Sunday, June 23, 2024
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बहन के निवेदन पर 8 लाख के इनामी भाई ने छोड़ दी नक्सलियों की दुनिया: पहले भी नक्सलवाद पर भारी पड़ा है भाई-बहन का प्यार

नक्सली युवक की बहन ने पुलिस अधीक्षक को खुद इस बात की जानकारी दी। उसने पुलिस को दी गई जानकारी में कहा कि “मेरा भाई वापस घर आ चुका है। अब वह कुछ भी गलत नहीं करेगा और वह मेरे साथ रहेगा।”

शनिवार के दिन छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में एक नक्सली ने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके पीछे की वजह बेहद दिलचस्प थी। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसकी बहन की इच्छा थी कि वह आत्मसमर्पण कर दे। ख़बरों के मुताबिक़ उसकी बहन अक्सर इस बात के लिए निवेदन करती थी। 

नक्सली युवक की बहन ने पुलिस अधीक्षक को खुद इस बात की जानकारी दी। उसने पुलिस को दी गई जानकारी में कहा कि “मेरा भाई वापस घर आ चुका है। अब वह कुछ भी गलत नहीं करेगा और वह मेरे साथ रहेगा।”

मल्ला तामो नाम के इस युवक (नक्सली) पर 8 लाख रूपए का इनाम था। वह आज से लगभग 14 साल पहले अपने चाचा के साथ बीजापुर के डोडी तुमनार गया। वहाँ जाकर वह नक्सलियों के गिरोह (प्लाटून नंबर 13) में शामिल हो गया। इसके बाद वह प्लाटून का डिप्टी कमांडर बन गया। उसे कई तरह के हथियार चलाना भी बहुत अच्छे से मालूम था। 

शनिवार के दिन मल्ला की बहन लिंगे अपने पति के साथ कराली स्थित पुलिस लाइन पहुँची। उसने पुलिस अधीक्षक को पहले ही इस बात की जानकारी दे दी थी। उसका भाई वापस घर लौट चुका है। अब वह किसी भी तरह के गलत काम नहीं करेगा और आम जिंदगी जीना शुरू करेगा। 

मल्ला के वापस आने की जानकारी मिलते ही पुलिसकर्मी कराली पहुँचे। जहाँ उसने पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव और डीआईजी (सीआरपीएफ) विनय कुमार सिंह की मौजूदगी में आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके अलावा लिंगे ने यह भी बताया कि उसका भाई 14 साल बाद उससे मिलने आया। लिंगे ने अपने भाई से निवेदन किया था कि रक्षा बंधन आने वाला है। इस बात को ध्यान में रखते हुए आत्मसमर्पण कर देना चाहिए। 

यह पहली ऐसी घटना नहीं है जिसमें भाई बहन का प्यार नक्सलवाद पर भारी पड़ा हो। इसके पहले भी ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जिनमें ऐसा हो चुका है। लगभग एक हफ्ते पहले दशमी कुहरामी ने जिस पर 5 लाख रूपए का इनाम था। उसने आत्मसमर्पण कर दिया अब इस रक्षाबंधन पर उन्होंने अपने भाई से अनुरोध किया कि वह आत्मसमर्पण कर दे। दशमी ने यह भी कहा कि वह रक्षा बंधन के मौके पर अपने भाई का इंतज़ार भी करेगी। 

साल 2018 में वेट्टी रामाजो खुद एक नक्सल था और बाद में अधिकारी बना। उसकी बहन नक्सल थी। एक दिन वह अपनी बहन के सामने गया और उससे आत्मसमर्पण के लिए कहा। उसने कहा कि भले रक्षा बंधन के उपहार की तरह ही पर आत्मसमर्पण कर देना चाहिए। रामा आज भी अपनी बहन का इंतज़ार कर रहा है और आशा करता है कि उसकी बहन एक न एक दिन ज़रूर वापस लौटेगी।   

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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