अयोध्या पर फैसले के बाद योगी आदित्यनाथ ने गुरु को किया याद, शेयर की रामशिला की तस्वीर

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं, उसका राम मंदिर आंदोलन में अहम योगदान रहा है। उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ और महंत अवैद्यनाथ गुरु महंत दिग्विजय नाथ, राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान होने वाले अनेकों कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते थे।

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरुओं महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवैद्यनाथ और महंत रामचंद्र परमहंस को श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने तीनों महंत गुरुओं को याद करते हुए उन्होंने लिखा, “गोरक्षपीठाधीश्वर युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज, परम पूज्य गुरुदेव गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी महाराज एवं परमहंस रामचंद्रदास जी महाराज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।”

योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या आंदोलन के दौरान हुए एक शिलापूजन समारोह की तस्वीर शेयर करते हुए गोरक्षपीठ के पूर्व महंतों को श्रद्धांजलि अर्पित की। दरअसल, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं, उसका राम मंदिर आंदोलन में अहम योगदान रहा है। उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ और महंत अवैद्यनाथ गुरु महंत दिग्विजय नाथ, राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान होने वाले अनेकों कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते थे। जानकारी के अनुसार, महंत दिग्विजयनाथ ने 1950-60 के दशक में राम जन्मभूमि से जुड़े तमाम कार्यक्रमों में सक्रिय तौर पर काम किया था।

इससे पहले उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कई ट्वीट किए। इनमें उन्होंने लिखा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत है, देश की एकता व सद्भाव रखने में सभी सहयोग करें, उत्तर प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सद्भाव का वातावरण बनाए रखने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

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बता दें कि RSS प्रमुख मोहन भागवत ने एक प्रेस कॉन्फेन्स को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया। अयोध्या फ़ैसले पर उन्होंने पूरे देश में आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि मामला दशकों से चल रहा था और यह सही निष्कर्ष पर पहुँच गया है।

RSS प्रमुख ने कहा कि इस फ़ैसले को जय-पराजय की दृष्टि से बिलकुल नहीं देखा जाना चाहिए। सत्य व न्याय के मंथन से प्राप्त निष्कर्ष को भारतवर्ष के सम्पूर्ण समाज की एकात्मकता व बंधुता के  परिपोषण करने वाले निर्णय के रूप में देखना व उपयोग में लाना चाहिए। सम्पूर्ण देशवासियों से अनुरोध है कि विधि और संविधान की मर्यादा में रहकर संयमित व सात्विक रीति से अपने आनंद को व्यक्त करें।

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