दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में 20 जुलाई 2026 को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर चले प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की जाँच में बड़े खुलासे सामने आए हैं।
पुलिस के हवाले से खबरों में बताया जा रहा है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, जिनमें से 989 लोगों पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, लूट, दुष्कर्म, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध, आर्म्स एक्ट, अपहरण, स्नैचिंग और NDPS जैसे गंभीर मामलों में केस दर्ज हैं।
Delhi Police Sources say, "The Delhi Police alleges 2873 men with criminal antecedents were present at the protest site between July 20th and July 25th. These criminals have been identified using the Facial Recognition System and through technical means. Police are investigating…
— ANI (@ANI) July 27, 2026
पुलिस का कहना है कि इन लोगों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS), सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों और आम लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो तथा अन्य तकनीकी माध्यमों से की गई है। जाँच में यह भी सामने आया कि कई आरोपित 20 से 25 जुलाई के बीच बार-बार प्रदर्शन स्थल पर लौटे।
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या इन्हीं लोगों ने जंतर-मंतर और नई दिल्ली के आसपास हुई हिंसा में सक्रिय भूमिका निभाई थी। पुलिस के मुताबिक, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी और जाँच की कार्रवाई जारी रहेगी, जबकि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की तैयारी है।
प्रदर्शन में मिले हत्या, डकैती, दुष्कर्म और पॉक्सो समेत कई गंभीर मामलों के आरोपित
दिल्ली पुलिस की जाँच के अनुसार, हिंसा में शामिल लोगों में 101 ऐसे आरोपित पाए गए जिन पर हत्या के मामले दर्ज हैं, जबकि 62 लोगों पर हत्या के प्रयास, 284 लोगों पर डकैती और लूट, 61 लोगों पर दुष्कर्म, 25 लोगों पर छेड़छाड़, 6 लोगों पर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं।
इसके अलावा 229 लोग आर्म्स एक्ट, 135 स्नैचिंग, 19 अपहरण और 67 लोग नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के मामलों में आरोपित पाए गए। पुलिस के अनुसार, इन आरोपितों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जो आदतन अपराधी हैं। हत्या के मामलों में शामिल 101 आरोपितों में से 42 पर दो या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
वहीं 12 लोगों का आपराधिक इतिहास 10 या उससे अधिक मामलों तक फैला हुआ है। हत्या के प्रयास के 62 आरोपितों में से 25 पर कई मामले दर्ज हैं। वहीं डकैती और लूट के 284 आरोपितों में से 155 पर दो या उससे अधिक केस हैं और 31 लोगों के खिलाफ 10 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दुष्कर्म के मामलों में शामिल 8 आरोपित, छेड़छाड़ के 6 आरोपित और NDPS के 9 आरोपित भी कई मामलों में पहले से आरोपित हैं।
FRS, CCTV और तकनीकी साक्ष्यों से हुई पहचान, पुलिस ने हिंसा में भूमिका की जाँच तेज की
दिल्ली पुलिस का कहना है कि संदिग्धों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों, सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो और आम नागरिकों के वीडियो के आधार पर की गई। जाँच में कई संदिग्ध उन स्थानों पर दिखाई दिए, जहाँ हिंसा हुई थी।
पुलिस के अनुसार, ये लोग पथराव करते, पुलिसकर्मियों पर हमला करते, सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाते और सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ करते नजर आए। जाँच से स्पष्ट हुआ कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों में केवल ऐसे व्यक्ति नहीं थे जिनका एक-दो मामलों से संबंध रहा हो, बल्कि बड़ी संख्या में आदतन और बार-बार अपराध करने वाले लोग भी मौजूद थे।
जंतर-मंतर तक ही थी अनुमति, संसद मार्च पर नहीं: चेतावनी के बाद हुआ बल प्रयोग
पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को केवल जंतर-मंतर पर धरना देने की अनुमति दी थी, जबकि संसद तक मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ते हुए संसद के बेहद करीब तक पहुँच गए, जिससे संसद की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव की स्थिति पैदा हो गई।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि बल प्रयोग बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद ही किया गया, क्योंकि प्रदर्शनकारी लगातार एक के बाद एक बैरिकेड तोड़ते रहे। पुलिस के मुताबिक, हिंसा के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों सहित अनेक पुलिसकर्मी घायल हुए, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने काफी देर तक संयम बरता।
घटना के बाद पूरे घटनाक्रम की समीक्षा शुरू की गई, जिसमें उन असामाजिक तत्वों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है, जो पुलिस के अनुसार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बीच घुसकर हिंसा में शामिल हुए।

