Wednesday, May 22, 2024
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‘हमले से ठीक पहले मुस्लिमों ने बंद कर दी थी दुकानें’: करौली में जिन हिंदुओं का सब कुछ जलकर राख, वे बोले- हिंसा सोची-समझी साजिश

"हमें जबरन इस तरह की हिंसा करके पलायन के लिए विवश किया जा रहा है। हम बेहद डरे हुए और खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।"

राजस्थान के करौली में हिंसा (Rajasthan Karauli Violence) के बाद से स्थानीय हिंदू दहशत में हैं। वे अब मुस्लिम बहुल इलाके में नहीं रहना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी जान का डर सता रहा है। हिंसा में अपनी तीन दुकान खोने वाले चंद्रशेखर गर्ग का कहना है कि फायर ब्रिगेड ने उनकी कॉल का जवाब तक नहीं दिया, जबकि मुस्लिमों की मदद के लिए तीन से चार टीमें तैनात की थी।

रिपब्लिक भारत से बातचीत में उन्होंने बताया कि मुस्लिमों की सभी दुकानें सुरक्षित हैं। भीड़ ने जानबूझकर हिंदुओं की दुकानों को निशाना बनाया और आग लगा दी। गर्ग ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम भीड़ काफी पहले से हिंदुओं पर हमले की योजना बना रही थी, जिसकी हम लोगों को भनक भी नहीं लगी। हम सबकी दुकानें साथ में थीं। हम उनके साथ प्यार मोहब्बत से रहते थे।

उनका कहना है कि वह मुस्लिम बहुल इलाके में कब तक खौफजदा होकर रह सकते हैं। यहाँ हर पल जान का खतरा रहता है। आगे भी इसी तरह की हिंसा होने का डर सता रहा है। इसलिए उन्होंने परिवार के साथ हटवाड़ा बाजार क्षेत्र से पलायन करने का फैसला किया है। गर्ग ने कहा, “हिंदू करौली ​हिंसा के बाद से यह जगह छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। हमें जबरन इस तरह की हिंसा करके पलायन के लिए विवश किया जा रहा है। हम बेहद डरे हुए और खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।”

‘हम पर और हमले होंगे’

60 वर्षीय बुजुर्ग रमेश भी अपने पड़ोसी गर्ग की बातों पर सहमति जताते हुए बताते हैं कि उनकी दो दुकानें हैं। एक प्रोविजन स्टोर और एक दूध वेंडिंग बूथ। मुस्लिम भीड़ ने इन्हें निशाना बनाया था। उन्होंने कहा, “मेरी दुकानें और घर सभी को भीड़ ने जला दिया। मैं पिछले 35 साल से इन दुकानों के जरिए अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था। हमारा सब कुछ जलकर खाक हो गया।” वह 2 अप्रैल के बाद से सदमे में हैं। हटवाड़ा बाजार निवासी रमेश ने यह भी कहा कि मुस्लिम भीड़ ने शनिवार दोपहर को रैली भी निकाली थी। इसके बाद शाम को वे सभी एक जगह पर इकट्ठे हुए, हिंदुओं की दुकानों को लूटा और फिर उसमें आग लगा दी।

60 साल के बुजुर्ग ने रिपब्लिक भारत से बात करते हुए कहा, “उन्होंने हमें पीटा, हमें हमारी ही दुकान से बाहर निकाल दिया। मेरी डेयरी की दुकान को लूट लिया। हमारे स्कूटर और बाइक को तोड़ दिया। यह सोची-समझी साजिश के तहत पूर्व नियोजित हमला था। हमारे लोगों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। घरों के अंदर छिपकर हमने अपनी जान बचाई। यही नहीं आधे घंटे बाद फिर मुस्लिम भीड़ ने हम पर हमला किया। एकाएक किए गए हमले से हम दहशत में हैं।”

उन्होंने बताया, “अब इस इलाके में कोई भी दुकान नहीं खोलना चाहता है। यह हमारे लिए मुश्किल घड़ी है।” दिलचस्प बात यह है कि वहाँ मौजूद हिंदुओं और अन्य लोगों ने भी इसकी पुष्टि की है कि वे हमलावरों को अच्छी तरह से जानते थे, क्योंकि वो लोग कई सालों से उनके पड़ोसी थे। रमेश ने कहा, “हम भाइयों की तरह रहते थे, लेकिन उन्होंने हम पर हमला किया। मुस्लिमों ने हमलों से ठीक पहले अपनी दुकानें बंद कर दी थी।”

‘राजस्थान सरकार हमारी मदद नहीं करेगी’

हेमंत अग्रवाल की दुकान पर भी इसी तरह के हमले किए गए। अग्रवाल के अनुसार, “हमने हमेशा की तरह अपनी दुकानें खोली थीं, लेकिन उस दिन मुस्लिम भीड़ ने मेरे 20 लाख रुपए लूट लिए। हमने बहुत कुछ सहा है।” उन्होंने बताया, “मेरी इस इलाके एक बड़ी सी दुकान है। 2 अप्रैल को शाम के करीब 5 बजे भीड़ ने हम पर हमला किया। हमने दुकानें बंद करनी शुरू कर दी थीं, लेकिन भीड़ ने हम पर हमला कर दुकानों को लूट लिया। मुस्लिम भीड़ के सामने हम रोए, गिड़गिड़ाए और रहम की भीख माँगी, लेकिन उन्हें हमारे ऊपर जरा भी दया नहीं आई।”

हेमंत कहते हैं, “हम अब बहुत असहाय हैं। अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार किसी भी तरह से हमारी मदद नहीं कर रही है। हमें लूटने वाले लोग हमारे पड़ोसी थे, अगर सरकार कार्रवाई करना चाहती तो कब का कर लेती। लेकिन वे उनके खिलाफ ऐसा नहीं करना चाहते हैं।” वे बताते हैं, “हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं है, हम नहीं जानते कि अब क्या करना है। हम यहाँ नहीं रहना चाहते, क्योंकि हमें कभी भी जान से मार दिया जाएगा। इसलिए हमारे परिवार ने इस जगह को छोड़ने का फैसला किया है।”

करौली हिंसा

गौरतलब है कि करौली में हिंदू नव वर्ष के जुलूस पर 2 अप्रैल को हिंसा हुई थी। दुकानों में आगजनी की गई। इसमें पुष्पेंद्र नाम का एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसके शरीर पर चाकू से हमले के निशान थे। उपद्रवियों को काबू करते हुए पुलिस के 4 जवान भी घायल हुए थे। कुल 43 लोगों के घायल होने की खबर मीडिया में आई थी। इसके बाद मामले में जाँच शुरू हुई और पीएफआई का एक पत्र सामने आया, जिसने इस हिंसा के सुनियोजित होने की ओर इशारा किया। बाद में कॉन्ग्रेसी नेता मतबूल अहमद की भूमिका भी हिंसा में पाई गई।

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी इस हिंसा को सुनियोजित बताया था। उन्होंने कहा था कि करौली हिंसा के दौरान जिस तरह से पथराव किया गया, उससे साबित होता है कि इसे सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया और इसे रोका जा सकता था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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