35000+ गिरफ्तार, 83 करोड़ की संपत्ति जब्त और 10 साल की सजा: CM योगी का गो-तस्करों पर कड़ा प्रहार, NSA और गैंगस्टर एक्ट से हुआ अपराधियों में कानून का खौफ

उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस एक मुद्दे पर सबसे कड़ा रुख अपनाया, वह था गोवंश की सुरक्षा और गोकशी पर लगाम। सरकार ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए गो-तस्करों और अवैध कटान करने वालों के खिलाफ एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिससे बच निकलना अब नामुमकिन है। ताजा आँकड़ों के मुताबिक, यूपी पुलिस ने अब तक गोकशी और तस्करी के आरोप में 35,924 आरोपितों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

योगी सरकार का मानना है कि गोवंश का संरक्षण केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और ग्रामीण उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। इसी सोच के साथ अपराधियों के पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए राज्य में ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है।

तस्करों पर कसा शिकंजा: 14 हजार से ज्यादा मुकदमे दर्ज

गो-तस्करी के खेल को पूरी तरह खत्म करने के लिए यूपी सरकार ने विशेष अभियान चलाकर इनके संगठित गिरोहों पर शिकंजा कसा है। अब तक प्रदेश के अलग-अलग जिलों में गोकशी और तस्करी से जुड़े 14,182 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि कोई भी छोटा या बड़ा अपराधी कानून की पकड़ से बाहर न रहे। इसके लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन को खुली छूट दी गई है, जिसका नतीजा व्यापक स्तर पर हुई गिरफ्तारियों के रूप में सामने आया है।

NSA और गैंगस्टर एक्ट: अपराधियों में कानून का खौफ

महज जेल भेजना ही योगी सरकार का मकसद नहीं था, बल्कि अपराधियों के मन में ऐसा खौफ पैदा करना था कि वे दोबारा इस अपराध के बारे में सोच भी न सकें। इसके लिए सरकार ने कड़े कानूनों का सहारा लिया है।

गिरफ्तार किए गए शातिर अपराधियों में से 178 आरोपियों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाया गया है। गोकशी के 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। साथ ही, 13,793 आरोपितों पर गुंडा एक्ट लगाकर उन्हें समाज से अलग-थलग करने का काम किया गया है। इन कार्रवाइयों ने संगठित गिरोहों के हौसले पस्त कर दिए हैं और उनके पुराने नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।

आर्थिक प्रहार: 83 करोड़ की काली कमाई जब्त

योगी सरकार का एक बहुत प्रभावी कदम अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ना रहा है। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) का इस्तेमाल करते हुए पुलिस ने अब तक गो-तस्करों की करीब 83 करोड़ 32 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की है।

इसमें अपराध की कमाई से खरीदे गए आलीशान घर, महंगी गाड़ियाँ और जमीनें शामिल हैं। सरकार का संदेश साफ है- अगर अपराध से संपत्ति बनाई, तो उसे सरकार कुर्क (Seize) कर लेगी। इससे अपराधियों की आर्थिक ताकत खत्म हो गई है, जिससे वे भविष्य में नए गिरोह बनाने में असमर्थ हो रहे हैं।

स्पेशल टीमें और आधुनिक निगरानी

गोकशी को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने विशेष कार्यबलों (Task Forces) का गठन किया है। ये टीमें न केवल खुफिया जानकारी जुटाती हैं, बल्कि संवेदनशील जिलों और राज्य की सीमाओं पर रात के समय सघन गश्त भी करती हैं।

पशुओं को ले जाने वाले हर संदिग्ध वाहन की बारीकी से चेकिंग की जा रही है। इसके अलावा, पूरे प्रदेश में अवैध बूचड़खानों को बंद कर दिया गया है, जिससे अवैध कटान की घटनाओं में भारी गिरावट आई है।

नया कानून: 10 साल की सजा और भारी जुर्माना

अपराधियों की रूह कपाने के लिए साल 2020 में उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश लाया गया, जिसने सजा के प्रावधानों को बेहद कड़ा बना दिया है। गोहत्या पर अब दोषी को सीधे 10 साल की कठोर जेल काटनी होगी और 3 से 5 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा।

यदि कोई गोवंश को घायल करता है या उसे शारीरिक नुकसान पहुँचाता है, तो उसे 7 साल की जेल और 3 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। योगी सरकार की यह चौतरफा घेराबंदी यह साबित करती है कि उत्तर प्रदेश में अब गोवंश के साथ खिलवाड़ करने वालों की जगह केवल जेल की कालकोठरी में है। सरकार के इन प्रयासों से न केवल अपराध कम हुआ है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों का भरोसा भी बढ़ा है।