Wednesday, April 21, 2021
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केरल के सिस्टर अभया मर्डर केस में फादर थॉमस और नन सेफी को उम्रकैद: 28 साल बाद CBI कोर्ट ने सुनाई सजा

यह मामला 21 वर्षीय अभया की संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत से संबंधित है। उनका शव 27 मार्च 1992 को सेंट पायस के एक कुएँ से मिला था। 27 मार्च 1992 को सेंट पायस कॉन्वेंट के कुएँ में सिस्टर अभया मृत मिली थी। इसी पायस कॉन्वेंट में पढ़ने वाली बिना थॉमस को सिस्टर अभया नाम दिया गया था।

केरल के चर्चित सिस्टर अभया मर्डर केस में दोषी पाए गए दोनों लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। केरल के कोट्टयम के सेंट पायस कॉन्वेंट में रहने वालीं सिस्टर अभया की सदिंग्ध परिस्थितियों में मौत के 28 साल बाद तिरुवनंतपुरम की सीबीआई अदालत ने बुधवार (दिसंबर 23, 2020) को एक पादरी फादर थॉमस और नन सिस्टर सेफी को उनकी हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। 

सीबीआई अदालत ने प्रत्येक पर पाँच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने कैथोलिक चर्च के फादर थॉमस कोट्टूर और सिस्टर सेफी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) एवं 201 (सबूतों के साथ छेड़छाड़ करना) के तहत मंगलवार (दिसंबर 22, 2020) को दोषी पाया था। अदालत ने फादर कोट्टूर को भारतीय दंड संहिता की धारा 449 (अनधिकार प्रवेश) का दोषी भी पाया। फादर कोट्टूर को पूजापुरा की केंद्रीय जेल भेजा गया है जबकि सिस्टर सेफी को यहाँ अत्ताकुलनगारा महिला जेल भेजा गया है।

क्या है सिस्टर अभया का पूरा मामला?

यह मामला 21 वर्षीय अभया की संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत से संबंधित है। उनका शव 27 मार्च 1992 को सेंट पायस के एक कुएँ से मिला था। 27 मार्च 1992 को सेंट पायस कॉन्वेंट (Pious X Convent) के कुएँ में सिस्टर अभया मृत मिली थी। इसी पायस कॉन्वेंट में पढ़ने वाली बिना थॉमस को सिस्टर अभया नाम दिया गया था। शुरुआत में मामले की जाँच स्थानीय पुलिस और राज्य अपराध शाखा ने की थी, जिसमें पहले पूरे मामले को आत्महत्या कहकर फाइल को बंद कर दिया गया। लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ता जोमोन पुथेनपुराकल के संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद 29 मार्च, 1993 को इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया।

CBI ने वर्ष 2008 में कोट्टूर, पूथरुकायिल और सेफी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस हत्या को आत्महत्या साबित करने के अगले दो दशकों तक इस केस में कोई नई जानकारी नहीं आई। इसके बाद सीधे 27 साल बाद यानी साल 2019 में इस मामले की फिर से सुनवाई शुरू हुई और एक-एक कर गवाह मुकरने लगे। 

इस मामले में अन्य आरोपित फादर जोश पूथरुकायिल को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है। शुरुआत में मामले की जाँच स्थानीय पुलिस और राज्य की अपराध शाखा ने की थी और दोनों ने ही कहा था कि अभया ने खुदकुशी की है। 

सीबीआई ने मामले की जाँच 29 मार्च 1993 को अपने हाथ में ली और तीन क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी तथा कहा था कि यह हत्या का मामला है लेकिन अपराधियों का पता नहीं चल सका है। बहरहाल, चार सितंबर 2008 को केरल उच्च न्यायालय ने मामले को लेकर सीबीआई को फटकार लगाई थी और कहा था कि एजेंसी ‘अभी भी राजनीतिक और नौकरशाही की शक्ति रखने वालों की कैदी है’ तथा सीबीआई की दिल्ली इकाई को निर्देश दिया था कि वह जाँच को कोच्चि इकाई को सौंप दे। 

इसके बाद सीबीआई ने फादर कोट्टूर, फादर पूथरुकायिल और नन सेफी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। अभियोजन के मुताबिक, कोट्टूर और पूथरुकायिल का कथित रूप से सेफी से अवैध संबंध था। सीबीआई के आरोप पत्र के मुताबिक, 27 मार्च 1992 की रात को अभया ने कोट्टूर और सेफी को कथित रूप से आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया जिसके बाद आरोपितों ने अभया पर कुल्हाड़ी से हमला किया और उसे कुएँ में फेंक दिया

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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