अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया शुरू, सुप्रीम कोर्ट ने दिया है 3 महीने का वक्त

कोर्ट ने 1045 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि जन्मभूमि की 2.77 एकड़ ज़मीन पर मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया जाए। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए पाँच एकड़ ज़मीन अलग से देने के निर्देश भी सरकार को दिया था।

शताब्दियों से लंबित अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने शनिवार को विराम लगा दिया। अपने ऐतिहासिक फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने में ट्रस्ट के गठन का आदेश दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार के अधिकारियों ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा है कि ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए एक टीम कोर्ट के फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रही है।

एक अधिकारी ने बताया कि इस सम्बन्ध में विधि मंत्रालय और अटॉर्नी जनरल से राय ली जाएगी, जिसके बाद अयोध्या में मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार की जाएगी। अधिकारियों की एक टीम को फैसले का विस्तृत अध्ययन करने की ज़िम्मेदारी दी गई है जिससे ट्रस्ट के गठन में अदालत के किसी दिशा-निर्देश की अनदेखी न हो।

एक अन्य अधिकारी के मुताबिक इस मामले में नोडल इकाई के रूप में गृह-मंत्रालय अथवा संस्कृति मंत्रालय में से कोई एक रहेगा। बता दें कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जन्मभूमि को लेकर विवाद लम्बे समय से रहा है। दरअसल हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच यह झगड़ा सन 1528 से चला आ रहा था, जब जन्मस्थान पर मुग़ल शासक बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई थी।

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इस विवाद का अंत 09 नवम्बर को 2019 को हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने 135 साल तक तक चले इस मुक़दमे में अपना फैसला सुनाया। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बाबरी मस्जिद से पहले उस जगह पर मंदिर था।

कोर्ट ने 1045 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि जन्मभूमि की 2.77 एकड़ ज़मीन पर मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया जाए। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए पाँच एकड़ ज़मीन अलग से देने के निर्देश भी सरकार को दिया था।

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