Homeदेश-समाजमध्य प्रदेश के स्कूल में ईद पर बच्चियों को हिजाब पहनाकर करवाया डांस, बवाल...

मध्य प्रदेश के स्कूल में ईद पर बच्चियों को हिजाब पहनाकर करवाया डांस, बवाल के बाद प्रधानाध्यापक और शिक्षक बर्खास्त

यह पहला ऐसा मामला नहीं है, जहाँ हिन्दू बालिकाओं को दूसरे धर्म के रीति रिवाजों को मानने के लिए कहा गया हो। इससे पहले इसी साल मध्य प्रदेश के ही दमोह से ही 'गंगा जमुना स्कूल' में हिन्दू बालिकाओं को नमाज पढ़ाने, धर्म परिवर्तन और नमाज पढ़ाने की खबर सामने आई थी।

मध्य प्रदेश के गुना स्थित एक निजी स्कूल में ईद उल मिलादुन्नबी से एक दिन पहले छोटी बच्चियों को हिजाब पहनाकर डांस कार्यक्रम आयोजित करवाने का मामला सामने आया है। मामला सामने आने के बाद बवाल मच गया है। आरोप लगाया जा रहा है कि स्कूल में हिन्दू बालिकाओं को भी हिजाब पहनाया गया।

यह मामला गुना के कैंट इलाके में स्थित प्रिंस पब्लिक स्कूल का है। इस स्कूल में 27 सितम्बर 2023 को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। बाद में इसके वीडियो वायरल हुए। वीडियो में छोटी बच्चियाँ हिजाब पहन इस्लामी गीत गाते हुए और डांस करते हुए देखी जा सकती हैं।

इस डांस कार्यक्रम के दौरान बच्चियों के हावभाव नमाज पढ़ने जैसे थे। यह प्रस्तुति देने वाली सभी बच्चियाँ काफी छोटी दिख रही हैं। प्रस्तुति मंच के सामने और छोटे-छोटे बच्चे नजर आ रहे हैं। हिंदू संगठनों का आरोप है कि इनमें हिंदू बच्चियाँ भी शामिल हैं।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिन बच्चियों से प्रस्तुत करवाई गई वे सभी हिन्दू थीं, फिर भी उनको बुर्का और हिजाब जैसी वेशभूषा पहनाई गई। परिषद के कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि कार्यक्रम के दौरान बच्चियों से ‘भर दे झोली मेरी या मुहम्मद’ जैसी कव्वालियाँ गवाई गईं।

वीडियो वायरल होने के पश्चात हिन्दू संगठनों ने स्कूल पहुँचकर विरोध प्रदर्शन किया और स्कूल पर कार्रवाई की माँग की। स्कूल प्रशासन ने हिन्दू कार्यकर्ताओं के रोष को देखते हुए उनसे माफ़ी माँगी और आश्वासन दिया है कि वह भविष्य में ऐसा कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा।

स्कूल प्रशासन ने कार्यक्रम को आयोजित करने वाली शिक्षक और स्कूल के प्रधानाध्यापक को हटा दिया है। स्कूल में विरोध के लिए पहुँचे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता एवं अन्य हिन्दू संगठनों ने प्रश्न उठाया कि हाल ही में गणेश चतुर्थी हुई, तब कोई ऐसा कार्यक्रम क्यों नहीं करवाया गया था।

यह पहला ऐसा मामला नहीं है, जहाँ हिन्दू बालिकाओं को दूसरे धर्म के रीति रिवाजों को मानने के लिए कहा गया हो। इससे पहले इसी साल मध्य प्रदेश के ही दमोह से ही ‘गंगा जमुना स्कूल‘ में हिन्दू बालिकाओं को नमाज पढ़ाने, धर्म परिवर्तन और नमाज पढ़ाने की खबर सामने आई थी।

इस मामले पर आफी बवाल हुआ था और स्कूल की मान्यता रद्द करने के साथ ही कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई थी। इस मामले में स्कूल की मान्यता निलंबित करके मध्य प्रदेश सरकार ने काफी कड़ी कार्रवाई की थी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।
- विज्ञापन -