पत्रकार जाकिर अली त्यागी का एक्स पर पोस्ट
इस संबंध में खुलासा एक यूट्यूबर जाकिर अली त्यागी के एक्स पोस्ट से हुआ। जाकिर अली ने एक्स पर तेजस्वी यादव को टैग करते हुए एक पोस्ट में लिखा, “आपकी पार्टी ने जिन लोगों को सोशल मीडिया (खासकर यूट्यूब) पर पार्टी के समर्थन में माहौल बनाने व बनवाने की जिम्मेदारी सौंपी थी, उन्होंने दर्जनों बार दिल्ली के यूट्यूबर्स के साथ मीटिंग की और ट्रको में भर-भर कर बिहार ले गए, उन यूट्यूबर्स से रात दिन कमर तोड़ मेहनत कराई और उनसे पूरा काम लिया।”
जाकिर अली ने आगे लिखा, “जब मेहनतकश यूट्यूबर्स को पेमेंट देने का वक्त आया तो उनसे बिचौलियों ने साफ कह दिया कि पार्टी से पैसा नही मिला, पार्टी ने जिन बिचौलियों को पूरे कैंपेन की कमान सौंपी वो यूट्यूबर्स का पूरा हिस्सा खाकर चुनाव के बीच ही क्रेटा व ब्रेज्जा जैसी नई गाड़ियाँ निकालते रहें, कुछ यूट्यूबर्स का पेमेंट भी किया तो उनसे साइड से 15-20% पेमेंट पकड़ते रहे।”

अपनी पोस्ट में जाकिर ने लिखा है, “संजय यादव जी बहुत मेहनती इंसान है उन पर किसी भी तरह का शक नही किया जा सकता लेकिन उनके दफ्तर से जुड़े लोग ही उनके साथ विश्वाशघात करते रहे जिसका अंदाजा संजय जी को अभी भी नही हुआ है कि कैसे उनके भरोसेमंद लड़कों ने ही उनके भरोसे को लूटा है, कैसे उनके भरोसेमंद लड़कों ने मेहनतकश यूट्यूबर्स के साथ छल किया है उन्हें ठगा हैं।”
जाकिर ने आगे लिखा, “पार्टी से जुड़े हुए कुछ लड़कों ने इस चुनाव को अवसर में तब्दील किया और मोटी कमाई करने में कोई कसर नही छोड़ी! अब तेजस्वी और संजय जी को ऐसे लड़कों को पकड़ने की जरूरत है जिन्होंने न सिर्फ यूट्यूबर्स बल्कि पार्टी के साथ भी धोखा किया है और उसको चुनावी नही बल्कि छवि को भी धूमिल करने का काम किया है,यूट्यूबर्स परेशान है बेहतर होगा कि उन लड़कों से उनके पैसे वसूल कर उन्हें सौंप दिए जाएँ।”
RJD का ऑनलाइन कैंपेन और यूट्यूबर्स के साथ विश्वासघात
इस खुलासे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या सोशल मीडिया पर अचानक बढ़ी हुई एक्टिविटी और राजनीतिक नैरेटिव सिर्फ एक योजनाबद्ध ऑनलाइन कैंपेन का हिस्सा था? अपने ट्वीट में जाकिर ने संकेत दिया कि यह पूरा खेल अचानक नहीं हुआ था, बल्कि लंबे समय से विपक्ष ऑनलाइन प्रचार के लिए कुछ खास इन्फ्लुएंसर्स पर भरोसा कर रहा था।
दिलचस्प बात ये है एक तरफ ये खुलासा हुआ है और दूसरी तरफ ये देखने को मिल रहा है कि रवीश कुमार और अजीत अंजुम जैसे पत्रकार इन दिनों बिहार नतीजों पर शांत बैठे है। वरना इन्हीं लोगों को आम दिनों में आप या तो कॉन्ग्रेस जैसी पार्टियों का बचाव करते हुए देखते हैं।

