नक्सल मुक्त हुआ बिहार, आखिरी कुख्यात माओवादी सुरेश कोड़ा ने किया सरेंडर: AK-47 और इंसास रायफल बरामद, ₹3 लाख का था ईनाम


बिहार में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी कामयाबी मिली है। 3 लाख रुपए के इनामी और 25 साल से फरार कुख्यात नक्सली सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम ने बिहार STF और मुंगेर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सल मुक्त बनाने की सरकार की मुहिम में बिहार नक्सल मुक्त हो चुका है।

उसके पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें 2 इंसास, 1 AK-47, 1 AK-56 रायफल, 10 मैगजीन और 505 कारतूस शामिल हैं। सुरेश कोड़ा मुंगेर, लखीसराय, जमुई और झारखंड से सटे इलाकों में सक्रिय था और वह बिहार के जेबी जोन का सबसे बड़ा नक्सली कमांडर माना जाता था।

25 साल से फरार सुरेश कोड़ा और उसके अपराध

सुरेश कोड़ा लंबे समय से फरार था और उस पर करीब 60 आपराधिक मामलों में आरोप हैं। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, लेवी वसूली और सुरक्षा बलों पर हमले के आरोप दर्ज हैं।

2018 में उसने SSB जवान की हत्या की थी और 8 मजदूरों का अपहरण किया था। 2022 में नक्सल विरोधी अभियान में लगे जवानों पर गोलीबारी का भी आरोप उस पर है। इसके अलावा कई जनप्रतिनिधियों की हत्या में भी सुरेश कोड़ा शामिल था। इसके कारण इलाके में सुरक्षा स्थिति लंबे समय तक तनावपूर्ण रही।

सरेंडर और सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी

सरेंडर के दौरान सुरेश कोड़ा ने हथियारों और गोला-बारूद के साथ आत्मसमर्पण किया। पुलिस ने बताया कि उसे 3 लाख रुपए का इनाम और 5 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

इसके अलावा उसे 36 माह तक रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण भत्ता मिलेगा, जिसमें हर महीने 10,000 रुपए का भुगतान होगा। हथियारों के प्रत्यर्पण पर 71,515 रुपए की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।

सुरेश कोड़ा के सरेंडर को मुंगेर, लखीसराय, जमुई और झारखंड से सटे इलाकों में नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। यह कदम बिहार को 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बनाने की केंद्र सरकार की मुहिम में महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। सुरेश कोड़ा का सरेंडर इलाके में शांति बहाल करने और नक्सली गतिविधियों को कम करने के लिए सुरक्षा बलों की कड़ी मेहनत का नतीजा है।

Bihar Naxalite Suresh Koda surrenders with weapons after 25 years on the run