पहली बार कैमरे पर साफ दिखा अमेजन के जंगलों का रहस्यमयी कबीला, फिल्ममेकर पॉल रोसोली ने शेयर किया वीडियो: पाषाण युग के हथियार लिए दिखे लोग

अमेजन के घने जंगलों में दुनिया से दूर पहली बार एक रहस्यमयी कबीला कैमरे में कैद हुआ है। यह फुटेज फिल्ममेकर पॉल रोसलिए ने शेयर किया है। इसे लेक्स फ्रिडमैन पॉडकास्ट के दौरान दिखाया गया। वीडियो में माश्को पीरो जनजाति के लोग नजर आ रहे हैं। कबीले के सदस्य हथियारों के साथ नदी किनारे नजर आ रहे हैं। नदी के किनारे तितलियाँ दिख रही हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि माश्को पीरो जनजाति के लोग अपने हथियार नीचे रख कर नदी में लाई गई एक नाव पर सवार हो जाते हैं। इस पर खाने के लिए केले रखे गए थे जिसे ये उठाते हैं। पॉल रोसोलिए के अनुसार, यह फुटेज अब तक का सबसे स्पष्ट और अद्भुत दृश्य है, जिसमें इस जनजाति की जीवनशैली और व्यवहार को इतने करीब से देखा जा सकता है।

लेखक पॉल रोसोली ने अमेजन में दो दशक काम किया है और कहते हैं कि वह पल उनके जीवन के सबसे अहम अनुभव वाले थे।

उन्होंने कहा कि ऐसा साफ पहले कभी नहीं दिखाया गया। अब तक बिना संपर्क वाली जनजातियों का जो भी वीडियो सामने आया है, वह धुँधला दिख रहा है। लेखक रोसोली के मुताबिक, जब वे हथियार लेकर ग्रुप में खड़े हुए थे, तो वह उनकी बॉडी लैंग्वेज को ध्यान से देख रहे थे। उन्होंने ध्यान से देखा कि कैसे वे लोग चल रहे हैं। कैसे इशारा कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें दिखा कि कबीले के कुछ सदस्य के चेहरे पर थोड़ी हंसी भी थी।

रिसर्चर्स का अनुमान है कि दुनिया भर में अभी भी करीब 200 ऐसे ग्रुप हैं, जिनसे संपर्क नहीं हुआ है, उनमें से ज्यादातर ब्राजील और पेरू के अमेजन के जंगल में हैं।

इनसे सीधा संपर्क सही नहीं है, इसलिए इन समुदायों के बारे में जानकारी ज्यादातर सैटेलाइट इमेज, हवाई निगरानी और पड़ोसी आदिवासी समूहों की रिपोर्ट से मिलती है।

2018 में अमेरिकी मिशनरी जॉन एलन चाउ ने नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड पर जनजाति समुदाय से संपर्क करने की कोशिश की थी, तो कबीले के लोगों ने उसे मार दिया था।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह रहस्यमयी जनजाति के लोगों का सामने आना, उनके अस्तित्व पर छाए संकट का प्रमाण है।

सर्वाइवल इंटरनेशनल और स्थानीय आदिवासी संगठन FENAMAD के मुताबिक, अवैध लकड़ी कटाई और ड्रग तस्करी के कारण इन कबीलों का घर उजाड़ा जा रहा है। इसलिए इनके पास भागने के अलावा चारा नहीं रह गया है।

विशेषज्ञ इस बात से भी चिंतित हैं कि जबरन दुनिया वालों के संपर्क की वजह से ये लोग आम बीमारियों से ग्रस्त हो जाएँगे, क्योंकि इन्हें प्रतिरक्षा के लिए किसी तरह का टीका या ऑरल खुराक नहीं ले रखी है। ऐसा होता है तो जनजाति का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।

पर्यावरण संरक्षणविदों ने पेरू सरकार से माँग की है कि आदिवासी के लिए संरक्षित क्षेत्र का विस्तार किया जाए और ये सख्ती से लागू हो कि वहाँ कोई नहीं जाएगा और किसी तरह का अतिक्रमण नहीं होगा।