‘धुरंधर’ की रिलीज के बाद फिर चर्चा में आए जांबाज मोहित शर्मा, जानें कैसे मेजर ने इफ्तिखार भट्ट बन हिजबुल मुजाहिद्दीन में घुसपैठ की और ठोक दिए आतंकी

फिल्म ‘धुरंधर’ की रिलीज के बाद एक बार भारतीय सेना के जांबाज मेजर मोहित शर्मा को लेकर चर्चा हो रही है। इस फिल्म का ट्रेलर आने के बाद से ही अटकलें लगनीं शुरू हो गई थीं कि यह फिल्म असल में मेजर मोहित शर्मा के जीवन पर आधारित है। अटकलें तेज हो गईं कि रणवीर सिंह उनका किरदार निभा रहे हैं।

बढ़ती चर्चाओं के बीच निर्देशक आदित्य धर ने स्पष्ट किया कि न तो फिल्म मेजर मोहित शर्मा की जिंदगी पर आधारित है और न ही रणवीर उनका रोल निभा रहे हैं। ट्रेलर से लगी अटकलों पर उनका यह बयान मोहित शर्मा से जुड़ी अटकलों पर विराम लगाने वाला था।

रणवीर के कैरेक्टर पर सस्पेंस

फिल्म धुरंधर का ट्रेलर रिलीज होते ही इसके प्लॉट और किरदारों को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई। ट्रेलर में आर माधवन, संजय दत्त, अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल जैसे कलाकारों के किरदारों की जानकारी थी लेकिन रणवीर सिंह के रोल की जानकारी ना देकर फिल्म का सस्पेंस रखा गया। जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर चर्चा होने लगी की शायद उनका किरदार मेजर मोहित शर्मा से प्रेरित हो सकता है।

मामला तब और दिलचस्प हो गया जब मेजर मोहित शर्मा के भाई मधुर शर्मा ने एक्स पर एक पोस्ट कर बायता। उन्होंने लिखा कि उनके माता-पिता इस पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं कि फिल्म उनके बेटे की जिंदगी पर आधारित है या नहीं। इसी पोस्ट के बाद ही निर्देशक आदित्य धर ने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी थी।

आदित्य धर ने लिखा, “हमारी फिल्म धुरंधर बहादुर मेजर मोहित शर्मा AC(P) SM के जीवन पर आधारित नहीं है। यह एक आधिकारिक सफाई है।” उन्होंने आगे कहा कि यदि भविष्य में वे मेजर मोहित शर्मा पर कोई बायोपिक बनाएँगे, तो यह उनके परिवार की अनुमति और सहयोग से ही होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म के ट्रेलर में दिखाई गई रहस्यमयता केवल कहानी की रोचकता बनाए रखने के लिए है।

मेजर मोहित शर्मा की शौर्य गाथा

भारतीय सेना की पैरा स्पेशल फोर्स के कमांडो मेजर मोहित शर्मा अपने अदम्य साहस और अप्रतिम देशभक्ति के कारण आज भी हर भारतीय के दिल में बसते हैं। रोहतक में जन्मे इस वीर अधिकारी ने 2004 में ऐसा कारनामा किया जिसे भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे साहसी ‘अंडरकवर ऑपरेशनों’ में गिना जाता है।

पत्रकार शिव अरूर और राहुल सिंह की किताब ‘इंडिया द मोस्ट फीयरलेस 2’ के अनुसार, मेजर मोहित ने अपना हुलिया बदलकर, लंबी दाढ़ी-मूँछ रख लिया था और इफ्तिखार भट्ट के फर्जी नाम से हिजबुल मुजाहिदीन में घुसपैठ की थी।

उन्होंने अबू तोरारा और अबू सबजार जैसे दो खूँखार आतंकियों का विश्वास जीतने के लिए न सिर्फ अपनी पहचान के बारे में मनगढ़ंत कहानी गढ़ी बल्कि कई बार संदेह होने पर जान जोखिम में डालते हुए आतंकियों को चुनौती दी कि यदि शक है तो वह उन्हें गोली मार दें। यही साहस और सूझबूझ उन्हें आतंकियों के बीच गहराई तक ले गई।

मेजर शर्मा के इस ऑपरेशन में आतंकियों ने कई बार उनसे उनकी पहचान पूछी। लेकिन वह कहते, “मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। मुझको सीखना है।” तोरारा ने तो कई बार उनकी पहचान के बारे में उनसे पूछा। लेकिन आखिरकार वे मेजर शर्मा के जाल में फँस गए और मदद करने को राजी हो गए। आतंकियों ने उन्हें बताया कि वह कई हफ्तों तक अंडरग्राउंड रहेंगे और आतंंकी हमले के लिए मदद जुटाएँगे। किसी तरह मेजर ने उन्हें मना ही लिया कि वह तब तक घर नहीं लौटेंगे जब तक चेक प्वाइंट को उड़ा नहीं देते।

देखते ही देखते आने वाले दिनों में दोनों आतंकियों ने सब व्यवस्था कर ली। साथ ही, पास के ग्रामों से 3 आतंकियों को भी बुला लिया। जब तोरारा को दोबारा संदेह हुआ तो मेजर ने उससे कहा, “अगर मेरे बारे में कोई शक है तो मुझे मार दो।” अपने हाथ से राइफल छोड़ते हुए वह आतंकियों से बोले, “तुम ऐसा नहीं कर सकते, अगर तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं है। इसलिए तुम्हारे पास अब मुझे मारने के अलावा कोई चारा नहीं है।”

मेजर की बातें सुनकर दोनों आतंकी असमंजस में पड़ गए। इतने में मेजर मोहित शर्मा को मौका मिला और उन्होंने थोड़ी दूर जाकर अपनी 9 mm पिस्टल को लोड कर दोनों आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। उन्होंने दो गोलियाँ आतंकियों के छाती पर मारी और एक सिर में। इसके बाद वह उनके हथियार उठाकर भागकर नजदीक के आर्मी कैंप में गए। इस मिशन ने न सिर्फ दक्षिण कश्मीर में आतंकी नेटवर्क को गहरा झटका दिया बल्कि सेना की प्रतिष्ठा भी बढ़ाई।

इस ऑपरेशन के पाँच साल बाद 2009 में कुपवाड़ा के एक भीषण मुठभेड़ में मेजर मोहित शर्मा ने अपने साथियों को बचाते हुए मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके वीरतापूर्ण त्याग के सम्मान में उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

इसी बहादुर योद्धा की असाधारण कहानी को लेकर जब सोशल मीडिया पर फिल्म धुरंधर से जोड़कर अटकलें लगाई गईं, तो इसे लेकर गलतफहमियाँ पैदा हुई। अब आधिकारिक बयान के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है कि फिल्म का मेजर मोहित शर्मा की वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।