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माँ की आँखों का इलाज कराने से पहले ही दुनिया छोड़ गए विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान, 31 साल पर इस बार बहनों ने बाँधी थी राखी

चाचा यशपाल ने बताया कि पृथ्वी अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। वह अपने पाँच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। पृथ्वी अपने माता-पिता के बेहद करीब थे और उनसे हर दिन फोन पर बात किया करते थे।

तमिलनाडु के कुन्नूर में बुधवार (8 दिसंबर 2021) को भारतीय वायुसेना का हेलीकॉप्टर Mi-17V5 क्रैश हो गया था। इस हादसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) और उनकी पत्नी मधुलिका रावत (Madhulika Rawat) समेत 13 लोगों की जान चली गई थी। इस हेलीकॉप्टर को आगरा के रहने वाले वायुसेना के विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान (Prithivi Singh Chauhan) उड़ा रहे थे। 

विंग कमांडर के 75 वर्षीय पिता सुरेंद्र सिंह चौहान ने जब हेलीकॉप्टर क्रैश की खबर सुनी तो वह अपने बेटे के लिए चिंतित हो गए। उन्होंने तुरंत अपने बेटे पृथ्वी सिंह चौहान को फोन किया। बेटे का फोन बंद होने पर पिता के दिल की धड़कनें और तेज हो गईं। उन्होंने मुंबई में रहने वाली अपनी सबसे बड़ी बेटी शकुंतला तोमर को फोन किया और उससे कहा कि वह इस दुर्घटना से जुड़ी सभी जानकारी उनसे साझा करे।

इसके बाद शकुंतला ने तुरंत पृथ्वी सिंह चौहान की पत्नी कामिनी को फोन किया, जिसने उन्हें बताया कि वह हेलीकॉप्टर में हैं। कुछ घंटों के बाद परिवार को पृथ्वी सिंह चौहान के निधन की सूचना मिली। पृथ्वी सिंह के चाचा यशपाल सिंह (57) ने कहा, ”वह (सुरेंद्र सिंह) हेलिकॉप्टर क्रैश से संबंधित जानकारी के लिए लगातार न्यूज चैनलों को देख रहे थे। शाम को जैसे ही शकुंतला ने अपने पिता को भाई की मौत की सूचना दी तो वह सकते में आ गए।”

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, 42 वर्षीय विंग कमांडर के निधन की खबर सुनते ही आगरा के शरण नगर स्थित उनके घर पर नेताओं, रिश्‍तेदारों और पड़ोसियों के साथ बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटने लगी। गुरुवार (9 दिसंबर 2021) को उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी उनके परिवार वालों से मिलने पहुँचे थे।

चाचा यशपाल ने बताया कि पृथ्वी अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। वह अपने पाँच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। पृथ्वी अपने माता-पिता के बेहद करीब थे और उनसे हर दिन फोन पर बात किया करते थे। आखिरी बार उन्होंने तीन दिन पहले अपनी 70 वर्षीय माँ सुशीला से लंबी बातचीत की थी।

उनके चाचा ने बताया, “पृथ्वी ने अपनी माँ से फोन पर कहा था कि आगरा के सैन्य अस्पताल (military hospital) में उनकी आँखों के इलाज के लिए उसने एक डॉक्टर से बात की है। उसने अपनी माँ को भरोसा दिलाया था कि वह जल्द ही ठीक हो जाएँगी, लेकिन बेटे के निधन की खबर सुनने के बाद से पृथ्वी की माँ सदमे में हैं।”

अपने छह भाइयों के साथ आगरा में बेकरी का बिजनेस करने वाले यशपाल सिंह चौहान ने आगे बताया, ”पृथ्वी हमारे परिवार में इकलौता सदस्य था, जो सरकारी नौकरी कर रहा था। उसने परिवार के अन्य बच्चों को भी भारतीय वायुसेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। वह मिलनसार था। सबका दिल जीतने की कला उसमें थी। वह हमारे परिवार के लिए एक प्रेरणा था।” परिवार के सदस्यों ने बताया कि मध्य प्रदेश के रीवा में सैनिक स्कूल से एनडीए में चयनित होने के बाद पृथ्वी सिंह चौहान वर्ष 2000 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग हैदराबाद में थी।

पृथ्वी सिंह चौहान ने वर्ष 2007 में कामिनी से शादी की थी। उनकी एक बेटी आराध्या (12) और एक बेटा अविराज (6) है। वे आखिरी बार इस साल अगस्त में रक्षा बंधन के मौके पर आगरा में अपने घर आए थे। इस दौरान वह लगभग 15 दिनों तक यहाँ रहे। उनके चाचा ने बताया कि पृथ्वी सिंह अपनी बहनों से बहुत प्यार करते थे, लेकिन वे रक्षा बंधन पर नहीं मिल पाते थे। इस बार 31 साल बाद वे सभी रक्षा बंधन पर एकजुट हुए थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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