NDTV से आपबीती बताते हुए उन्होंने कहा, “उसका जला हुआ शरीर बाहर छोड़ दिया गया। उन्होंने जले हुए धड़ और सिर को बाहर बाँध दिया। यह बहुत भयानक था।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की निंदा के बावजूद अब तक उन्हें किसी तरह का ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक दीपु चंद्र दास मयमनसिंह की एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था। गुरुवार रात उस पर कथित तौर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया, जिसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला।
हत्या के बाद शव को पेड़ से बाँधकर आग लगा दी गई और मौके पर मौजूद कई लोग इस बर्बरता का जश्न मनाते दिखे। इस मामले में अब तक कम से कम सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने घटना की निंदा करते हुए कार्रवाई के आदेश दिए हैं, बावजूद इसके इस निर्मम घटना के बाद अल्पसंख्यक समुदाय में डर का माहौल बना हुआ है।
हादी की मौत के बाद उग्र प्रदर्शन, कट्टरपंथियों पर आरोप
यह घटना ऐसे समय हुई है, जब कट्टरपंथी नेता उस्मान शरीफ हादी की मौत के बाद बांग्लादेश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। शेख हसीना की सरकार में पूर्व सांसद और पूर्व सूचना मंत्री रहे मोहम्मद अली आराफात ने आरोप लगाया है कि इन प्रदर्शनों की आड़ में कट्टरपंथी और जिहादी ताकतें सड़कों पर उतर आई हैं।
Hadi’s supporters held a sit-in at Shahbagh on Friday (19 December) demanding justice for the murder of Sharif Osman Hadi. The program later turned into a gathering dominated by jihadist and radical Islamist elements, with leaders such as Jasimuddin Rahmani and Ataur Rahman… pic.twitter.com/aMijTFdoLY
— Mohammad Ali Arafat (@MAarafat71) December 19, 2025
उनका दावा है कि शाहबाग में हुए प्रदर्शन में अल-कायदा से जुड़े संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के प्रमुख जशीमुद्दीन रहमानी सहित कई कट्टरपंथी नेता मौजूद थे, जिन्होंने भड़काऊ भाषण दिए। आराफात ने यह भी आरोप लगाया कि ढाका के धानमंडी-32 स्थित ऐतिहासिक संरचना पर हमला करने वाली भीड़ ISIS के झंडे लहरा रही थी।

