BSF पर नजर और 10 मिनट में ‘खेला’… बांग्लादेशी घुसपैठियों ने बताया कैसे करते थे बॉर्डर पार कर बंगाल में एंट्री, कहा- TMC से मिलती थी मदद

पश्चिम बंगाल में सीएम शुभेंदु की सरकार लगातार बांग्लादेशी घुसपैठियों पर नकेल कसने की कार्रवाई कर रही है। सरकार ने ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ की नीति अपनाई है। इसके तहत कई जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं। साथ ही इनकी आवाजाही रोकने के लिए BSF को भी बाड़बंदी के लिए 143 एकड़ जमीन दे दी गई है।

इस डर से बांग्लादेशी घुसपैठिए खुद ही भागने की तैयारी में हैं। कई तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं जिनमें वर्षों से रह रहे घुसपैठिए वापस बांग्लादेश लौट रहे हैं। मीडिया से बातचीत में ये लोग याद कर रहे हैं कि कैसे भारत में घुसे और अवैध दस्तावेज बनाकर यही रहने लगे।

किसी ने बताया कि वो नदियाँ पार करके भारत आए तो किसी ने कहा कि दलालों ने अँधेरे का फायदा उठाकर सीमा पार करने में मदद की। बांग्लादेश के कुश्तिया जिले के रहने वाले के एक कारपेंटर ने बताया कि उसने ₹7-8 हजार दलाल को दिए, जो BSF के जवानों की गश्त पर नजर रखता था, उसने ही गश्त के बीच के गैप में भारत में घुसाया। वहं बेंगलुरु में मजदूरी करने वाले एक बांग्लादेशी ने कहा कि वह ₹20 हजार देकर कई बार बॉर्डर आर-पार कर चुका है।

केरल में काम कर रहे एक बांग्लादेशी ने बताया कि BSF पर नजर रखने वाली 5 से 6 टीमे हैं। उसने बताया कि कभी-कभी बॉर्डर पार करने के लिए पूरी रात इंतजार करना होता है तो कभी 10 मिनट भी नहीं लगते। उसने बताया कि आधार कार्ड बनाने के लिए भी सिर्फ ₹2-3 हजार में बनाकर दे दिए जाते हैं।

वहीं एक ने बताया कि उसे वोटर कार्ड और राशन कार्ड तब मिले जब ममता बनर्जी की बंगाल में सरकार थी। उसने कहा कि TMC ने ही उसको दस्तावेज बनाने में मदद की, इसके बाद लक्ष्मी भंडार का भी उसे लाभ मिला।

कुछ बांग्लादेशियों ने बंगाल में बदली सरकार के बाद का परिवर्तन भी बताया। एक बांग्लादेश ने कहा कि TMC सरकार में कोई कुछ भी नहीं कहता था, लेकिन अब उने मकान मालिक भी बांग्लादेशियों को किराए पर मकान देने से डरने लगे हैं कि अगर ऐसा करेंगे तो ₹2 लाख का जुर्माना या फिर जेल भी हो सकती है।