नीतीश कुमार या तेजस्वी यादव… कौन जा रहा राज्यसभा? : जानिए बिहार में कैसे शुरू हुई दोनों नामों पर ‘चर्चा’, कार्यकर्ताओं ने दी क्या प्रतिक्रिया

बिहार की राजनीति में इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। सियासी गलियारों में लगातार ऐसी चर्चाएँ तैर रही हैं, जिनसे सत्ता और विपक्ष- दोनों खेमों में बेचैनी बढ़ी हुई है। चर्चा की शुरुआत उस समय हुई जब यह खबर फैली कि बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव राज्यसभा के लिए नामांकन भर सकते हैं। इसके तुरंत बाद एक और अटकल ने जोर पकड़ लिया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जा सकते हैं।

हालाँकि इन दोनों चर्चाओं के बीच सभी लोग सिर्फ राज्यसभा नामांकन की प्रक्रिया पर नजर टिकाए हुए हैं। माना जा रहा है कि नामांकन के बाद दोनों ओर की तस्वीर साफ होगी। इन चर्चाओं का असर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं पर साफ दिखाई दे रहा है। जहाँ राजद के कार्यकर्ताओं में इस संभावना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है, वहीं जदयू खेमे से भावुक प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।

रोने लगे जदयू कार्यकर्ता

पटना में मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में जदयू कार्यकर्ता जुट गए। कई समर्थक भावुक होकर रोते हुए भी दिखाई दिए। जदयू नेता राजीव रंजन पटेल तो कैमरे के सामने ही फूट-फूटकर रो पड़े। भावुक समर्थकों ने यहाँ तक कहा कि “हमारी होली खराब हो गई है, हमें नीतीश कुमार के अलावा कोई और मुख्यमंत्री मंजूर नहीं।”

सबसे पहले उड़ी तेजस्वी यादव के नाम की चर्चा

दूसरी ओर, महागठबंधन में तेजस्वी यादव के संभावित नामांकन को एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि राज्यसभा में अपनी सीट सुरक्षित करने के लिए विपक्ष यह दांव चल सकता है।

महागठबंधन के पास राजद, कॉन्ग्रेस और अन्य मिलाकर कुल 35 विधायकों का समर्थन है। इसके अलावा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी और बसपा से भी समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में अगर तेजस्वी यादव मैदान में उतरते हैं, तो एनडीए के लिए सेंधमारी करना लगभग असंभव हो जाएगा और चुनाव निर्विरोध होने की संभावना भी बढ़ सकती है।

क्यों उठी ये दोनों चर्चाएँ और क्या है रणनीति?

सियासी गलियारों में चर्चा है कि ये अफवाहें अकारण नहीं हैं। दरअसल, दोनों ही खेमे अपनी-अपनी सीटें बचाने और निर्विरोध निर्वाचन सुनिश्चित करने की जुगत में हैं। विपक्ष को डर है कि अगर तेजस्वी जैसा मजबूत चेहरा नहीं हुआ, तो एनडीए धनबल के जरिए खेल बिगाड़ सकता है। वहीं, नीतीश कुमार को लेकर उठ रही चर्चाओं को उनके समर्थक ‘अपनों की ही साजिश’ बता रहे हैं, लेकिन नीतीश कुमार ने एक सोशल मीडिया पोस्ट मे राज्यसभा जाने की इच्छा जताई है। उनके कार्यकर्ताओं का इसपर कहना है कि अगर भेजना ही है, तो नीतीश जी के बेटे निशांत कुमार को भेज दीजिए, लेकिन बिहार की बागडोर किसी और को न सौंपें।