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पंजाब: फ्यूचर ग्रुप के स्टोरेज सेंटर की 4 महीनों से नाकेबंदी, ‘किसानों’ को हटाने के लिए हाई कोर्ट में कंपनी

किसान प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर इस स्टोरेज सेंटर को इसलिए घेर रखा है, क्योंकि उन्हें लगता है कि फ्यूचर समूह की सप्लाई चेन को रिलायंस खरीद रहा है। हालाँकि, यह सौदा अभी लंबित है, क्योंकि इसे अमेजॉन ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे रखी है।

फ्यूचर सप्लाई चेन्स सॉल्यूशंस ने पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इसमें उन किसान प्रदशर्नकारियों को हटाने का निर्देश देने की अपील की गई जिन्होंने गैरकानूनी तरीके से करीब 4 महीने से उसके स्टोरेज फैसिलिटी की नाकेबंदी कर रखी है। यह स्टोरेज फैसिलिटी पटियाला जिले के शंभू कलां गाँव के पास है। याचिका 28 अप्रैल 2021 को दाखिल की गई।

कंपनी ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह किसानों की नाकाबंदी को तत्काल वहाँ से हटवाए और समूह को अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को चलाने के लिए सुरक्षित रास्ता प्रदान करे। कंपनी ने अपनी दलील में कहा है कि 4 करोड़ रुपए का खराब होने वाला माल स्टोरेज में है। अगर किसानों को वहाँ से नहीं हटाया जाता है तो उत्पाद जल्द ही खराब हो जाएँगे।

खराब हुए 66 लाख रुपए के सामान

याचिका में, फ्यूचर ग्रुप ने दावा किया है कि 66 लाख रुपए के पैक किए गए खाद्य वस्तुएँ, दालें और अन्य खाद्यान्न पहले ही खराब हो चुके हैं। 1.5 करोड़ रुपए के उत्पादों का एक और बैच आने वाले दिनों में खराब हो जाएगा। ग्रुप ने कहा कि इन उत्पादों को कर्मचारियों द्वारा भंडारण सुविधा से दैनिक आधार पर बाहर निकालने की आवश्यकता होती है।

किसान प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर इस स्टोरेज सेंटर को इसलिए घेर रखा है, क्योंकि उन्हें लगता है कि फ्यूचर समूह की सप्लाई चेन को रिलायंस खरीद रहा है। हालाँकि, यह सौदा अभी लंबित है, क्योंकि इसे अमेजॉन ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे रखी है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अमेजॉन, रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच केस की सभी कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई के लिए 4 मई की तारीख तय की है और सभी पक्षों को तब तक अपने जवाब तैयार करने को कहा है।

नाकेबंदी हटाने को कुछ नहीं कर रहा जिला प्रशासन: फ्यूचर ग्रु

फ्यूचर ग्रुप के वरिष्ठ प्रबंधक आकाश भरारा के माध्यम से हाई कोर्ट में आवेदन दायर किया गया है। कंपनी की ओर से पेश अधिवक्ता सचिन राय वैद ने दलील दी कि इस रुकावट से कंपनी को काफी वित्तीय नुकसान हुआ है। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस स्टोरेज सेंट में 400 से अधिक लोग कार्यरत हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह से भंडारण सुविधा के संचालन पर निर्भर है। पिछले चार महीने से रुकावट के कारण वे बेरोजगार बैठे हैं।

वैद ने कहा, “किसानों की गैरकानूनी कार्रवाई और उक्त नाकेबंदी को हटाने में जिला प्रशासन की निष्क्रियता से याचिकाकर्ता कंपनी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, जिससे व्यापार और व्यवसाय चलता है।” न्यायमूर्ति महाबीर सिंह संधू ने याचिकाकर्ता को खाद्य पदार्थों को स्टोर करने के लिए राज्य अधिकारियों द्वारा दी गई लाइसेंस की प्रति पेश करने का निर्देश दिया। इस मामले की सुनवाई 29 अप्रैल को होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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