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केजरीवाल के दावे खोखले: दो दिन से नहीं मिला खाना तो दिल्ली से बिहार के लिए पैदल निकले प्रवासी मजदूर, कहा- यहाँ मर जाएँगे

इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि ये सालों से दिल्ली में रहे पूर्णिया के वो मजदूर हैं, जो लॉकडाउन से पहले मेहनत करके अपना पेट पालते थे। ये अपने परिवार का सहारा बने हुए थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद दिल्ली में फँसे ये मजदूर आज दो वक्त की रोटी की चिंता में दिल्ली से पैदल ही बिहार के लिए निकल पड़े हैं।

देश में जारी लॉकडाउन के बीच दिल्ली में फँसे प्रवासी मजदूरों ने एक बार फिर केजरीवाल सरकार की तथाकथित दुरूस्त व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है। दिल्ली से बिहार के लिए पैदल निकले प्रवासी मजदूरों ने बताया कि वह दो दिनों से भूखे हैं, कोई रोजगार नहीं है तो पैदल घर जा रहे हैं। उनका कहना है कि जब भूखे-प्यासे यहाँ मरना ही है, तो रास्ते में ही मर जाएँगे।

इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि ये सालों से दिल्ली में रहे पूर्णिया के वो मजदूर हैं, जो लॉकडाउन से पहले मेहनत करके अपना पेट पालते थे। ये अपने परिवार का सहारा बने हुए थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद दिल्ली में फँसे ये मजदूर आज दो वक्त की रोटी की चिंता में दिल्ली से पैदल ही बिहार के लिए निकल पड़े हैं।

झुंड बनाकर दिल्ली से निकले इन मजदूरों में से किसी ने मुँह पर मास्क तो किसी ने रुमाल या अंगोछा लपेट रखा है। किसी के हाथ में एक थैला तो किसी के पीठ पर बिस्तरों के साथ कुछ जरूरी सामान हैं।

खास बात यह है कि हर किसी की आँखों में दो वक्त की रोटी की चिंता के साथ ही चेहरे पर उस दिल्ली सरकार के खिलाफ गुस्सा है, जिसने मजदूरों को सहारा देने के लिए लाख दावे तो किए, लेकिन ये सभी दावे खोखले साबित हुए।

पूर्णिया के एक प्रवासी मजदूर ने बताया, “हमलोग दिल्ली में वेल्डिंग का काम करते थे। अब यहाँ खाने-पीने, नहाने-धोने सब चीजों की दिक्कत हो रही थी जिसकी वजह से हम लोग पैदल अपने गाँव जा रहे हैं। हमें सरकार द्वारा चलाई जा रही ट्रेनों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।”

दिल्ली में पिछले काफी समय से रह रहे पूर्णिया बिहार से दूसरे प्रवासी मजदूर ने बताया, “सारी मजदूरी घर भेज दी थी। हम 2 दिन से भूखे हैं। कोई रोजगार नहीं है, पैदल घर जा रहे हैं। सोचा जब यहाँ भी मरना है भूखे प्यासे, तो रास्ते में मर जाएँगे भूखे प्यासे। हमारे पास न मोबाइल है और न ही पैसे हैं। हमें किसी ट्रेन के बारे में कोई जानकारी नहीं है।”

बता दें कि इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया था कि दिल्ली में करीब 7 हजार केस हैं, जिनमें से अधिकतर केस कम या बिना लक्षण वाले हैं।

उन्होंने आगे कहा था कि अभी भी प्रवासी मजदूर मजबूरी में दिल्ली छोड़कर जाने की कोशिश कर रहे हैं। ये लोग पैदल निकल रहे हैं। दिल्ली सरकार मजदूरों से विनती करती है कि ये लोग ऐसे दिल्ली छोड़कर न जाएँ सरकार उनके जाने का प्रबंध कर रही है।

कुल मिलाकर एक बात साफ है कि कोरोना वायरस के कारण जारी देशव्यापी लॉकडाउन में फँसे बिहार के मजदूरों के बहाने केजरीवाल सरकार अपने मीडिया मैनेजमेंट में जुटी हुई है।

एक ओर अरविंद केजरीवाल सरकार मीडिया में यह दावा कर रही है कि वह दिल्ली में फँसे मजदूरों का खर्च वहन कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने बिहार सरकार से ₹6.5 लाख का खर्च अदा करने के लिए कहा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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