Thursday, August 18, 2022
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केजरीवाल सरकार के मंत्री ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का किया उल्लंघन: NCPCR ने LG से की कार्रवाई की माँग

वीडियो में AAP मंत्री को दिल्ली में एक चाइल्ड केयर संस्थान का निरीक्षण करते हुए, संस्था के नाम के साथ बच्चों की पहचान का खुलासा करते हुए देखा गया। वीडियो में समाज कल्याण मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि सीसीआई में रहने वाले बच्चे अनाथ थे।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने दिल्ली के उपराज्यपाल को पत्र लिखकर AAP नेता और केजरीवाल सरकार में समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम के खिलाफ दिल्ली स्थित एक चाइल्ड केयर संस्थान में रहने वाले बच्चों की पहचान का खुलासा करने के लिए कार्रवाई की माँग की है। आयोग ने कार्रवाई की रिपोर्ट भी एक सप्ताह में देने को कहा है।

बाल अधिकार निकाय ने अपने पत्र में कहा कि उसे गौतम द्वारा उनके ट्विटर हैंडल पर अपलोड किए गए एक वीडियो के खिलाफ शिकायत मिली है। वीडियो में AAP मंत्री को दिल्ली में एक चाइल्ड केयर संस्थान का निरीक्षण करते हुए, संस्था के नाम के साथ बच्चों की पहचान का खुलासा करते हुए देखा गया। वीडियो में समाज कल्याण मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि सीसीआई में रहने वाले बच्चे अनाथ थे।

NCPCR ने बच्चों को उस संस्था के नाम के साथ दिखाने वाले वीडियो को किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 74 का प्रथम दृष्टया उल्लंघन और बच्चों के खिलाफ एक गंभीर अपराध माना है। बता दें कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 74, किसी भी मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की पहचान जैसे उनका नाम, पता, उम्र, स्कूल का नाम आदि के उजागर करने पर रोक लगाती है।

इसके अतिरिक्त, ऐसे बच्चों के विवरण को सार्वजनिक करने से प्रतिबंधित किया जाता है ताकि बच्चों की गोपनीयता बनी रहे और इन कमजोर बच्चों को तस्करी, दुर्व्यवहार, क्रूरता, अवैध गोद लेने आदि के लिए अतिसंवेदनशील न बनाया जाए। अधिनियम की धारा 74(3) में कहा गया कि इस प्रावधान का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को एक अवधि के लिए कारावास या 6 महीने तक का जुर्माना या दो लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है।

पत्र में कहा गया, “इसलिए, जेजे अधिनियम, 2015 के तहत दिए गए प्रावधानों के उल्लंघन को देखते हुए, इस मामले में जाँच की जानी चाहिए और जैसा उचित समझा जाए, कार्रवाई की जाए। अनुरोध है कि इस मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी देते हुए एक सप्ताह के भीतर आयोग को रिपोर्ट भेजी जाए।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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