Friday, April 12, 2024
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नेशनल वार मेमोरियल की तस्वीरें, पराक्रमी वीरों के नाम

प्रधानमंत्री ने कहा, "मुझे विश्वास है, ये देशवासियों के लिए राष्ट्रीय सैनिक स्मारक जाना किसी तीर्थ स्थल जाने के समान होगा। यह स्मारक स्वतंत्रता के बाद सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने आज सुबह अपने मन की बात कार्यक्रम के दौरान ‘राष्ट्रीय युद्ध स्मारक’ (नेशनल वॉर मेमोरियल) का ज़िक्र करते हुए कई बातें कहीं थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी को एक समारोह में ‘राष्ट्रीय युद्ध स्मारक’ राष्ट्र को समर्पित करेंगे। वह इस अवसर पर पूर्व सैनिकों को भी संबोधित करेंगे।

हम सबको जिस वॉर मेमोरियल का इन्तजार था, वह अब ख़त्म होने जा रहा है। इसके बारे में देशवासियों की जिज्ञासा, उत्सुकता बहुत स्वाभाविक है। एक ऐसा मेमोरियल, जहाँ राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों की शौर्य-गाथाओं को संजो कर रखा जा सके।

176 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुए इस राष्ट्रीय युद्द स्मारक का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी को करेंगे।

प्रधानमंत्री के आधिकारिक ट्विटर हैंडल PMO India से वॉर मेमोरियल फोटो जारी कर जानकारी देते हुए लिखा है, “नई दिल्ली में इंडिया गेट के पास नेशनल वॉर मेमोरियल हमारे जवानों के लिए एक उचित श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश की आजादी के बाद देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।”

PMO द्वारा जारी वॉर मेमोरियल की तस्वीर

नेशनल वॉर मेमोरियल के जरिए उन सैनिकों को भी याद किया जाएगा जिन्होंने शान्ति स्थापना मिशन और ‘काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशंस’ में बलिदान दिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 में एक विश्व स्तरीय राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का प्रस्ताव रखा था
राष्ट्रीय सैनिक स्मारक ‘Four Concentric Circles यानी 4 चक्रों पर केंद्रित है, जैसे ‘अमर चक्र’ या अमरता का वृत्त, ‘वीरता चक्र’ या शौर्य चक्र, ‘त्याग चक्र’ या बलिदान का वृत्त और ‘रक्षक चक्र ‘या सुरक्षा का चक्र, जहाँ पर सैनिकों के जन्म से लेकर शहादत तक की यात्रा का चित्रण है।

अमर चक्र की लौ, शहीद सैनिक की अमरता का प्रतीक है। दूसरा सर्कल वीरता चक्र का है, जो सैनिकों के साहस और बहादुरी को प्रदर्शित करता है। इसके बाद, त्याग चक्र है। यह सर्कल सैनिकों के बलिदान को प्रदर्शित करता है। इसके बाद रक्षक चक्र, यह सुरक्षा को प्रदर्शित करता है। इस सर्कल में घने पेड़ों की पंक्ति है। ये पेड़ सैनिकों के प्रतीक हैं और देश के नागरिकों को यह विश्वास दिलाते हुए सन्देश दे रहे हैं कि हर पहर सैनिक सीमा पर तैनात है और देशवासी सुरक्षित है।

परम वीर चक्र के 21 पुरस्कारों की प्रतिमाएँ ‘परम योद्धा’ स्टॉल पर लगाई गई हैं, जिसमें 3 जीवित पुरस्कार विजेता सूबेदार (हनी कैप्टन) बाना सिंह (सेवानिवृत्त), सब मेजर योगेंद्र सिंह यादव और सुबेदार संजय कुमार शामिल हैं।

मन की बात के 53 वें एपिसोड में आज ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमने नेशनल वॉर मेमोरियल के निर्माण का निर्णय लिया और मुझे खुशी है कि यह स्मारक इतने कम समय में बनकर तैयार हो चुका है। 25 फरवरी को हम करोड़ों देशवासी इस राष्ट्रीय सैनिक स्मारक को, हमारी सेना को सुपुर्द करेंगे। देश अपना कर्ज चुकाने का एक छोटा सा प्रयास करेगा।”

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक परिसर में एक केंद्रीय स्तम्भ, एक अनन्त लौ और भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना द्वारा लड़ी गई प्रसिद्ध लड़ाइयों को दर्शाती 6 कांस्य भित्ति चित्र शामिल हैं।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक कृतज्ञ राष्ट्र की सामूहिक आकांक्षा की परिणति का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रधानमंत्री ने PMO ट्विटर एकाउंट से लिखा है, “इंडिया गेट और अमर जवान ज्योति के पास ही ये नया स्मारक बनाया गया है। मुझे विश्वास है, ये देशवासियों के लिए राष्ट्रीय सैनिक स्मारक जाना किसी तीर्थ स्थल जाने के समान होगा। यह स्मारक स्वतंत्रता के बाद सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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