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‘निर्भया के दोषियों को 16 दिसंबर को ही फाँसी दो या फिर मुझे इच्छामृत्यु दे दो’

“निर्भया कांड के 7 साल बीत जाने के बाद आज भी ये दिल्ली घूरती है, महिलाओं का शोषण करती है। वक़्त आ गया है, साथ मिलकर निर्भया के गुनहगारों को उनके गुनाहों की सजा उसी दिन दिलवाएँ जिस दिन उन्होंने देश की बेटी के आबरू को तार-तार किया था।”

निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों को फाँसी पर लटकाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। बताया जा रहा है कि 16 दिसंबर को फाँसी दी जा सकती है। तिहाड़ जेल प्रशासन ने तख्त तैयार करके एक डमी का ट्रायल किया है। हालाँकि अभी तक फाँसी देने को लेकर जेल प्रशासन के पास कोई लेटर नहीं आया है।

इस बीच पीपुल्स अगेंस्ट रेप इन इंडिया (PARI) की संस्थापक और निर्भया केस की पैरोकार योगिता भयाना ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि इस केस के दोषियों को 16 दिसंबर को ही फाँसी दी जाए, अन्यथा उन्हें इच्छामृत्यु की इजाजत दी जाए। उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “मैंने माननीय राष्ट्रपति जी से इच्छामृत्यु की इजाजत माँगी है। निर्भया कांड को लगभग 7 साल हो चुके हैं। अभी तक न्याय नहीं मिला। मुझे शर्म और बेबसी महसूस होती है। 16 दिसंबर को ही निर्भया के दोषियों को फाँसी मिलनी चाहिए, अन्यथा मुझे इच्छामृत्यु की इजाजत दें।”

बता दें कि योगिता इस केस में न्याय दिलाने के लिए शुरू से ही जुड़ी रही हैं। वो निर्भया आंदोलन के जरिए लगातार मृत्युदंड की माँग करती रही हैं। उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में न्याय मिलने का वक्त तय किया जाए। अगर फास्ट ट्रैक कोर्ट में सात साल का वक्त लगेगा तो सामान्य केस में क्या होगा। जबकि इस केस को पूरी दुनिया जानती है। पूरा देश पीड़ित परिवार के साथ इंसाफ के लिए खड़ा हुआ था।

उन्होंने एक अन्य ट्ववीट करते हुए लिखा, “निर्भया कांड के 7 साल बीत जाने के बाद आज भी ये दिल्ली घूरती है, महिलाओं का शोषण करती है। वक़्त आ गया है, साथ मिलकर निर्भया के गुनहगारों को उनके गुनाहों की सजा उसी दिन दिलवाएँ जिस दिन उन्होंने देश की बेटी के आबरू को तार-तार किया था।”

भयाना ने इससे पहले तिहाड़ जेल प्रशासन को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि यदि जल्लाद नहीं मिल रहा है तो दोषियों को फाँसी देने के लिए वो जल्लाद बनने को तैयार हैं, लेकिन सिर्फ एक जल्लाद की वजह से निर्भया केस के दोषियों की फाँसी देने में देर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “मैं इन दरिंदों को खुद फाँसी देने के लिए बिना किसी भय और बिना किसी शर्त के तैयार हूँ। मुझे मौका दें, उन हैवानों को फाँसी देने के लिए मैं तैयार हूँ। निर्भया के न्याय के लिए लड़ने वाली मेरी लंबी लड़ाई का यह सुखद अंत होगा।”

योगिता का कहना है कि इससे पुराने और जघन्य मामलों में भी अब तक न्याय नहीं मिला है। आखिर बेटियाँ कैसे सुरक्षित रहेंगी। रेपिस्ट लगातार फाँसी पर लटकाए जाएँगे तभी रेप बंद होगा। रेप के मामले में अंतिम फाँसी 2003 में हुई थी। इसीलिए रेप की घटनाएँ रुक नहीं रही हैं। डर खत्म हो गया है। यदि 16 दिसंबर को फाँसी होगी तो निर्भया को हम सबकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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