भारत की अगली जनगणना (लोगों की गिनती) के लिए एक बड़ी खबर आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देखरेख में सरकार ने 2027 की जनगणना के लिए हरी झंडी दे दी है। इस पूरे काम के लिए सरकार ने 11,718 करोड़ रुपए से ज़्यादा का मोटा बजट पास किया है। यह जनगणना इसलिए भी ख़ास है क्योंकि यह गिनती COVID-19 महामारी के कारण 2021 में नहीं हो पाई थी।
यह आज़ादी के बाद की आठवीं बार होने वाली गिनती होगी और इस बार का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि यह पूरी तरह से डिजिटल होगी यानी जानकारी कागज पर नहीं, बल्कि मोबाइल ऐप के जरिए जमा की जाएगी।
जनगणना कब और कैसे होगी?
जनगणना का यह बड़ा काम दो आसान चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में, जो अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा, घरों की गिनती की जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि देश में कितने घर हैं और उन घरों में बिजली, पानी, शौचालय जैसी कौन-कौन सी सुविधाएँ मौजूद हैं।
दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा। इसे जनसंख्या गणना कहा जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति से जुड़ी जानकारी ली जाएगी, जैसे उम्र, धर्म, भाषा, पढ़ाई और काम-धंधे से जुड़ी बातें। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे ठंडे और पहाड़ी इलाकों में मौसम की वजह से यह काम पहले शुरू किया जाएगा। इन राज्यों में जनगणना की शुरुआत सितंबर 2026 से ही कर दी जाएगी।
30 लाख कर्मचारी होंगे तैनात
जनगणना जैसे बड़े काम के लिए सरकार करीब 30 लाख लोगों को ड्यूटी पर लगाएगी। इनमें घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करने वाले कर्मचारी, उनकी निगरानी करने वाले अधिकारी और उन्हें ट्रेनिंग देने वाले लोग शामिल होंगे। इनमें से ज़्यादातर सरकारी स्कूलों के शिक्षक होंगे, जिन्हें राज्य सरकारें नियुक्त करेंगी।
ये कर्मचारी हर घर में जाकर लोगों से आसान सवाल पूछेंगे और जरूरी जानकारी लिखेंगे। इसमें घर की हालत, वहाँ मिलने वाली सुविधाएँ, पढ़ाई-लिखाई, लोग कहाँ से आकर बसे हैं और जाति से जुड़ी जानकारी शामिल होगी।
पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल
यह जनगणना भारत की पहली ऐसी जनगणना होगी, जो पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जाएगी। कर्मचारी कागज की जगह मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करेंगे और उसी में सारी जानकारी दर्ज करेंगे। यह ऐप एंड्रॉयड और आईफोन दोनों में काम करेगा।
पूरे काम पर नजर रखने के लिए एक खास ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है, जिससे यह देखा जा सकेगा कि काम सही से हो रहा है या नहीं। इलाकों की सीमा तय करने के लिए भी एक डिजिटल मैपिंग टूल होगा, ताकि किसी घर की गिनती छूटे नहीं। खास बात यह है कि लोग चाहें तो अपनी जानकारी खुद भी सुरक्षित तरीके से ऑनलाइन भर सकेंगे। पूरी प्रक्रिया में डेटा की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
तेजी से मिलेंगे परिणाम और रोजगार
जनगणना पूरी तरह डिजिटल होने से इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इसके नतीजे जल्दी सामने आ जाएँगे। जानकारी को कंप्यूटर और मशीन आसानी से पढ़ सकें, इसके लिए सरकार एक खास डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाएगी, ताकि अलग-अलग मंत्रालय और विभाग इस डेटा का इस्तेमाल कर सकें।
इस पूरे काम के लिए करीब 18,600 तकनीकी लोगों को लंबे समय तक काम मिलेगा, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होगा। साथ ही, लोगों को यह समझाने के लिए कि जनगणना क्यों जरूरी है, देशभर में जागरूकता और प्रचार अभियान भी चलाया जाएगा।

