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करोड़ों की धोखाधड़ी कर थाईलैंड भाग रहा था मशहूर शराब कारोबारी, चौकन्नी EOW ने किया गिरफ़्तार

मोंटी चड्ढा पर आरोप है कि उसकी कंस्ट्रक्शन कम्पनियों ने लोगों को फ्लैट देने का वादा कर रुपए ऐंठ लिए लेकिन कई साल बीतने के बाद भी फ्लैट नहीं दिया। अव्वल तो यह कि चड्ढा की कम्पनियों ने ग्राहकों से लिया गया रुपया भी उन्हें लौटाने से इनकार कर दिया।

विदेश भागने की तैयारी कर रहे बड़े शराब कारोबारी मोंटी चड्ढा को दिल्ली पुलिस इकोनॉमिक ऑफेंसिव विंग (Economic Offences Wing of Delhi Police) ने इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एअरपोर्ट से धर दबोचा है। मोंटी चड्ढा का पूरा नाम मनप्रीत सिंह चड्ढा है और उसके पिता पोंटी चड्ढा भी बड़े शराब कारोबारी रहे हैं। पोंटी चड्डा की मृत्यु हो चुकी है। एजेंसी ने मोंटी चड्डा को ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर गिरफ़्तार किया। एजेंसी को सूचना मिली थी कि वह थाईलैंड स्थित फुकेट भागने वाला है, इसीलिए वह पहले से ही सतर्क थी।

मोंटी चड्ढा पर आरोप है कि उसकी कंस्ट्रक्शन कम्पनियों ने लोगों को फ्लैट देने का वादा कर रुपए ऐंठ लिए लेकिन कई साल बीतने के बाद भी फ्लैट नहीं दिया। अव्वल तो यह कि चड्ढा की कम्पनियों ने ग्राहकों से लिया गया रुपया भी उन्हें लौटाने से इनकार कर दिया। उसने नोएडा, गाज़ियाबाद के इलाक़े में लोगों से रुपए ठगे थे। बड़ी संख्या में निवेशकों ने चड्ढा के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराए थे। कुल मिलाकर उसने 100 करोड़ रुपयों से भी अधिक की धोखाधड़ी की है।

मोंटी चड्ढा की कम्पनी ने एक दशक से भी अधिक समय से निवेशकों के रुपए लटका कर रखे हैं और वह इतने ही समय से धोखाधड़ी करता आ रहा है। 2012 में उसके पिता पोंटी चड्ढा और चाचा हरदीप की आपसी गोलीबारी में मौत हो गई थी, जिसके बाद कारोबार की ज़िम्मेदारी पोंटी चड्डा ने संभाली। वह घटना दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर स्थित एक फ़ार्म हाउस में हुई थी। संपत्ति के स्वामित्व को लेकर दोनों भाइयों के बीच लम्बे समय से विवाद चला आ रहा था।

ईओडब्ल्यू के एसीपी सुवाशीष चौधरी ने बताया कि मोंटी उप्पल-चड्ढा हाईटेक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड का डायरेक्टर है। यह कंपनी उत्तर भारत के कई शहरों में फ्लैट बनाकर बेचती है। धोखाधड़ी के मामले में मोंटी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। चड्ढा परिवार ने गाज़ियाबाद में एक ‘वेव सिटी’ प्रोग्राम बनाया था, जिसके तहत इन लोगों ने कुछ ही महीनों में सारी सुविधाओं से युक्त फ्लैट मुहैया कराने का वादा किया था। जहाँ पर वेवसिटी बननी थी, आज वहाँ पशु चरते हैं और किसान खेती करते हैं, ऐसा शिकायतकर्ताओं का मानना है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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