Wednesday, June 19, 2024
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कौन हैं पुणे के रईसजादे को बेल देने वाले एलएन दावड़े, अब मीडिया से रहे भाग: जिसने 2 को कुचल कर मार डाला उसे ‘300 शब्दों का निंबध’ पर दी थी राहत

डॉ एलएन धनावड़े इस समय जुवेनाइल बोर्ड के सदस्य हैं। इससे पहले बालग्राम 'SOS' के बोर्ड में थे, जो कि रायगढ़ में है। वहाँ उन्हें एक नाबालिग लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में सस्पेंड किया गया था।

पुणे पोर्श कार एक्सीडेंट केस में आरोपित रईसजादे को बेल देने वाले डॉक्टर एल.एन धनावड़े के खिलाफ जाँच के आदेश दिए गए हैं। इस बीच उनकी मीडिया से भागते वीडियो सामने आई है। वीडियो में वो बिन हेलमेट पहले रोड पर स्कूटी से जा रहे हैं। वहीं मीडियाकर्मी उनसे पूछ रहे हैं कि उन्होंने दो इंजीनियरों को मौत के घाट उतारने वाले आरोपित लड़के को क्यों बेल दी थी।

बता दें कि एलएन धनावड़े ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड का गैर न्यायिक सदस्य होने के बावजूद आरोपित रईसजादे को बेल देने का फैसला सुनाया था वो भी दो शर्तों पर। एक शर्त तो ये कि आरोपित रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस जाए और ट्रैफिक रूल्स के बारे में बढ़े और प्रेजेंटेशन उनके आगे जमा करे और दूसरा कि वो रोड एक्सीडेंट और उनके निवारण पर 300 शब्द का निबंध लिखे।

उनके इस निर्णय की बात जब मीडिया में फैली तो महाराष्ट्र के उप सीएम देवेंद्र फडणवीस समेत कई लोगों ने इस फैसले पर सवाल उठाए। पूछा गया कि क्या दो लोगों की जान लेने की की सजा ऐसी होती है। इसके बाद उनके खिलाफ जाँच के आदेश दिए गए।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, एलएन धनावड़े ने जुवेनाइल बोर्ड के सदस्य होने के नाते अपना यह फैसला तो दिया था लेकिन इस दौरान उन्होंने नियमों का पालन नहीं किया था। पुणेकर न्यूज के मुताबिक, ऐसे फैसले लेते समय जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के दो सदस्यों का होना जरूरी होता है। मगर फिर भी धनावड़े ने मामला अकेले सुना और बिन किसी बोर्ड के अधिकारी से संपर्क किए निर्णय़ ले लिया। बाद में 22 मई को दोबारा सुनवाई हुई और आरोपित की बेल कैंसिल हो गई।

कौन है रईसजादे को बेल देने वाले डॉ एलएन धनावड़े

जानकारी के मुताबिक, डॉ एलएन धनावड़े जुवेनाइल बोर्ड के सदस्य से पहले बालग्राम ‘SOS’ के बोर्ड में थे, जो कि रायगढ़ में है। वहाँ उन्हें एक नाबालिग लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में सस्पेंड किया गया था। इसके बाद इन्हें पुणे भेजा गया और यहाँ ये पुणे बाल कल्याण समिति से जुड़े। इसके बाद इन्हें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में पद मिल गया। अब उन्होंने इसी पद का फायदा उठाते हुए अपना फैसला सुनाया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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