‘किसे कब देंगे बेल- ये अदालत का अपना विवेक’: उमर खालिद मामले में बोले पूर्व CJI चंद्रचूड़, कहा- राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में केस को गहराई से समझना जरूरी

साल 2020 में दिल्ली दंगों की साजिश रचने वाले उमर खालिद की हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में जमानत खारिज हुई। इसके बाद उमर खालिद पर गंभीर आरोपों को नजरअंदाज करते हुए पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने जमानत की पैरवी की है। पूर्व CJI ने कहा कि मेरा मानना है कि जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो तो कोर्ट की जिम्मेदारी है कि वह केस को गहराई से समझे।

दरअसल, रविवार (18 जनवरी 2026) को 19वें जयपुर साहित्य महोत्सव में ‘आइडियाज ऑफ जस्टिस’ सत्र में पत्रकार वीर सांघवी के उमर खालिद की जमानत पर पूछे गए सवाल पर पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने कहा, “दोषसिद्धि से पहले जमानत का अधिकार है। हमारा कानून एक प्रकल्पना पर आधारित है और वह प्रकल्पना यह है कि कोई आरोपित व्यक्ति, अपराध सिद्ध होने तक निर्दोष है।”

पूर्व CJI ने सवाल करते हुए कहा, “अगर कोई पाँच या सात साल तक जेल में बिना सजा पाए रहे और बाद में निर्दोष साबित हो जाए, तो उस खोए हुए समय का मुआवजा आप कैसे देंगे?” उन्होंने अलग-अलग मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि जमानत इसीलिए भी नामंजूर होती है कि कहीं आरोपित बाहर फिर से अपराध न करे, निकलकर सबूतों में छेड़छाड़ या कानून से बचने की कोशिश न करे।

चंद्रचूड़ ने आगे कहा, “अगर ये तीनों वजहें नहीं हैं, तो जमानत देनी ही चाहिए। मेरा मानना है कि जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो तो कोर्ट की जिम्मेदारी है कि वह केस को गहराई से समझे। वरना क्या होता है, लोग सालों तक जेल में रह जाते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोलते हुए पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि सेशंस और जिला अदालतों द्वारा जमानत नामंजूर करना चिंता की बात है। उन्होंने बताया कि कई बार जज इसलिए हिचकिचाते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि उनकी ईमानदारी पर सवाल उठ सकता है। यही वजह है कि जमानत के मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच जाते हैं। उन्होंने कहा, “अगर तेज ट्रायल में देरी हो रही है, तो आरोपित को जमानत मिलने का हक है।”

क्या उमर खालिद पर गंभीर नहीं अदालत या आरोप गंभीर नहीं?

गौरतलब है कि उमर खालिद की जमानत लगातार अलग-अलग अदालतों में खारिज हुई है। सबसे पहले सेशंस कोर्ट ने उमर की जमानत याचिका नामंजूर की थी। उसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 02 दिसंबर 2025 को जमानत नहीं दी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 05 जनवरी 2026 को उमर की जमानत याचिका खारिज कर दी।

तो CJI चंद्रचूड़ का यह कहना है कि कोर्ट को गंभीर होना चाहिए, तो यहाँ तीन बार जमानत खारिज होने से साफ होता है कि अदालतें मामले को गंभीर मान रही हैं औऱ उन्होंने आरोपित को बाहर आने पर फिर से कानून से बचने या किसी और अपराध में शामिल होने की संभावना को देखते हुए यह फैसला दिया है।

बार-बार जमानत खारिज होने का मुख्य कारण उमर के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। उमर पर मुख्य आरोप 2020 के दिल्ली दंगों की ‘बड़ी साजिश‘ रचने का और हिंसा भड़काने में उनकी भूमिका है। पुलिस और अभियोजन ने कहा कि उमर ने भड़काऊ भाषण और सुनियोजित रूप से हिंसा को अंजाम देने में सहयोग किया। अदालत ने भी इन्हीं आरोपों और साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाते हुए कहा कि जमानत इस समय नहीं दी जा सकती है।