बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति साफ कर दी है। मायावती ने घोषणा की है कि बसपा किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और अकेले चुनाव लड़ेगी। मायावती ने गठबंधन की चर्चाओं को विरोधियों की ‘साजिश’ और ‘फेक न्यूज’ बताया है।
इसी के साथ मायावती ने दिल्ली में आवंटित टाइप-8 सरकारी बंगले पर उठ रहे सवालों पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बंगला उन्हें किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और प्रोटोकॉल की जरूरतों को देखते हुए मिला है। मायावती ने अपनी जान को खतरे का हवाला देते हुए 29 साल पुराने ‘गेस्ट हाउस कांड’ को याद किया।
क्या था वह ‘गेस्ट हाउस कांड’?
2 जून, 1995 को सपा कार्यकर्ताओं और विधायकों ने स्टेट गेस्ट हाउस में मायावती पर हमला बोल दिया था और यह भारतीय राजनीति के इतिहास का सबसे शर्मनाक अध्याय माना जाता है। उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बसपा की गठबंधन सरकार चल रही थी, लेकिन आपसी मनमुटाव के बाद मायावती ने मुलायम सिंह यादव की सरकार से समर्थन वापसी का ऐलान कर दिया।
यह खबर सुनते ही सपा कार्यकर्ता और विधायक बेकाबू हो गए थे और भारी भीड़ के साथ लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस पर हमला बोल दिया था। उस समय मायावती कमरा नंबर-1 में अपने विधायकों के साथ बैठक कर रही थीं। गुस्साई सपा भीड़ ने गेस्ट हाउस को चारों तरफ से घेर लिया था। हमलावरों ने न केवल गालियाँ दीं, बल्कि गेस्ट हाउस की बिजली और पानी की सप्लाई भी काट दी। मायावती को निशाना बनाने की कोशिश की गई और उनके साथ अभद्रता की गई। अपनी जान बचाने के लिए मायावती ने खुद को कमरे के अंदर बंद कर लिया।
इस दौरान हमलावरों ने बसपा विधायकों को घसीटा और कइयों से कोरे कागजों पर जबरन दस्तखत करवाए। वहाँ मौजूद पुलिस-प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। घंटों तक चले इस खौफनाक मंजर के बाद, भाजपा नेताओं और केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद सुरक्षा बल वहाँ पहुँचे और मायावती को सुरक्षित बाहर निकाला गया। गेस्ट हाउस कांड वही घटना थी जिसने मायावती और मुलायम सिंह यादव को हमेशा के लिए जानी दुश्मन बना दिया था।
मायावती का तर्क है कि इस जानलेवा हमले के बाद से उनकी सुरक्षा का खतरा कभी कम नहीं हुआ। इसलिए उन्होंने साफ कहा है कि उनकी सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर घिनौनी राजनीति नहीं होनी चाहिए। 2027 के लिए मायावती ने कार्यकर्ताओं को ‘हाथी की मस्त चाल’ चलते हुए 2007 की तरह पूर्ण बहुमत लाने का मंत्र दिया है।

