बरेली में हुए विवाद और हिंसा को 8 दिन बीत चुके हैं। जबरदस्त कार्रवाई के बाद शहर में फिलहाल शांति कायम है, लेकिन अब समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस शांति को भंग करने की जिम्मेदारी उठा ली है। जुमे की नमाज के बाद हिंसा फैलाने वाले इस्लामिक दंगाईयों को ‘पीड़ित’ बताने का ढोंग करते हुए सपा नेताओं का 14-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार (4 अक्टूबर 2025) को बरेली जा रहा था।
सपा के इस कदम को सीधे तौर पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति और वोट बैंक साधने की कोशिश माना जा रहा था। हालाँकि, उत्तर प्रदेश पुलिस ने सपा की इस चाल को नाकाम करते हुए सख्ती से एक्शन लिया और नेताओं को रास्ते में ही रोक दिया गया।
सपा की ‘तुष्टिकरण की नौटंकी’ फेल
सपा ने शुक्रवार (3 अक्टूबर 2025) को ऐलान किया था कि उनके 5 सांसदों समेत 14 नेताओं का प्रतिनिधिमंडल बरेली जाएगा। हालाँकि, प्रशासन ने माहौल बिगड़ने के खतरे को देखते हुए इसकी इजाजत नहीं दी और नेताओं को रोक दिया गया।
बरेली जा रहे सांसद जियाउर्रहमान बर्क को रास्ते में ही रोक दिया गया। लखनऊ में पार्टी के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे और संभल के सांसद जिया उर्र रहमान को उनके घरों में नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया। दिल्ली से बरेली आ रहे सांसद हरेंद्र मलिक, इकरा हसन और मोहिबुल्लाह नदवी को भी गाजियाबाद बॉर्डर से आगे नहीं जाने दिया गया।
भाजपा की प्रतिक्रिया
सपा के प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “सपा बहादुर श्री अखिलेश यादव का बरेली में प्रतिनिधिमंडल भेजना नौटंकी और बचकाना कदम है। सपा की पहचान मुस्लिम तुष्टिकरण (मुस्लिमों को खुश करने की राजनीति) की गंदी राजनीति से है।”
बरेली हिंसा पर अब तक की कार्रवाई
बरेली में 26 सितंबर 2025 को जुमे की नमाज के बाद ‘I Love Muhammad’ पोस्टर को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद हिंसा फैल गई थी। शहर में अब भी इंटरनेट सेवा बंद है। इस मामले में अब तक 10 FIR दर्ज हो चुकी हैं और 81 लोग जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस ने 200 नामजद आरोपितों समेत करीब 2500 लोगों पर कार्रवाई की बात कही है। पुलिस अब भी इलाके में कड़ी निगरानी रखे हुए है

