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बेटे के IAS का रिजल्ट आया तब पिता पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भर रहे थे, बेच दिया था घर

प्रदीप के पिता ने बेटे की पढ़ाई के लिए अपना घर तक बेच दिया था और कम पैसों के बावजूद अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कभी कोई कमी नहीं होने दी। शायद यही वजह रही कि प्रदीप ने पहले ही प्रयास में अपने माता-पिता का सपना पूरा कर दिखाया और UPSC परीक्षा में इस वर्ष सफल हुए।

UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) परीक्षा परिणाम की घोषणा हो चुकी है। इस परीक्षा में हर किसी के संघर्ष की अपनी अलग कहानी देखने और सुनने को मिलती है। मध्य प्रदेश के प्रदीप सिंह की कहानी इन्हीं में से एक हैं। इस परीक्षा में मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले प्रदीप सिंह को ऑल इंडिया में 93वीं रैंक मिली है। उनकी कामयाबी कई मायनों में अहम है और दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। कारण ये है कि बेहद साधारण परिवार से आने वाले प्रदीप के पिता पेट्रोल पंप पर काम करते हैं।

प्रदीप के पिता ने बेटे की पढ़ाई के लिए अपना घर तक बेच दिया था और कम पैसों के बावजूद अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कभी कोई कमी नहीं होने दी। शायद यही वजह रही कि प्रदीप ने पहले ही प्रयास में अपने माता-पिता का सपना पूरा कर दिखाया और UPSC परीक्षा में इस वर्ष सफल हुए।

प्रदीप का UPSC का रिजल्ट का समाचार उनके पिता के पास ऐसे समय आया, जब उनके पिता पेट्रोल पंप पर लोगों की गाड़ियों में पेट्रोल भरने का काम कर रहे थे। प्रदीप के पिता इंदौर के एक पेट्रोल पंप पर नौकरी करते हैं।

UPSC-2018 के परिणाम में 93वीं रैंक हासिल करने वाले प्रदीप सिंह मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं, मगर पिछले 25 साल से इनका परिवार इंदौर में रह रहा है। प्रदीप के पिता मनोज सिंह इंदौर के देवास रोड स्थित पेट्रोल पम्प पर काम करते हैं। मनोज सिंह के 2 बेटे हैं। बेटे संदीप ने MBA किया है और दूसरा बेटा, यानि प्रदीप आज IAS बन गया है। प्रदीप ने देवी अहिल्या इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज से 2017 में बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की थी।

UPSC रिजल्ट आते ही प्रदीप के पिता के पास मीडिया भी पहुँच गया। मनोज सिंह ने बताया कि वे बेटे की सफलता से काफी खुश है। बेटे को पढ़ाने-लिखाने में उन्होंने काफी संघर्ष किया, वहीं उनका कहना है कि बेटे ने भी मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, रोजाना 17-18 से घंटे पढ़ता था।

प्रदीप की इस उपलब्धि पर उनके पिता मनोज सिंह ने कहा, “परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, मगर दोनों बेटों को पढ़ने-लिखने का भरपूर अवसर दिया। बेटे प्रदीप ने प्रशासनिक सेवा जाने में इच्छा जताई, तो आर्थिक दिक्कत आ गई थी। बेटे के ख्वाब को पूरा करने के लिए मकान तक बेचना पड़ा, लेकिन अब बेटे की कामयाबी से सातवें आसमान पर हूँ।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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