Sunday, June 16, 2024
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आजीविका में विविधता के जरिए तेज़ी से घट रही है गरीबी : ब्रूकिंग्‍स इंस्‍टीट्यूशन की रिपोर्ट

ग्रामीण क्षेत्रों की गरीब महिलाओं के गहन एवं सतत क्षमता निर्माण से उनके सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक सशक्तिकरण के साथ-साथ विकास भी सुनिश्चित होगा।

हाल के वर्षों में भारत में गरीबी घटने की गति तेज हो गई है। वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2018 के साथ-साथ ब्रूकिंग्‍स इंस्‍टीट्यूशन द्वारा प्रकाशित एक नोट से यह तथ्‍य उभर कर सामने आया है।

दीनदयाल अंत्‍योदय योजना – राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई – एनआरएलएम) का लक्ष्‍य गरीबों के टिकाऊ सामुदायिक संस्‍थानों के निर्माण के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करना है। इसके तहत लगभग 9 करोड़ परिवारों को स्‍वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित करना है और उन्‍हें टिकाऊ आजीविका के अवसरों से जोड़ना है।

इसके लिए इनके कौशल को बढ़ाया जाएगा और इसके साथ ही वित्‍त के औपचारिक स्रोतों, पात्रता और सार्वजनिक एवं निजी दोनों ही क्षेत्रों की सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित की जाएगी। यह परिकल्‍पना की गई है कि ग्रामीण क्षेत्रों की गरीब महिलाओं के गहन एवं सतत क्षमता निर्माण से उनके सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक सशक्तिकरण के साथ-साथ विकास भी सुनिश्चित होगा।

अप्रैल 2014-नवम्‍बर 2018 के दौरान प्रगति

महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में इस मिशन की उपलब्धियों का उल्‍लेख नीचे किया गया है :

१. मिशन फुटप्रिंट : इस अवधि के दौरान 2411 अतिरिक्‍त ब्‍लॉकों को ‘गहन’ रणनीति के दायरे में लाया गया है। इस मिशन को संचयी रूप से 29 राज्‍यों और 5 केन्‍द्र शासित प्रदेशों के 612 जिलों में फैले 5,123 ब्‍लॉकों में कार्यान्वित किया जा रहा है।

२. सामुदायिक संस्‍थानों का निर्माण :  अप्रैल 2014 और नवम्‍बर 2018 के बीच 3 करोड़ से भी अधिक ग्रामीण निर्धन महिलाओं को देश भर में 26.9 लाख स्‍वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित किया गया है। कुल मिलाकर 5.63 करोड़ से भी अधिक महिलाओं को 49.7 लाख से ज्‍यादा एसएचजी में संगठित किया गया है। इसके अलावा, एसएचजी को 2.73 लाख से भी अधिक ग्राम स्‍तरीय महासंघों और लगभग 25,093 क्‍लस्‍टर स्‍तरीय महासंघों के रूप में संगठित किया गया है।

इसके अलावा, इन सामुदायिक संस्‍थानों को पूँजीगत सहायता के रूप में ₹5,919.71 करोड़ से भी अधिक की राशि मुहैया कराई गई है, जिनमें से लगभग 85 प्रतिशत रकम (₹5030.7 करोड़) उपर्युक्‍त अवधि के दौरान उपलब्‍ध कराई गई है।

३. वित्‍तीय समावेश : एसएचजी की बकाया ऋण राशि मार्च 2014 के ₹32,565 करोड़ से बढ़कर अक्‍टूबर 2018 में ₹76,591 करोड़ के स्‍तर पर पहुँच गई है। पिछले पांच वर्षों के दौरान एसएचजी द्वारा कुल मिलाकर ₹1.96 लाख करोड़ के बैंक ऋण से लाभ उठाया गया है। चालू वर्ष में फंसे कर्जों (एनपीए) के घटकर 2.64 प्रतिशत हो जाने के साथ ही पोर्टफोलियो की गुणवत्‍ता में भी उल्‍लेखनीय सुधार हुआ है। यह एसएचजी द्वारा समय पर ऋणों के भुगतान को बढ़ावा देने के लिए राज्‍यों द्वारा सतत रूप से किये जा रहे प्रयासों का नतीजा है।

४. दूर-दराज के क्षेत्रों में वित्‍तीय सेवाएं : इस अवधि के दौरान वित्‍तीय सेवाएँ मुहैया कराने के वैकल्पिक मॉडलों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। लगभग 3,050 एसएचजी सदस्‍यों को बैंकिंग कॉरस्‍पोंडेंट एजेंटों (बीसीए) के रूप में तैनात किया गया है, ताकि अंतिम छोर तक वित्‍तीय सेवाएं मुहैया कराई जा सकें। इनमें जमा, ऋण, धन प्रेषण, वृद्धावस्‍था, पेंशन एवं छात्रवृत्तियों का वितरण, मनरेगा से संबंधित पारिश्रमिक का भुगतान एवं बीमा और पेंशन योजनाओं के तहत नामांकन शामिल हैं। नवम्‍बर 2018 तक ₹185 करोड़ के 16 लाख से भी अधिक लेन-देन पूरे किये गये हैं।

५. महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना एवं मूल्‍य श्रृंखला से जुड़ी पहल : महिला किसानों की आमदनी बढ़ाने और कच्‍चे माल से संबंधित लागतों एवं जोखिमों में कमी करने वाले कृषि-पारिस्थितिकी तौर-तरीकों को बढ़ावा देने के लिए इस मिशन के तहत महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (एमकेएसपी) को कार्यान्वित किया जा रहा है। अप्रैल 2014 से लेकर नवम्‍बर 2018 तक की अवधि के दौरान लगभग 3 लाख और महिला किसानों को एमकेएसपी के दायरे में लाया गया है। इसके साथ ही इस परियोजना के तहत अब तक 35.92 लाख महिला किसानों को लाया जा चुका है।

वित्‍त वर्ष 2015-16 से लेकर अब तक ‘डीएवाई-एनआरएलएम’ ने मूल्‍य श्रृंखला (वैल्‍यू चेन) से संबंधित उपलब्धियाँ हासिल करने की दिशा में उल्‍लेखनीय प्रयास किये हैं, ताकि बाज़ार संपर्कों (लिंकेज) का विस्‍तार किया जा सके। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य संपूर्ण बिजनेस मॉडल विकसित करना है, जिससे कि प्राथमिक उत्‍पादकों को उत्‍पादक संगठनों के सृजन से लेकर विपणन संबंधी संपर्कों के निर्माण तक के समस्‍त सॉल्‍यूशन सुलभ कराए जा सकें।

साभार: पत्र सूचना कार्यालय

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