Homeदेश-समाजबागेश्वर धाम के महंत को नागपुर पुलिस की क्लीन चिट: अंधविश्वास की FIR कराने...

बागेश्वर धाम के महंत को नागपुर पुलिस की क्लीन चिट: अंधविश्वास की FIR कराने वाली संस्था को भेजा गया जवाब, बताया – वीडियो की बारीकी से हुई जाँच

पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है कि पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने केवल अपने धर्म का प्रचार किया है। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यक्रम के 7 और 8 जनवरी के दिव्य दरबार को हुए आयोजन के वीडियो की बारीकी से जाँच हुई है।

महाराष्ट्र की नागपुर पुलिस ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को अपनी जाँच में क्लीन चिट दे दी है। शास्त्री पर यह FIR ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के श्याम मानव ने दर्ज करवाई थी। इस केस में श्याम मानव ने धीरेन्द्र शास्त्री पर अंधविश्वास और जादू टोने का आरोप लगाया था। पुलिस ने ‘श्रीराम चरित्र चर्चा’ नाम के उस आयोजन के वीडियो निकाल कर जाँच की और बताया कि उसमें अंधविश्वास जैसा कुछ भी नहीं था। नागपुर पुलिस ने अपना जवाब श्याम मानव को भी भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है कि पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने केवल अपने धर्म का प्रचार किया है। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यक्रम के 7 और 8 जनवरी के दिव्य दरबार को हुए आयोजन के वीडियो की बारीकी से जाँच हुई है। कमिश्नर के अनुसार वीडियो देख कर पुलिस ने निष्कर्ष निकाला है कि उस कार्यक्रम में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जिसे अंधविश्वास माना जाए।

क्या था पूरा मामला

गौरतलब है कि बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री जनवरी 2023 के पहले सप्ताह में नागपुर में ‘श्रीराम चरित्र चर्चा’ नाम से कार्यक्रम आयोजित किए थे। इस कार्यक्रम के दौरान ही ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के अध्यक्ष और शिकायतकर्ता श्याम मानव ने धीरेन्द्र शास्त्री पर अंधविश्वास और जादू-टोना फैलाने का आरोप लगा कर पुलिस में केस दर्ज करवाया था। तब श्याम मानव ने धीरेन्द्र शास्त्री पर साल 2013 के महाराष्ट्र जादू-टोना विरोधी कानून और 1954 के ‘ड्रग्स एंड रेमेडीज एक्ट’ के उल्लंघन का आरोप लगाया था।

श्याम मानव ने धीरेन्द्र शास्त्री को चमत्कार कर के दिखाने पर 30 लाख रुपए इनाम देने की भी घोषणा की थी। हालाँकि, पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी सफाई में इन आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को केवल सनातन धर्म का प्रचारक और ईश्वर का भक्त बताया था। तब से पुलिस मामले की जाँच कर रही थी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?

मुस्लिमों को रिझाने में 2017 में औंधे मुँह गिरे थे अखिलेश, आरक्षण का वादा किया लेकिन घोषणापत्र खाली रहा: 2027 के चुनावी रण में...

मुस्लिम आरक्षण पर अखिलेश बयानों से लेकर मुलायम सिंह यादव की मुस्लिम राजनीति अपने पुराने ढर्रे पर रही है। हालाँकि अब यूपी में वोटर्स अपनी प्रथमिकताएँ बदल रहे हैं।
- विज्ञापन -