देश में जिस तरह से कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों के बाद माहौल खराब होता दिख रहा है, उस बीच ही हिंसा भड़काने की साजिशों को सुरक्षाबलों ने नाकाम किया है। सुरक्षा टीमों ने भारत-नेपाल सीमा पर एक बड़ी कामयाबी हासिल की। बहराइच जिले में सशस्त्र सीमा बल की 42वीं बटालियन और स्थानीय पुलिस ने 22 जुलाई को रूपईडीहा बॉर्डर से एक गुप्त सूचना के आधार पर यह बड़ी कार्रवाई की।
टीमों ने खालिस्तानी अलगाववादी संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के वांटेड अभियुक्त बिक्रमजीत सिंह और बिना वीजा भारत में घुसने की कोशिश कर रहे एक सिख अमेरिकी नागरिक मनबीर सिंह ढिल्लों को गिरफ्तार किया है।
इसके साथ ही इस अवैध घुसपैठ में मदद करने वाले 3 स्थानीय तस्करों समेत कुल 5 आरोपितों को दबोचा गया है। आशंका जताई जा रही है कि आरोपित देश के माहौल का फायदा उठाकर मौका देख हिंसा फैलाने की नीयत से घुसपैठ कर रहे थे।
#WATCH | Bahraich, Uttar Pradesh: SP Bahraich, Vishwajeet Srivastava says, "Two people named Vikramjeet Singh and Manveer Singh were infiltrators. They were arrested… The three people who were helping them were also arrested. The main reason for their arrest was that these… pic.twitter.com/VO9tX6SFbs
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) July 23, 2026
फर्जी पहचान पत्र के सहारे नेपाल में छिपा था वांटेड बिक्रमजीत
पकड़ा गया मुख्य आरोपित बिक्रमजीत सिंह पंजाब के रूपनगर का रहने वाला है। वह खालिस्तानी अलगाववादी संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ का एक सक्रिय सदस्य है। बिक्रमजीत फरवरी 2023 में पंजाब के अजनाला पुलिस स्टेशन पर हुई भीषण हिंसा और हत्या के प्रयास (धारा 307) के मामले में लंबे समय से वांछित चल रहा था।
पंजाब पुलिस ने उसके खिलाफ कोर्ट से वारंट जारी किया था। वह अपनी पहचान बदलकर और जाली दस्तावेजों के सहारे नेपाल के काठमांडू में छिपा हुआ था। बहराइच के SP विश्वजीत श्रीवास्तव के अनुसार, बिक्रमजीत फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर भारत में घुसने की कोशिश कर रहा था।
उसके साथ पकड़ा गया दूसरा आरोपित मनबीर सिंह ढिल्लों पंजाब के मोगा का मूल निवासी है, लेकिन वर्तमान में उसके पास अमेरिकी नागरिकता है। मनबीर के पास भारत का कोई वैध वीजा नहीं था और बिक्रमजीत उसे अवैध चोर रास्तों से सीमा पार करा रहा था।
मनबीर के साथ उसकी पत्नी राइलीन अलेक्जेंडर ढिल्लों और 8 महीने की मासूम बेटी भी थी। हालाँकि, उनकी पत्नी और बच्चे के कागजात सही पाए जाने पर उन्हें इमीग्रेशन नियमों के तहत भारत में प्रवेश दे दिया गया।
स्थानीय तस्करों का फैला नेटवर्क
इस पूरी अवैध घुसपैठ को अंजाम देने में मदद करने वाले तीन स्थानीय तस्करों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए सहयोगियों की पहचान सुरेश कुमार पाठक, दिलीप उपाध्याय और ड्राइवर राहुल कुमार के रूप में हुई है।
जाँच में सामने आया कि पीलीभीत के पूरनपुर का रहने वाला ‘योग’ नाम का व्यक्ति इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। वही इन आरोपितों की लगातार मदद कर रहा था और उसी ने सीमा पार कराने का पूरा खाका तैयार किया था।
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से कई जाली कागजात और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। इस बरामदगी के आधार पर संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल एसएसबी, स्थानीय पुलिस, आईबी (IB), एसओजी (SOG) और इमिग्रेशन विभाग की संयुक्त टीमें हिरासत में लिए गए सभी पाँचों आरोपितों से कड़ी पूछताछ कर रही हैं।
पंजाब पुलिस को इस कार्रवाई की पूरी जानकारी दे दी गई है, जो बहराइच पहुँचकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी। वहीं केंद्रीय एजेंसियाँ इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं।
जानें वारिस पंजाब दे की कहानी
‘वारिस पंजाब दे’ संगठन की शुरुआत दिवंगत पंजाबी अभिनेता और खालिस्तानी समर्थक दीप सिद्धू ने की थी, जिसकी एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। दीप सिद्धू किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली के लालकिले पर हुई हिंसा में भी आरोपित था। उसके जाने के बाद इस संगठन की कमान अमृतसर के जल्लूपुर खेड़ा गाँव के रहने वाले अमृतपाल सिंह ने संभाली।
वर्ष 2012 में काम के सिलसिले में दुबई गया अमृतपाल जब भारत लौटा तो खुद को इस संगठन का प्रमुख घोषित कर दिया। जरनैल सिंह भिंडरांवाले की विचारधारा से प्रभावित अमृतपाल सिंह एक स्वघोषित खालिस्तानी समर्थक है, जो अलग सिख राज्य की माँग को लेकर अक्सर भड़काऊ बयानबाजी करता रहता है।
संगठन का प्रमुख बनने के बाद अमृतपाल सिंह ने सिख धर्म के प्रचार-प्रसार करने की आड़ में धार्मिक भावनाओं को भड़काकर अपना आधार मजबूत करने और अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा देने का काम करता रहा है।

