निर्णय लिया। फिलहाल वह मुंबई के एक फर्म में जॉब कर रही हैं। इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ काम कर चुकीं गौरी ने अपने इस निर्णय के बारे में बताते हुए कहा:

“पति के शहीद होने के 10 दिन बाद मैं सोच रही थी कि अब मुझे क्या करना चाहिए। फिर मैंने फ़ैसला किया कि मुझे उनके लिए कुछ करना है और मैं सेना में शामिल होउँगी। मैं उनकी (पति स्वर्गीय प्रसाद महादिक) वर्दी और उनके स्टार को पहनूँगी। मैं चेन्नई में ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में प्रशिक्षण के बाद बतौर लेफ्टिनेंट के रूप में अगले साल सेना में शामिल हो जाउँगी। मेरे पति ने भी वहीं ट्रेनिंग ली थी।

SSB की परीक्षा के बारे में बात करते हुए गौरी महादिक ने बताया:

“देश की रक्षा करते हुए बलिदान हुए जवानों की विधवाओं के लिए एसएसबी परीक्षा हुई थी। बेंगलुरू, भोपाल और इलाहाबाद- इन तीन केंद्रों से कुल 16 अभ्यर्थी चुनी गईं। हमें सीडीएस की लिखित परीक्षा से छूट दी गई। हमारा भोपाल में सीधे ओरल टेस्ट हुआ था। परीक्षा केंद्र पर मुझे वही टेस्ट नंबर मिला, जो कि ओटीए में चयन से पहले मेरे पति को मिला था।”

बता दें कि 30 दिसंबर 2017 में गौरी महादिक के पति भारत-चीन सीमा पर स्थित अरुणाचल प्रदेश के तवांग में ड्यूटी के दौरान एक अग्नि दुर्घटना में वीरगति को प्राप्त हो गए थे। 31 वर्षीय मेजर गणेश महादिक और गौरी महादिक की शादी को उस वक़्त बस 2 वर्ष ही हुए थे। बिहार रेजिमेंट के 7वें बटालियन का हिस्सा रहे मेजर महादिक मार्च 2012 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। जब महादिक का पार्थिव शरीर मुंबई के विरार स्थित उनके आवास पर पहुँचा था, तब उनके पिता ने कहा था कि हरेक नव वर्ष के दौरान उन्हें उनके बेटे का बलिदान याद आएगा।

गौरी महादिक और स्वर्गीय मेजर गणेश

गणेश महादिक का शरीर आग से इतना झुलस गया था कि परिवार वालों को उनके पार्थिव शरीर को पहचानने में भी मुश्किल आ रही थी। मेजर गणेश जब वीरगति को प्राप्त हुए थे, तब गौरी की उम्र मात्र 26 वर्ष थी। मेजर गणेश को संगीत और खेल से ख़ासा लगाव था। वह मैराथन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया करते थे। गौरी महादिक के सेना में शामिल होने की ख़बर सुन लोग उनके साहस व हौसले को सलाम कर रहे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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