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AR रहमान पर धुन ‘चुराने’ का आरोप, PS-2 के ‘वीरा राजा वीरा’ के लिए चुराया म्यूजिक: SC पहुँचा मामला, सोशल मीडिया पर लोगों ने शेयर की ‘चोरी’ वाली लिस्ट

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि डागरवाणी परंपरा और डागर परिवार के योगदान को किसी परिचय की जरूरत नहीं। चीफ जस्टिस ने कहा कि डागर जैसे घरानों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत में योगदान न दिया होता, तो आज के आधुनिक गायक बाजार में अपनी पहचान बना पाते?

गायक और संगीतकार ए आर रहमान एक बार फिर बड़े विवाद में घिर गए हैं। मणिरत्नम की तमिल फिल्म पोन्नियन सेल्वन 2 के चर्चित गीत ‘वीरा राजा वीरा’ को लेकर उन पर शास्त्रीय ध्रुपद रचना ‘शिव स्तुति’ की नकल करने का आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर एक क्लिप वायरल हो रही है, जिसमें रहमान के गानों और ओरिजिनल गानों के बारे में बताया गया है।

इसमें पहला गाना ‘वीरा राजा वीरा’ है, जिसकी धुन सुनने में भी बिल्कुल ‘शिव स्तुति’ जैसी है। इसी तरह ‘ये हंसी वादियाँ, ये खुला आसमाँ’, जय हो और ‘जब तक है जान’ के ‘चल्ला’ और फेमस गाना ‘मुकाबला’ गाने के साथ-साथ कई अन्य भाषाओं के गाने की धुन और असली धुन को पेश किया गया है। वीडियो में बताया गया है कि असली धुन किस फिल्म की है।

फेमस फिल्म ‘गजनी’ के ‘कैसे मुझे’, ‘येलो कार्ड’ के ‘ओनली वन’, ‘हेलो मिस्टर इथिरकाची’ मेम्फिस स्टॉम्प, रोजा-रोजा की धुन सिप्पी इरुक्कुट्ठू से चोरी की गई है। ‘ये हँसी वादियाँ’ की धुन ‘क्वाइट मैन’ से चोरी की गई है। फेमस गाना ‘जय हो’ की धुन ‘सिम्फोनी नंबर 40’ से ली गई है। ‘जब तक है जान’ के ‘चल्ला’ गाने की धुन असल में ‘सेव टुनाइट’ से ली गई है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जहाँ कोर्ट ने रहमान और फिल्म निर्माताओं से मूल रचनाकार और परंपरा को उचित मान्यता देने पर गंभीरता से विचार करने को कहा है। अब इस केस की अगली सुनवाई शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को होगी।

क्या है पूरा विवाद और किसने लगाए आरोप?

यह याचिका ध्रुपद शैली के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक उस्ताद फैय्याज वासिफुद्दीन डागर ने दायर की है। उनका कहना है कि ‘वीरा राजा वीरा’ गीत में उनके परिवार की पारंपरिक रचना ‘शिव स्तुति’ के सुर, ताल और संगीत संरचना का बिना अनुमति उपयोग किया गया है।

डागर परिवार का दावा है कि यह रचना उनके अब्बू नासिर फैयाजुद्दीन डागर और चाचा जहीरुद्दीन डागर ने 1970 के दशक में डागरवाणी परंपरा में तैयार की थी और पहली बार 1978 में एम्स्टर्डम में सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत की गई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, रहमान की टीम में शामिल दो कलाकार पहले डागर परिवार के शिष्य रह चुके थे।

वे इस रचना से भली-भाँति परिचित थे। आरोप है कि उन्हीं के जरिए यह रचना रहमान तक पहुँची और बिना इजाजत इसे फिल्मी गीत में ढाल दिया गया। डागर का कहना है कि भले ही गीत के बोल अलग हों, लेकिन उसकी ताल, बीट, स्वरों की संरचना और भाव-प्रस्तुति ‘शिव स्तुति’ से मिलती-जुलती है, जो कॉपीराइट और नैतिक अधिकारों का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: परंपरा और मूल कलाकारों को मिले सम्मान

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पीठ चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने की। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि डागरवाणी परंपरा और डागर परिवार के योगदान को किसी परिचय की जरूरत नहीं। चीफ जस्टिस ने कहा कि डागर जैसे घरानों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत में योगदान न दिया होता, तो आज के आधुनिक गायक बाजार में अपनी पहचान बना पाते?

वहीं जस्टिस बागची ने कहा कि इस मामले में मूल धुन की मौलिकता पर विवाद नहीं है, बल्कि सवाल लेखक और पहले प्रस्तोता को लेकर है। रहमान के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने स्वीकार किया कि गीत की प्रेरणा डागरवाणी परंपरा से ली गई है, लेकिन उन्होंने कानूनी पहलुओं पर अपना पक्ष रखा।

कोर्ट ने सुझाव दिया कि कम से कम यह स्वीकार किया जाए कि इस रचना का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन डागर परिवार के पूर्वजों द्वारा किया गया था। इस पर सिंघवी ने निर्देश लेकर अगली सुनवाई में जवाब देने की बात कही।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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