ईरान के हमले से भड़के डोनाल्ड ट्रंप, कहा- सीजफायर समझौता खत्म और ईरानी नेतृत्व ‘कचरा’: US ने 60+ ठिकानों को बनाया निशाना, बढ़े क्रूड ऑयल के दाम

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के कारण वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक संकट गहरा गया है। ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में कच्चे तेल के टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MOU) यानी सीजफायर समझौते को पूरी तरह खत्म घोषित कर दिया है।

अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘कचरा’ (स्कम) और ‘सनकी‘ करार दिया।

ईरानी नेतृत्व पर डोनाल्ड ट्रंप ने बोला तीखा हमला, बताया सनकी और कचरा

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “मेरे लिए यह समझौता खत्म हो चुका है। मैं उनके साथ कोई डील नहीं करना चाहता। वे कचरा हैं। वे बीमार लोग हैं और उनका नेतृत्व भी बीमार लोगों के हाथ में है। वे क्रूर और हिंसक लोग हैं। अगर उनके पास परमाणु हथियार होता, तो वे उसका इस्तेमाल कर चुके होते। जहाँ तक मेरा सवाल है, सब खत्म हो चुका है।”

ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या के बाद हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा, “हमने आश्वासन दिया था कि हम तनाव नहीं बढ़ाएँगे। हमने कहा था कि जाओ और अपना अंतिम संस्कार का काम पूरा करो, लेकिन इसके बजाय उन्होंने कल जहाजों पर रॉकेट दागने शुरू कर दिए। इसलिए हमने कल रात उन पर बहुत जोरदार हमला किया है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि वह ईरान की हिट लिस्ट में शामिल हैं और वे अमेरिकी नेता को निशाना बनाना चाहते हैं।

अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई के बाद लगाया ईरानी तेल पर बैन

इस बीच तनाव बढ़ने के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए, जिसमें ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की 60 से अधिक छोटी नावों को निशाना बनाया गया। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने के लिए दी गई विशेष छूट का लाइसेंस भी रद्द कर दिया है। अमेरिकी प्रतिबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उपजे इस युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तुरंत 5% का भारी उछाल देखा गया।

भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत की चिंताएँ काफी बढ़ गई हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 5% की यह तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है।

यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। तेल महँगा होने से माल ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन) की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों, सब्जियों और एफएमसीजी उत्पादों पर पड़ेगा और देश में महँगाई (Inflation) बढ़ सकती है। इसके अलावा भारी मात्रा में डॉलर खर्च होने से भारत का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा और भारतीय रुपए पर भी दबाव देखने को मिल सकता है। इससे पहले शांति स्थापित होने से भारत के पक्ष में फायदे ही फायदे दिख रहे थे, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।

ईरान का जवाबी पलटवार, कतर ने अपनाया कड़ा रुख

दूसरी ओर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले करने का दावा किया है। इस जवाबी कार्रवाई के बाद कुवैत ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जवाबी कदम उठाने की बात कही है।

कतर के प्रधानमंत्री के सलाहकार और आधिकारिक प्रवक्ता मजेद अल अंसारी ने एक्स पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि कतरी जहाज ‘अल रेकाय्यत’ को होर्मुज स्ट्रेट के पास निशाना बनाया जाना बिल्कुल अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि कतर ऐसे हमलों के जवाब में जरूरी कदम उठा रहा है।

इस बीच ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने अमेरिका पर संघर्षविराम तोड़ने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका की दादागिरी का दौर अब खत्म हो चुका है और वे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।