Homeदेश-समाजराम अयोध्या में तो पैदा हुए, लेकिन किस गली-मोहल्ले में, ये कैसे साबित होगा:...

राम अयोध्या में तो पैदा हुए, लेकिन किस गली-मोहल्ले में, ये कैसे साबित होगा: मुस्लिम पक्ष

धवन ने दावा किया कि बाबरी मस्जिद सुन्नी वक़्फ़ के एकाधिकार में हमेशा से रही है। 1885 के बाद पहली बार उसके बाहरी हिस्से पर मौजूद श्री राम चबूतरे को रामजन्मभूमि मानकर पूजा होने लगी।

अयोध्या मामले में दलीलें रखते हुए मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने दावा किया कि भगवान श्री राम के अयोध्या में जन्म को तो मुस्लिम भी मानते हैं, लेकिन अयोध्या के भीतर उनका जन्म किस स्थान विशेष पर हुआ था, इसके कोई सबूत नहीं हैं। इसी आधार पर उन्होंने एक बार फिर रामजन्मभूमि स्थान को पहले देवता, और फिर कानूनी प्रावधान के अंतर्गत देवता से ‘न्यायिक व्यक्ति’ घोषित करने की प्रक्रिया का विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि अयोध्या के भीतर ही 3-4 जगहों के रामजन्मभूमि होने का दावा किया जाता है।

मैं भी राम को मानता हूँ, लेकिन…

राजीव धवन ने दावा किया कि शिया मुस्लिम श्री राम को वंदनीय मानते हैं। साथ ही, श्री राम मंदिर के निर्माण के खिलाफ मुकदमा लड़ रहे होने के बावजूद उन्होंने श्री राम को अपने लिए भी वंदनीय बताया, और पाकिस्तान के बौद्धिक पिता माने जाने वाले इक़बाल का निम्न शेर पढ़ा:

राम के वजूद पे हिन्दोस्तां को नाज
अहल-ए-नजर समझते हैं उसको इमाम-ए-हिंद

शेर पढ़ने के बाद धवन ने खुद ही जोड़ा कि बाद में इक़बाल पाकिस्तान-समर्थक निकले।

‘आप श्रीराम के जन्मस्थान को सही जगह बताइए, हम मस्जिद को वहाँ से शिफ्ट कर लेंगे’

धवन ने दावा किया कि बाबरी मस्जिद सुन्नी वक़्फ़ के एकाधिकार में हमेशा से रही है। 1885 के बाद पहली बार उसके बाहरी हिस्से पर मौजूद श्री राम चबूतरे को रामजन्मभूमि मानकर पूजा होने लगी। उन्होंने अपनी बात साबित करने के लिए कुछ शियाओं द्वारा हिन्दू और मुस्लिमों द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से नमाज और पूजा करने के बयान का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि अगर हिन्दू रामजन्मभूमि की सटीक जगह बता दें तो सुन्नी वक्फ बोर्ड श्री रामजन्मभूमि से मस्जिद हटा लेगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -