इलाहाबाद हाई कोर्ट (HC) ने निजी संपत्ति में भीड़ जुटाकर नमाज अदा करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने माना कि यह व्यक्तिगत सुरक्षा और निजी संपत्ति की आड़ में सार्वजनिक व्यवस्था और शांति को खतरे में नहीं डाला जा सकता। साथ ही कोर्ट ने सरकार को अधिकार दिया कि अगर भविष्य में भी निजी संपत्ति पर भीड़ जमा कर नमाज अदा की गई, तो प्रशासन कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला बरेली के मोहम्मद गंज गाँव में एक निजी संपत्ति पर 52 से 62 लोगों की भीड़ जुटाकर नमाज अदा करने से जुड़ा है। बुधवार (1 अप्रैल 2026) को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बरेली के जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही को भी बंद कर दिया है।
दरअसल, जनवरी 2026 में कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि उत्तर प्रदेश में किसी निजी संपत्ति पर धार्मिक प्रार्थना सभा करने के लिए किसी तरह की अनुमति की जरूरत नहीं है। इसी आदेश का हवाला देते हुए मोहम्मद गंज गाँव के एक व्यक्ति तारिक खान ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने आदेश का पालन नहीं किया और उसे घर पर नमाज अदा करने नहीं दिया गया। तारिक ने प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।
हालाँकि, सरकार ने कोर्ट में बताया कि कोर्ट के आदेश का फायदा उठाकर तारिक खान ने अपने घर पर नमाज के लिए 52 से 62 लोगों की भीड़ इकट्ठा कर रहा था। सरकार ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से इलाके की शांति और व्यवस्था खराब हो सकती है।
इसके बाद तारिक खान ने कोर्ट में कहा कि आगे से वह अपने घर पर नमाज के लिए ज्यादा लोगों को इकट्ठा नहीं करेगा।। कोर्ट ने तारिक के बयान को दर्ज करते हुए मामले को खत्म कर दिया। साथ ही सरकार को अधिकार दिया कि वादे का उल्लंघन करने पर उचित कार्रवाई की जाए।

