अडानी समूह को वर्ष 2026 के लिए ‘वर्ल्ड इंजीनियरिंग डे फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ का आधिकारिक पार्टनर चुना गया है। यह अंतरराष्ट्रीय दिवस UNESCO द्वारा घोषित किया गया है और इसे वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ इंजीनियरिंग ऑर्गेनाइजेशन (WFEO) आयोजित करता है।
पहली बार किसी भारतीय कंपनी को इस कार्यक्रम के लिए आधिकारिक साझेदार बनाया गया है। हर साल बुधवार (4 मार्च 2026) को यह दिन इंजीनियरों की भूमिका और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में उनके योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है।
खावड़ा प्रोजेक्ट और 30 गीगावॉट का लक्ष्य
2026 की थीम है “स्मार्ट इंजीनियरिंग फॉर ए सस्टेनेबल फ्यूचर थ्रू इनोवेशन एंड डिजिटलाइजेशन।” इस साझेदारी के तहत अडानी समूह के गुजरात के कच्छ में चल रहे खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट को खास तौर पर शामिल किया गया है। अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) के नेतृत्व में बन रहा यह प्रोजेक्ट 538 वर्ग किलोमीटर में फैला है और 2029 तक 30 गीगावॉट क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है।
यह दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। यहाँ सोलर और विंड एनर्जी को मिलाकर बिजली बनाई जा रही है। 5.2 मेगावॉट के ऑनशोर विंड टरबाइन, बायफेशियल सोलर पैनल, सिंगल-एक्सिस ट्रैकर्स और बिना पानी वाले रोबोटिक क्लीनिंग सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।
अब तक करीब 8 गीगावॉट क्षमता चालू हो चुकी है। पूरा प्रोजेक्ट तैयार होने पर हर साल करीब 87.4 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली पैदा होगी और 63.6 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा। साथ ही 15 हजार से ज्यादा ग्रीन जॉब्स बनने का अनुमान है।
अडानी समूह ने कहा कि यह पहल भारत के 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन फॉसिल फ्यूल क्षमता के लक्ष्य और संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल 7 के अनुरूप है। WFEO ने भी कहा कि अडानी की योजनाएँ सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

