फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के 10 से ज्यादा छात्र-स्टाफ लापता, दिल्ली धमाके की जाँच में खुलासा: ‘वॉइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ से जुड़ने की आशंका

दिल्ली लाल किला ब्लास्ट के बाद फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से 10 से ज्यादा छात्र और स्टाफ अचानक गायब हो गए हैं। गायब लोगों में 3 कश्मीरी भी शामिल हैं। इनके फोन स्विच ऑफ हैं और जाँच एजेंसियाँ इन्हें ट्रैक कर रही हैं। आशंका है कि ये लोग ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का हिस्सा हो सकते हैं।

जाँच में पता चला कि अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कई डॉक्टर जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद जैसे आतंकी संगठनों से लिंक रखते हैं। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस इनकी तलाश में जुटी है। एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी से गायब लोगों की पूरी लिस्ट ले ली है। ये लोग दिल्ली ब्लास्ट के बाद से किसी भी तरह से संपर्क में नहीं हैं।

इस बीच प्रवर्तन निर्देशालय (ED) ने यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार कर लिया है। ED ने अदालत को बताया कि सिद्दीकी के परिवार के कई करीबी खाड़ी देशों में बसे हैं, इसलिए वो भारत से भाग सकता था। यूनिवर्सिटी ने फर्जी NAAC-UGC मान्यता दिखाकर छात्रों से 415 करोड़ रुपये से ज्यादा की धाँधली की। 2014-15 से 2024-25 तक करोड़ों की आय दिखाई गई, जिसमें वॉलंटरी कंट्रीब्यूशन और फर्जी रेवेन्यू शामिल हैं। ED की रेड में 48 लाख कैश, डिजिटल डिवाइस और कई शेल कंपनियाँ पकड़ी गईं।

साकेत कोर्ट ने सिद्दीकी को 13 दिन की ED रिमांड पर भेज दिया है। ED का कहना है कि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी पर सिद्दीकी का पूरा कंट्रोल था, ठेके भी अपनी पत्नी-बच्चों की कंपनियों को दिए जाते थे। जांच में पता चला कि यूनिवर्सिटी ने छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर पैसे कमाए। दिल्ली पुलिस की FIR के आधार पर ED ने PMLA के तहत केस दर्ज किया है।

यूनिवर्सिटी पहले से ही जाँच के घेरे में थी क्योंकि धमाके में शामिल डॉक्टर उमर नबी, मुजम्मिल गनी, शाहीन सईद जैसे लोग यहाँ काम करते थे या पढ़े थे। NIA ने भी कई गिरफ्तारियाँ की हैं। ED की पूछताछ से टेरर फंडिंग के कई राज खुल सकते हैं।

बता दें कि दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार बम धमाके में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं। धमाके वाली ह्यूंदै i20 कार पुलवामा के डॉक्टर मोहम्मद उमर (उर्फ उमर नबी) चला रहा था, जो फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था। जाँच में पता चला कि यूनिवर्सिटी से जुड़े कई डॉक्टर जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद जैसे आतंकी संगठनों से लिंक रखते थे।