‘तुम हिंदू हो, यहाँ क्या कर रही हो?’: AMU की सीनियर महिला प्रोफेसर को डीन मोहम्मद नफीस करता था प्रताड़ित, पीड़िता बोली- प्रेग्नेंट होने पर इतना काम करवाया कि गर्भपात हो गया

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के राजनीति विज्ञान विभाग की सीनियर प्रोफेसर रचना कौशल ने कॉलेज के डीन प्रो मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला प्रोफेसर का कहना है कि उन्हें सालों तक सिर्फ हिंदू होने की वजह से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनका आरोप है कि मोहम्मद नफीस लगातार उन पर दबाव बनाते रहे कि वे AMU छोड़कर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) चली जाएँ।

धार्मिक पहचान के आधार पर प्रताड़ना का आरोप

प्रोफेसर रचना कौशल का आरोप है कि उन्हें वर्षों से सिर्फ इसलिए मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है क्योंकि वह हिंदू हैं। महिला प्रोफेसर का कहना है कि विभाग के डीन, प्रोफेसर मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी ने उन्हें बार-बार यह अहसास कराया कि एक मुस्लिम बहुल संस्थान में उनके लिए कोई जगह नहीं है।

गर्भावस्था में भी काम का दबाव, मिसकैरेज का आरोप

महिला प्रोफेसर ने बताया कि उनके साथ भेदभाव का यह सिलसिला साल 1998 में उनकी नियुक्ति के कुछ समय बाद ही शुरू हो गया था। उन्होंने एक हृदयविदारक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 2004 में जब वह गर्भवती थीं, तब उन पर काम का इतना अधिक दबाव बनाया गया कि उनका गर्भपात हो गया।

2012 में पति के निधन के बाद वह और भी अकेली पड़ गईं, लेकिन विभाग में उनके प्रति संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उन्हें और अधिक अलग-थलग कर दिया गया।

‘तुम हिंदू हो, मुस्लिम छात्रों को नहीं पढ़ाओगी’

महिला प्रोफेसर का आरोप है कि डीन प्रो मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी ने उनसे साफ शब्दों में कहा कि ‘हिंदू शिक्षक जानबूझकर मुस्लिम छात्रों को ठीक से नहीं पढ़ाते।’ महिला प्रोफेसर का दावा है कि उन्हें विभागीय बैठकों से बाहर रखा गया और उनकी जिम्मेदारियाँ छीन ली गईं।

यहाँ तक कि उनकी नियुक्ति को सार्वजनिक रूप से ‘अवैध’ बताकर उनके मान-सम्मान को ठेस पहुँचाई गई। उन्होंने इन आरोपों की पुष्टि के लिए कुलपति को ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजी सबूत भी सौंपे हैं।

प्रमोशन रोका गया

प्रोफेसर रचना का आरोप है कि उनके प्रमोशन को जानबूझकर सालों तक अटकाया गया, जिसके लिए उन्हें हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट के आदेश के बाद ही उन्हें उनका हक मिला।

महिला प्रोफेसर ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द ही उन्हें न्याय नहीं दिया, तो वे पुलिस में FIR दर्ज कराएँगी। दूसरी ओर, डीन प्रोफेसर अंसारी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया है और अपना पक्ष कुलपति के सामने रखने की बात कही है