Sunday, July 3, 2022
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गिलानी की मौत के बाद तिहाड़ जेल में बंद मसरत आलम को बनाया हुर्रियत का नया चेयरमैन: युद्ध छेड़ने समेत दर्जनों मामले दर्ज

सैयद अली शाह गिलानी के करीबी मसरत आलम भट की पहचान देश विरोधी कट्टरपंथी नेता के रूप में की जाती है। मसरत आलम के खिलाफ युद्ध छेड़ने समेत दर्जनों मामले दर्ज हैं। वह देश विरोधी विचारों को फैलाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता रहा है।

जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत के 6 दिन बाद ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नए चेयरमैन की घोषणा की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कट्टरवादी मसरत आलम भट को हुर्रियत का नया चेयरमैन बनाया गया है। 50 वर्षीय आलम इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। इसके अलावा शब्बीर अहमद शाह और गुलाम अहमद गुलजार हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष होंगे, जबकि मौलवी बशीर अहमद इरफानी एपीएचसी में महासचिव के रूप में काम करता रहेगा। श्रीनगर में एक बैठक में एपीएचसी ने इसकी घोषणा की है।

सैयद अली शाह गिलानी के करीबी मसरत आलम भट की पहचान देश विरोधी कट्टरपंथी नेता के रूप में की जाती है। मसरत आलम के खिलाफ युद्ध छेड़ने समेत दर्जनों मामले दर्ज हैं। वह देश विरोधी विचारों को फैलाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता रहा है। उस पर मस्जिद में एंटी-इंडिया की ऑडियो सीडी बाँटकर लोगों को भड़काने का भी आरोप है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2015 में मसरत आलम ने श्रीनगर में अलगाववादियों की जनसभा में ‘हाफिज सईद का क्या पैगाम, कश्मीर बनेगा पाकिस्तान, गिलानी साहब का क्या पैगाम, कश्मीर बनेगा पाकिस्तान, मेरी जान मेरी जान पाकिस्तान पाकिस्तान, तेरा मेरा क्या अरमान, कश्मीर बनेगा पाकिस्तान’ का नारा लगाया था। इसके बाद मसरत को जिला प्रशासन ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत अंबफला जेल में बंद कर दिया गया था। इसके चार साल बाद यानी 2019 में अलगाववादी नेता मसरत को रातों रात एनआईए की टीम जम्मू की अंबफला जेल से दिल्ली लेकर पहुँची थी। दस दिन की पुलिस रिमांड के बाद उसे 2015 में पाकिस्तान और हाफिज सईद के पक्ष में नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

मसरत पर श्रीनगर में 15 अप्रैल 2015 को भारत विरोधी रैली करने, पाकिस्तान का झंडा फहराकर उसके समर्थन में नारे लगाने का आरोप है। वह 2008-10 में देशविरोधी प्रदर्शनों का मास्टरमाइंड रहा है। उस दौरान पत्थरबाजी की घटनाओं में 112 लोग मारे गए थे। उसे चार महीनों की तलाश के बाद अक्टूबर 2010 में पकड़ा गया था।

बता दें कि मसरत आलम को सरकार कई बार हिरासत में ले चुकी है। उस पर 27 आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें से अधिकांश में उसे या तो बरी कर दिया गया या जमानत दे दी गई है। 1 मार्च 2015 को मुफ्ती मोहम्मद सईद के जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बनने के बाद ही उसे रिहा कर दिया गया था। इसको लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ था। संसद में भी इस मामले को उठाया गया था, जिसके बाद आलम को अप्रैल 2015 को फिर से हिरासत में लिया गया था। तब से वह जेल में बंद है। 50 साल का मसरत अभी तक अपने जीवन के 17 साल जेल में गुजार चुका है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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